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रवनीत बिट्टू-दिलजीत की कंट्रोवर्सी में एचएस फूलका की एंट्री:बोले-दिल्ली में कांग्रेस सपोर्टर ने सिख मारे, पंजाब में आतंकियों ने हिंदू मारे; फिल्म-वीडियो में पूरा सच दिखाओ
पंजाब में जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर बनी फिल्म सतलुज के विवाद और प्रदर्शन को लेकर राजनीतिक माहौल गर्मा गया है। केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू और पंजाबी सिंगर-एक्टर दिलजीत दोसांझ के बीच पैदा हुई इस कंट्रोवर्सी में अब 1984 दंगा पीड़ितों के केस लड़ने वाले एडवोकेट व भाजपा नेता एचएस फूलका की एंट्री हो गई है। फूलका ने एक वीडियो जारी कर कहा कि सच्चाई दिखाने से कभी कोई कंट्रोवर्सी नहीं होती और न ही माहौल खराब होता है। फिल्म हो या वीडियो, उसमें पूरी सच्चाई दिखाई जानी चाहिए ताकि नई पीढ़ी के पास सही संदेश जाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि काले दौर में भी हिंदू-सिख एकता कायम रही और इसे तोड़ने की कोशिशें कभी कामयाब नहीं होंगी। फूलका का कहना है कि इनोसेंट लोगों की हत्या को कोई भी सही नहीं ठहराएंगे, चाहे वो हिंदू हो या सिख। फूलका ने कहा कि उस पर भी फिल्म बनाएं जब आतंकी बस में से हिंदुओं को बाहर निकालकर मार रहे थे और एक निहंग ने बस में बैठे एक युवक को जफ्फी मारी और कहा कि इसे मारने से पहले मुझे मारें। दरअसल, सतलुज फिल्म के आटीटी प्लेटफार्म पर रिलीज होते ही विवाद शुरु हुआ और केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने फिल्म के फेक्ट्स पर सवाल खड़े किए और कहा कि इसमें एक तरफा सच दिखाया गया है। उसके बाद उन्होंने आतंकवाद के दौर के वीडियो व फोटो सोशल मीडिया पर रिलीज किए। वहीं दिलजीत ने फिल्म को पंजाब का इतिहास बताया। एचएस फूलका ने कही ये अहम बातें... फिल्म में एकतरफा दिखाया गया, फेक्ट प्रूफ करें रवनीत सिंह बिट्टू ने दिलजीत दोसांझ पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें 'मौकापरस्त' करार दिया, जो सिर्फ व्यावसायिक फायदे और पब्लिसिटी के लिए पंजाब के काले दौर का एकतरफा नैरेटिव बेचते हैं। उन्होंने कहा कि इस फिल्म में एक तरफा फेक्ट दिखाए गए हैं। बिट्टू ने फिल्म मेकर्स को यहां तक कह दिया कि इसे इसमें जो फेक्ट दिखाए गए हैं उन्हें प्रूफ करें। बिट्टू ने चुनौती देते हुए कहा कि अगर दिलजीत और फिल्म मेकर्स में वाकई हिम्मत है, तो वे राजपुरा के सरकारी स्कूल की प्रिंसिपल निर्मल कांता जैसी बेगुनाह पीड़ितों पर फिल्म बनाएं, जिनकी आतंकियों ने बेरहमी से हत्या कर दी थी। उन्होंने कहा कि बसों से उतारकर मासूम हिंदुओं को जिस तरह मौत के घाट उतारा गया, उस दर्द पर फिल्म क्यों नहीं बनती?