समाचार · मध्य प्रदेश
भिंड में सहकारिता समिति कर्मचारियों ने दी आंदोलन की चेतावनी:कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा, बोले- एफआईआर और निलंबन के आदेश हों निरस्त
भिंड में सहकारिता समिति कर्मचारी महासंघ ने मंगलवार को अपनी विभिन्न मांगों को लेकर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। कर्मचारियों ने गेहूं उपार्जन में कथित फर्जी पंजीयन के मामलों में समिति प्रबंधकों और कंप्यूटर ऑपरेटरों पर दर्ज एफआईआर एवं निलंबन की कार्रवाई को अनुचित बताते हुए इसे तत्काल वापस लेने की मांग की। साथ ही चेतावनी दी कि यदि 15 जुलाई तक मांगें नहीं मानी गईं तो जिलेभर में आंदोलन शुरू कर सभी कार्य बंद कर दिए जाएंगे। जिलाध्यक्ष प्रदीप सिंह परमार के नेतृत्व में कर्मचारियों ने ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि गेहूं उपार्जन के दौरान पंजीयन में हुई कथित अनियमितताओं के लिए केवल सहकारी समिति के कर्मचारियों को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है। संगठन का कहना है कि उपार्जन नीति के अनुसार पंजीयन का सत्यापन राजस्व विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी है। ऐसे में कार्रवाई भी संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों पर होना चाहिए। प्रशिक्षण नहीं मिलने से हुईं तकनीकी त्रुटियां महासंघ का कहना है कि कंप्यूटर ऑपरेटरों को पंजीयन प्रक्रिया का समुचित प्रशिक्षण नहीं दिया गया था, जिससे तकनीकी त्रुटियां हुईं। कर्मचारियों ने बताया कि पंजीयन से संबंधित ओटीपी समिति प्रभारी के पास नहीं, बल्कि किसान, राजस्व विभाग और ऑपरेटर के पास पहुंचती है। ऐसे में समिति कर्मचारियों पर एफआईआर दर्ज करना और निलंबन की कार्रवाई करना न्यायसंगत नहीं है। कर्मचारियों ने शासन के आदेश के बावजूद अतिरिक्त पारिश्रमिक और अन्य सेवा संबंधी लाभ नहीं मिलने का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने सहायक समिति प्रबंधकों की पदोन्नति, अतिरिक्त वेतन भुगतान और अन्य लंबित मांगों का जल्द निराकरण करने की मांग की। 15 जुलाई के बाद काम बंद करने की चेतावनी महासंघ ने कहा कि यदि 15 जुलाई तक मांगों का समाधान नहीं हुआ तो समिति प्रबंधक, सहायक प्रबंधक, कंप्यूटर ऑपरेटर, विक्रेता और अन्य कर्मचारी अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन शुरू करेंगे। इसके साथ ही ऋण वितरण, कर्ज वसूली, खाद-बीज वितरण, उपार्जन और ऑनलाइन ईआरपी समेत सभी कार्य बंद कर दिए जाएंगे। संगठन ने कहा कि इससे किसानों और उपभोक्ताओं को होने वाली असुविधा की जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।