Monday, 7 September 2026
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Marital Rape अपराध है या नहीं? केंद्र का रुख स्पष्ट होने के बाद सुनवाई की तारीख तय करेगा सुप्रीम कोर्ट

INT News7 September 2026 at 02:21 pm

मैरिटल रेप यानी वैवाहिक बलात्कार को अपराध की श्रेणी में लाने से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई की उपयुक्त तारीख तय करने से पहले सुप्रीम कोर्ट, केंद्र सरकार का रुख जानना चाहेगा. वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह ने भारत के चीफ जस्टिस (सीजेआई) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन न्यायाधीशों की पीठ के समक्ष वैवाहिक दुष्कर्म के मामले में पति के खिलाफ अभियोजन (दोष) से संबंधित एक याचिका का उल्लेख किया और अनुरोध किया कि याचिकाओं के इस समूह को नवंबर में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए.

केंद्र सरकार ने मैरिटल रेप के संबंध में नहीं दिया है ठोस जवाब

पीड़ित पत्नी की ओर से पेश जयसिंह ने कहा कि इन मामलों को बुधवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है, लेकिन केंद्र ने अभी तक इस मामले में कोई ठोस जवाब दाखिल नहीं किया है और पक्षकारों ने भी एक-दूसरे को याचिकाओं की प्रतियां नहीं दी हैं. वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा कि केंद्र ने अभी तक जवाब दाखिल नहीं किया है, केवल प्रारंभिक आपत्ति दर्ज की है. मैं नवंबर में सुनवाई की निश्चित तारीख चाहती हूं. हमने अभी तक याचिकाओं की प्रति का आदान-प्रदान नहीं किया है. हमें नहीं पता कि इन याचिकाओं में क्या समानताएं हैं और क्या अंतर हैं.

केंद्र के रुख के बाद सुप्रीम कोर्ट सुनवाई की तारीख तय करेगा

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मामला बुधवार के लिए सूचीबद्ध है. केंद्र सरकार की ओर से भी कोई पेश होगा. हम देखेंगे कि वे क्या कहते हैं और उसके बाद उसी के अनुसार सुनवाई की उपयुक्त तारीख तय करेंगे. एक अन्य याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता करुणा नंदी ने कहा कि मामले की सुनवाई की कोई भी तारीख तय की जा सकती है, ताकि सभी पक्ष अपनी दलीलें और संबंधित दस्तावेज दाखिल करने की प्रक्रिया पूरी कर सकें. कोर्ट को बताया गया कि इन याचिकाओं में आपराधिक कानून के तहत वैवाहिक दुष्कर्म से संबंधित प्रावधानों की संवैधानिक वैधता और उनकी व्याख्या का मुद्दा उठाया गया है.

वयस्क पत्नी के साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाना अपराध नहीं

भारतीय दंड संहिता (भादंसं) की धारा 375 में दिए गए अपवाद के तहत यदि पत्नी नाबालिग नहीं है तो किसी पुरुष द्वारा अपनी पत्नी के साथ यौन संबंध बनाना या यौन कृत्य करना दुष्कर्म नहीं माना जाता.शीर्ष न्यायालय ने 16 जनवरी, 2023 को उन कई याचिकाओं पर केंद्र से जवाब मांगा था, जिनमें भादंसं के उस प्रावधान को चुनौती दी गई थी, जो वयस्क पत्नी के साथ जबरन यौन संबंध बनाने के मामले में पति को उसके अपराध से संरक्षण देता था.

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