समाचार · मध्य प्रदेश
रिश्वत मांगने पर प्रभारी परियोजना अधिकारी निलंबित:आंगनवाड़ी सहायिका की नियुक्ति के बदले मांगे ₹1 लाख; तीन ऑडियो रिकॉर्डिंग से पुष्टि
सीधी जिले में महिला एवं बाल विकास विभाग ने आंगनवाड़ी सहायिका की नियुक्ति के बदले रिश्वत मांगने के आरोप में बड़ी कार्रवाई की है। मझौली बाल विकास परियोजना में पदस्थ पर्यवेक्षक एवं प्रभारी परियोजना अधिकारी श्रीमती ज्योति विश्वकर्मा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। आरोप है कि आंगनवाड़ी सहायिका पद पर नियुक्ति कराने के बदले आवेदिका से 1 लाख रुपए की रिश्वत मांगी गई थी। सीधी कलेक्टर विकास मिश्रा के अनुसार, ग्राम पांड क्रमांक-01 स्थित आंगनवाड़ी केंद्र में सहायिका पद के लिए श्रीमती किरण बैगा ने एमपी ऑनलाइन चयन पोर्टल के माध्यम से आवेदन किया था। आवेदिका ने आरोप लगाया कि ज्योति विश्वकर्मा ने नियुक्ति कराने के बदले व्यक्तिगत रूप से और फोन पर 1 लाख रुपए की मांग की थी। मामला शासन स्तर तक पहुंचने के बाद संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश मिले थे। जांच में तीन ऑडियो रिकॉर्डिंग मिलीं मामले की विभागीय जांच में नियुक्ति प्रक्रिया में जानबूझकर एक माह से अधिक समय तक देरी किए जाने की बात सामने आई। इसी दौरान रिश्वत की मांग से संबंधित तीन ऑडियो रिकॉर्डिंग भी जांच में प्रमाण के रूप में सामने आईं। विभाग ने माना कि प्रभारी परियोजना अधिकारी का यह कृत्य मध्यप्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम 1, 2 एवं 3 के विपरीत है और कदाचरण की श्रेणी में आता है। 31 अगस्त से निलंबन प्रभावी जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर महिला एवं बाल विकास विभाग ने मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम-9 के तहत ज्योति विश्वकर्मा को 31 अगस्त 2026 से तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय कार्यालय परियोजना अधिकारी, बाल विकास परियोजना रामपुर नैकिन क्रमांक-01, जिला सीधी निर्धारित किया गया है। निलंबन अवधि के दौरान ज्योति विश्वकर्मा को नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ते की पात्रता होगी। विभागीय कार्रवाई रिश्वत मांगने के आरोप और जांच में सामने आए साक्ष्यों के आधार पर की गई है।