Sunday, 1 November 2026
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गयाजी में जुटे 10 देशों के भिक्षु-लामा, महाबोधि मंदिर में हुआ महा धार्मिक आयोजन

INT News1 November 2026 at 07:54 pm

Maha Kathina Chivara Dana Bodh Gaya : महाबोधि मंदिर परिसर में पवित्र बोधिवृक्ष की छांव तले रविवार को महा कठिन चीवरदान समारोह का आयोजन किया गया. महाबोधि मंदिर प्रबंधन समिति की ओर से आयोजित इस समारोह में थाइलैंड, वियतनाम, श्रीलंका, कंबोडिया, म्यांमार, भारत, बांग्लादेश और तिब्बत सहित विभिन्न देशों के बौद्ध भिक्षु और लामा शामिल हुए. समारोह में करीब एक हजार भिक्षुओं और लामाओं को श्रद्धालुओं ने चीवर दान किया.

दीप प्रज्ज्वलन के साथ समारोह का शुभारंभ

कार्यक्रम की शुरुआत तथागत बुद्ध के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर की गयी. इसके बाद थेरवाद और महायान परंपरा के भिक्षुओं एवं लामाओं ने विश्व शांति के लिए प्रार्थना की. उन्होंने देश-दुनिया में आपसी भाईचारे, करुणा और मानवता के प्रसार की कामना की. वरीय बौद्ध भिक्षुओं ने मंत्रोच्चार के साथ चीवरदान समारोह का शुभारंभ किया.

इस अवसर पर बोधगया मंदिर प्रबंधन समिति के प्रभारी सचिव एवं वरीय अपर समाहर्ता परितोष कुमार मौजूद रहे. महाबोधि मंदिर के भिक्षु चालिंदा, केयरटेकर भिक्षु डॉ. दीनानंद सहित विभिन्न बौद्ध मठों के भिक्षुओं और लामाओं ने बारी-बारी से सुत्त पाठ कर विश्व शांति की कामना की.

श्रद्धालुओं ने भिक्षुओं को किया चीवर दान

समारोह के दौरान थाइलैंड से आये बौद्ध श्रद्धालुओं ने भिक्षुओं और लामाओं को चीवर दान किया. कार्यक्रम के समापन पर सभी भिक्षुओं और लामाओं को संघदान यानी भोजन कराया गया. इसके साथ ही उन्हें नगद राशि और दैनिक उपयोग की सामग्री भी दान स्वरूप भेंट की गयी.

वर्षावास के बाद चीवरदान की परंपरा

बौद्ध परंपरा के अनुसार, वर्षा ऋतु में तीन महीने तक वर्षावास में रहने के बाद भिक्षुओं को श्रद्धालुओं की ओर से धारण करने के लिए वस्त्र यानी चीवर दान किया जाता है. इसके साथ ही दैनिक उपयोग की आवश्यक सामग्री भी भेंट की जाती है.

महाबोधि मंदिर परिसर में आयोजित समारोह के बाद अब बोधगया के विभिन्न बौद्ध मठों में भी चीवरदान कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे. इनमें बौद्ध भिक्षु शामिल होंगे और श्रद्धालु उन्हें चीवर तथा दैनिक उपयोग की सामग्री दान करेंगे. इसके अलावा महाबोधि मंदिर परिसर में विश्व शांति के निमित्त विभिन्न बौद्ध संगठनों की ओर से पूजा समारोह भी आयोजित किये जायेंगे.

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