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जादवपुर यूनिवर्सिटी पहुंची नेहा बोरा ने सरकार साधा निशाना, कहा-दुनिया में जुल्म रहेगा तो वामपंथ भी...

कोलकाता के जादवपुर यूनिवर्सिटी में आयोजित ‘जेन-जी आंदोलन: पीढ़ी और प्रतिरोध की एकता’ कन्वेंशन में शामिल होने पहुंची AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने कहा कि वामपंथ को मार-पीट या धमकियों से घुटने नहीं टेकने दिए जा सकते. क्योंकि यह विचारधारा न तो डरती है और न ही बिकती है. वामपंथ राजनीति को लेकर नेहा बोरा का यह वीडियो वायरल हो रहा है.
एक आवाज भी बची तो वामपंथ जिंदा रहेगा
कन्वेंशन को संबोधित करते हुए नेहा बोरा ने कहा कि जब तक इस देश में, बंगाल में, दुनिया भर में जुल्म के खिलाफ एक भी आवाज जिंदा रहेगी, तब तक वामपंथ जिंदा रहेगा. उन्होंने आगे कहा कि वामपंथ के साथ वह समुदाय भी जिंदा रहेगा, जो न डरता है और न बिकता है.
बोरा ने जादवपुर यूनिवर्सिटी की स्थिति की तुलना सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट यानी SRFTI और दिल्ली में हुए प्रदर्शनों से की.
उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने अलग-अलग जगहों पर हिंसा और दबाव का सामना किया है, उनके बीच एक-दूसरे के संघर्ष को समझने की क्षमता ज्यादा है.
जादवपुर और SRFTI को लेकर क्या बोलीं बोरा?
नेहा बोरा ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल के प्रमुख शिक्षण संस्थानों में दक्षिणपंथी संगठनों से जुड़े लोगों की ओर से छात्रों और लोकतांत्रिक विचारों को दबाने की कोशिश की जा रही है.
उन्होंने SRFTI में हाल की घटनाओं और जादवपुर यूनिवर्सिटी में पहले हुए विवादों का भी जिक्र किया. पीटीआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक, बोरा ने आरएसएस और बीजेपी से जुड़े संगठनों पर कैंपसों को निशाना बनाने का आरोप लगाया.
अपने भाषण में बोरा ने कहा कि कुछ लोग अपनी ताकत के भरोसे प्रदर्शनकारियों को डराकर पीछे हटाना चाहते हैं. लेकिन लोगों को केवल दबाव या मारपीट के जरिए चुप नहीं कराया जा सकता.
नेहा ने इतिहास में हुए जन आंदोलनों का उदाहरण देते हुए कहा कि जनता की ताकत को लंबे समय तक दबाया नहीं जा सकता.
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यूनिवर्सिटी में नेहा बोरा के कार्यक्रम को लेकर विवाद
कार्यक्रम का आयोजन वामपंथी छात्र संगठनों के समूह ने किया था. इसमें एआईएसए के अलावा एसएफआई से जुड़े नेता और एसआरएफटीआई के छात्र प्रतिनिधि भी शामिल हुए. भीड़ इतनी ज्यादा थी कि कार्यक्रम को केपी बसु मेमोरियल हॉल से बाहर खुले स्थान तक ले जाना पड़ा.
हालांकि नेहा बोरा के जादवपुर यूनिवर्सिटी पहुंचने से पहले ही कार्यक्रम को लेकर विवाद शुरू हो गया था. एबीवीपी ने यूनिवर्सिटी प्रशासन से सवाल किया कि कैंपस में बाहर के राजनीतिक लोगों को कार्यक्रम में शामिल होने की अनुमति कैसे मिली?
यूनिवर्सिटी के कार्यवाहक रजिस्ट्रार देबजीत दत्ता ने बताया कि नेहा बोरा के कार्यक्रम की अनुमति से जुड़ी कोई सूचना नहीं थी. दूसरी ओर आयोजक पक्ष का कहना था कि कार्यक्रम नियमों के मुताबिक आयोजित किया गया.