Tuesday, 6 October 2026
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12 साल के 12 बड़े आंदोलन : किसानों-पहलवानों के प्रोटेस्ट से NEET पेपर लीक और SIR तक

INT News5 October 2026 at 09:48 pm

मतदाता सूची के शुद्धिकरण के लिए देश भर में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान (SIR) की प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी के विरोध में राजनीतिक पार्टियां आंदोलन कर रहीं हैं. नीट-यूजी पेपर लीक के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देने के लिए मजबूर करने वाली कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) अब मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर आंदोलन कर रही है. दिल्ली में वामदल, आम आदमी पार्टी और कांग्रेस अलग-अलग प्रदर्शन कर रही हैं. आइए, जानते हैं अब तक नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ कितने बड़े आंदोलन हुए हैं और उनका क्या अंजाम हुआ है.

दिल्ली विश्वविद्यालय फॉर ईयर अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम

वर्ष 2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनते ही छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) और अध्यापकों ने दिल्ली विश्वविद्यालय फॉर ईयर अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम (FYUP - 2014) के विरोध में प्रदर्शन किया. उच्च शिक्षण संस्थानों के नये नियमों यूजीसी इक्विटी रूल्स / दिशा-निर्देश पर विभिन्न वर्गों और छात्रों के विरोध के बाद सरकार को पुनर्विचार करना पड़ा. 4 वर्षीय पाठ्यक्रम को रद्द कर 3 वर्षीय मॉडल लागू किया गया.

वन रैंक वन पेंशन (OROP) आंदोलन

पूर्व सैनिकों ने वर्ष 2015 में ‘वन रैंक वन पेंशन’ (OROP) की मांग करते हुए दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया. वे सभी श्रेणियों के सैन्यकर्मियों के लिए समान पेंशन लागू करने की मांग कर रहे थे. सरकार ने पूर्व सैनिकों की मांगों को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए OROP लागू करने की आधिकारिक घोषणा की.

किसान मुक्ति मार्च

ऑल इंडिया किसान संघर्ष समन्वय समिति के बैनर तले वर्ष 2018 में देशभर से हजारों किसानों ने दिल्ली के रामलीला मैदान से संसद तक मार्च निकाला. कृषि ऋण माफी और फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की गारंटी इनकी प्रमुख मांगें थीं. आंदोलन ने राष्ट्रीय स्तर पर कृषि संकट को केंद्र में ला दिया. मोदी सरकार ने ‘पीएम-किसान’ सम्मान निधि योजना की शुरुआत की.

सीएए-एनआरसी विरोधी आंदोलन

नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) के विरोध में वर्ष 2019-2020 में देशभर में प्रदर्शन हुए. दिल्ली का शाहीन बाग इस आंदोलन का प्रमुख केंद्र बना. मार्च 2020 में कोविड-19 महामारी और देशव्यापी लॉकडाउन के कारण धरना स्थलों को खाली करा लिया गया और आंदोलन समाप्त हो गया.

ऐतिहासिक किसान आंदोलन

केंद्र सरकार द्वारा पारित 3 नये कृषि कानूनों के खिलाफ पंजाब, हरियाणा और यूपी के किसानों ने वर्ष 2020-2021 में दिल्ली की सीमाओं (सिंघू, टिकारी, गाजीपुर) पर एक साल से अधिक समय तक ऐतिहासिक धरना दिया. केंद्र सरकार ने तीनों कृषि कानूनों को संसद में आधिकारिक रूप से वापस ले लिया. इसके बाद किसानों ने आंदोलन समाप्त किया.

अग्निपथ योजना विरोधी आंदोलन

भारतीय सशस्त्र बलों में 4 साल की अल्पकालिक भर्ती योजना ‘अग्निपथ’ के विरोध में वर्ष 2022 में युवाओं ने बिहार, उत्तर प्रदेश और तेलंगाना समेत कई राज्यों में हिंसक प्रदर्शन और आगजनी की. सरकार ने योजना को वापस नहीं लिया. हालांकि, उम्मीदवारों की ऊपरी आयु सीमा में छूट दी और सेवानिवृत्त अग्निवीरों के लिए अन्य पुलिस बलों में आरक्षण का प्रावधान किया.

महिला पहलवानों का विरोध प्रदर्शन

भारत की शीर्ष महिला पहलवानों ने कुश्ती महासंघ (WFI) के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए वर्ष 2023 में दिल्ली के जंतर-मंतर पर कई हफ्तों तक धरना दिया. आंदोलन के बाद दिल्ली पुलिस ने इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की और अदालती कार्यवाही शुरू हुई. बृजभूषण शरण सिंह को WFI के अध्यक्ष पद से हटना पड़ा.

लद्दाख स्वायत्तता आंदोलन

सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक और स्थानीय संगठनों ने लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने और पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग करते हुए वर्ष 2024 में भूख हड़ताल और मार्च निकाले. केंद्र सरकार ने मांगों पर चर्चा के लिए उच्चस्तरीय समिति का गठन किया और लद्दाख के नेताओं के साथ वार्ता प्रक्रिया जारी रखी.

नीट-यूजी परीक्षा पेपर लीक के विरोध में आंदोलन

मेडिकल में दाखिले के लिए आयोजित होने वाली प्रवेश परीक्षा NEET-UG के प्रश्नपत्र लीक के विरोध में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की अगुवाई में वर्ष 2026 में युवाओं ने जोरदार आंदोलन किया. आंदोलनकारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अड़े थे. प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा. इसके बाद आंदोलन समाप्त हुआ.

संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) लैटरल एंट्री

UPSC ने बिना आरक्षण लागू किये ब्यूरोक्रेसी में सीधे संयुक्त सचिव और निदेशक स्तर के 45 पदों पर भर्ती का विज्ञापन वर्ष 2024 में निकाला था. विपक्षी दलों के साथ-साथ एनडीए के सहयोगी दलों (जदयू और लोजपा) ने एससी, एसटी और ओबीसी के लिए आरक्षण नहीं होने पर ऐतराज जताया. सरकार ने कदम पीछे खींचते हुए कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) के जरिये UPSC को इस विज्ञापन को रद्द करने का निर्देश दिया.

वक्फ बोर्ड संशोधन विधेयक

वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन और नियमों में बदलाव के लिए वर्ष 2024 में सरकार वक्फ संशोधन विधेयक लेकर आयी. मुस्लिम संगठनों, विपक्षी दलों और सहयोगी दलों के दबाव के कारण सरकार संसद में इसे सीधे पास कराने की स्थिति में नहीं रही. फलस्वरूप बिल को विस्तृत समीक्षा के लिए संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेजने का निर्णय लेना पड़ा.

ब्रॉडकास्टिंग सर्विसेज बिल ड्राफ्ट

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स, यूट्यूबर्स और OTT प्लेटफॉर्म्स के लिए वर्ष 2024 में एक मसौदा (ड्राफ्ट) विधेयक तैयार किया था. स्वतंत्र पत्रकारों, कंटेंट क्रिएटर्स और डिजिटल राइट्स ग्रुप्स ने इसे अभिव्यक्ति की आजादी और निजता पर हमला करार देते हुए आंदोलन शुरू कर दिया. विवाद बढ़ता देख मंत्रालय ने मसौदे को पूरी तरह से वापस ले लिया और नये सिरे से परामर्श करने की बात कही.

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सरकार के खिलाफ अब तक हुए बड़े प्रदर्शनों की लिस्ट