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बस एक बार मेरी बेटियों से मिलवा दीजिए:4 साल से बच्चों से दूर मां लगा रही इंदौर प्रशासन से गुहार, आरोप- कार्ट का फैसा भी नहीं माना
कोई भी पिता अपने बच्चों को बहुत कुछ दे सकता है, लेकिन मां की ममता नहीं दे सकता। मुझे सिर्फ एक बार मेरी बेटियों से मिलवा दीजिए। यह कहते हुए मिनी सूद की आंखें भर आईं। साढ़े चार साल से अपनी दो बेटियों से दूर मिनी अब उन्हें एक बार देखने और बात करने के लिए प्रशासन से मदद की गुहार लगा रही हैं। अपनी बेटियों से मुलाकात के लिए वो हर दिन अधिकारियों के चक्कर काट रही हैं। हाल ही में उन्होंने इंदौर कलेक्टर कार्यालय में आयोजित जनसुनवाई में आवेदन देकर बेटियों से मिलवाने की मांग की थी। मिनी के मुताबिक उनकी बड़ी बेटी 15 वर्षीय प्रिशा और छोटी बेटी 9 वर्षीय दिविना मार्च 2022 से उनसे अलग हैं। पति आदर्श सूद से लंबे समय से पारिवारिक विवाद चल रहा था। मिनी ने बताया कि बेटियों की परीक्षाएं खत्म होने के बाद वे दोनों को उनके पिता से मिलवाने मुंबई स्थित पैतृक घर लेकर गई थीं। उनका आरोप है कि बच्चों को घर के अंदर रख लिया गया, जबकि उन्हें धक्का देकर बाहर निकाल दिया गया। मिनी का कहना है कि उन्होंने सोचा कि कुछ दिन पिता के साथ रहने से बच्चों और परिवार के बीच रिश्ते सामान्य हो जाएंगे। इसी उम्मीद में वे इंदौर लौट आईं। लेकिन स्कूल शुरू होने से पहले जब वे बेटियों को लेने मुंबई पहुंचीं तो घर खाली मिला। पड़ोसियों से पता चला कि परिवार वहां से जा चुका है। लोकेशन मिली, लेकिन बच्चे नहीं मिले मिनी के अनुसार उन्होंने इंदौर पुलिस से मदद मांगी। इसके बाद बच्चों की लोकेशन महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले के इचलकरंजी क्षेत्र में मिली। वे वहां भी पहुंचीं, लेकिन उन्हें बताया गया कि परिवार वहां नहीं है। इसके बाद मिनी ने हाईकोर्ट में हेबियस कॉर्पस याचिका दायर की। इसी दौरान उन्हें पता चला कि बच्चों की कस्टडी को लेकर मुंबई में मामला दायर किया जा चुका है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने उन्हें महीने में दो बार चिल्ड्रन कॉम्प्लेक्स में बच्चों से मिलने और एक बार वीडियो कॉल पर बात करने का आदेश दिया था। मिनी का आरोप है कि कोर्ट के आदेश के बावजूद उन्हें बच्चों से मिलने नहीं दिया गया। सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला मिनी का कहना है कि आदेश का पालन नहीं होने पर वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा की मदद से वे सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं। वहां से मामला इंदौर ट्रांसफर किया गया। उनके मुताबिक 2023 से केस इंदौर में चल रहा है। 2025 में हाईकोर्ट से मामले को शीघ्र सुनवाई के लिए भी सूचीबद्ध कराया गया, लेकिन अब तक बेटियों से फोन पर बात या मुलाकात नहीं हो पाई है। मिनी ने बताया कि कोर्ट में लगाए गए एक आवेदन के जरिए उन्हें पता चला कि उनकी बड़ी बेटी का एक्सीडेंट हुआ था और उसके पैर में फ्रैक्चर आया है। उनका कहना है कि इस स्थिति में भी उन्हें बेटी से मिलने नहीं दिया गया। रेजिडेंशियल ऑर्डर के बावजूद घर में तोड़फोड़ का आरोप मिनी ने पति आदर्श सूद, जेठ समीर और जेठानी हनी पर भी आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि घरेलू हिंसा के मामले में उनके पक्ष में रेजिडेंशियल ऑर्डर होने के बावजूद घर में तोड़फोड़ की गई। उनके अनुसार बेडरूम का दरवाजा और घर के ताले तोड़े गए। घर में रखा सामान भी गायब कर दिया गया। घर को नुकसान पहुंचने के बाद अब उन्हें हॉस्टल में रहने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। मिनी ने बताया कि उनके पति बड़े कारोबारी हैं और उनका कारोबार पीथमपुर से लेकर मुंबई तक फैला हुआ है।