समाचार · मध्य प्रदेश
मुआवजा नहीं तो हटेंगे नहीं, नौवें दिन भी डटे विस्थापित:केन-बेतवा विस्थापितों के चिता आंदोलन का नौवां दिन; अमित भटनागर का स्वास्थ्य बिगड़ा
छतरपुर में केन-बेतवा लिंक परियोजना सहित मझगांव, रूंझ, नेगुवा और एनटीपीसी परियोजनाओं से प्रभावित विस्थापित परिवारों का 'चिता आंदोलन' रविवार को नौवें दिन भी जारी रहा। जय किसान संगठन के बैनर तले चल रहे आंदोलन में मुआवजा, पुनर्वास और कथित अनियमितताओं की जांच की मांग को लेकर प्रदर्शन किया जा रहा है। आंदोलन के संयोजक अमित भटनागर का आमरण अनशन छठवें दिन भी जारी रहा, जबकि आंदोलनकारियों ने उनके स्वास्थ्य को लेकर चिंता जताई है। आंदोलनकारियों ने अपने विरोध को अलग-अलग स्वरूप दिए हैं। आमरण अनशन के साथ 'मिट्टी सत्याग्रह' पांचवें दिन, 'जल सत्याग्रह' चौथे दिन और 'फांसी सत्याग्रह' दूसरे दिन भी जारी रहा। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं होता, आंदोलन जारी रहेगा। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे अमित भटनागर ने भू-अर्जन, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन अधिनियम-2013 की धारा 38(1) और 38(2) का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि पूर्ण मुआवजा दिए बिना भूमि अधिग्रहण और मकानों को तोड़ना कानून के विरुद्ध है। उनका कहना है कि प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा और वैधानिक प्रक्रिया का पालन किए बिना बेदखल किया जा रहा है। स्वास्थ्य परीक्षण नहीं होने का आरोप आंदोलनकारियों का आरोप है कि आमरण अनशन के छह दिन पूरे होने के बावजूद प्रशासन ने अब तक अमित भटनागर का स्वास्थ्य परीक्षण या मेडिकल जांच नहीं कराई। उन्होंने इसे प्रशासन की असंवेदनशीलता बताया। क्रमिक अनशन पर बैठीं पुनय आदिवासी सहित कई महिलाओं ने आरोप लगाया कि बिना सहमति, बिना नोटिस और पर्याप्त मुआवजे के उनके घर, जमीन और आजीविका छीन ली गई। उनका कहना है कि कई परिवारों के मकान तोड़ दिए गए, जबकि मुआवजा या पुनर्वास की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई। पन्ना जिले के कोनी, बिलहटा, गहदरा और महरा गांवों से आई महिलाओं ने भी प्रशासन पर इसी तरह के आरोप लगाए हैं। बढ़ रहा आंदोलन को समर्थन आंदोलन को विभिन्न सामाजिक संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का समर्थन मिल रहा है। बड़वानी से जाग्रत दलित आदिवासी संगठन के प्रतिनिधि, गांधी आश्रम से जुड़ी दमयंती बहन तथा हरियाणा के साहित्यकार अविनाश कुमार सहित कई लोग आंदोलन स्थल पर पहुंचे और विस्थापितों के समर्थन में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। आंदोलनकारियों का कहना है कि जब तक सभी प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा, पुनर्वास और कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। वहीं, प्रशासन की ओर से इस संबंध में विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।