Friday, 21 August 2026
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श्वास साधना से मन पर नियंत्रण का मार्ग:भोपाल में क्रियायोग शिविर शुरू, 22-23 अगस्त को दानिशकुंज केंद्र में होंगे दीक्षा संस्कार

INT News21 August 2026 at 09:07 pm

भोपाल के शिवाजी नगर स्थित दुष्यंत कुमार स्मारक पांडुलिपि संग्रहालय में शुक्रवार से तीन दिवसीय क्रियायोग ध्यान साधना शिविर शुरू हुआ। प्रज्ञान मिशन कटक एवं परमहंस हरिहरानंद क्रियायोग ध्यान केंद्र, भोपाल के संयुक्त आयोजन में शिविर में पहले दिन उड़ीसा से आए मुख्य वक्ता आचार्य स्वामी परिपूर्णानंद गिरी पुरी के साथ स्वामी दुर्गेशानंद और स्वामी कृष्ण प्रेमानंद उपस्थित रहे। शिविर में बड़ी संख्या में साधकों ने हिस्सा लिया। इस दौरान कई साधकों ने क्रियायोग की दीक्षा भी ली। श्वास और मन के बीच गहरा संबंध आचार्य स्वामी परिपूर्णानंद ने कहा कि क्रियायोग श्वास के विज्ञान पर आधारित प्राचीन ध्यान पद्धति है। श्वास और मन के बीच गहरा संबंध है। श्वास को नियंत्रित करने से मन को नियंत्रित करने और आत्म-अनुशासन विकसित करने में मदद मिलती है। उन्होंने कहा कि क्रियायोग में कर्मयोग, ज्ञानयोग और भक्तियोग का समन्वय देखने को मिलता है। उन्होंने बताया कि महावतार बाबाजी महाराज ने वर्ष 1861 में अपने शिष्य लाहिड़ी महाशय के माध्यम से क्रियायोग की प्राचीन परंपरा को पुन: जनसामान्य तक पहुंचाया। गुरु-शिष्य परंपरा के जरिए यह साधना आज देश-विदेश के साधकों तक पहुंच रही है। स्वामी परिपूर्णानंद ने बताया कि वे 25 से अधिक देशों में क्रियायोग की दीक्षा और शिविर आयोजित कर चुके हैं। आगामी माह ऑस्ट्रेलिया में भी शिविर प्रस्तावित है। नियमित अभ्यास से ही साधना का प्रभाव स्वामी दुर्गेशानंद ने कहा कि क्रियायोग को केवल समझना पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसे नियमित रूप से अभ्यास में उतारना जरूरी है। निरंतर साधना से व्यक्ति के भीतर शांति, एकाग्रता और आत्म-जागरूकता विकसित होती है। व अभ्यास, अनुशासन और समर्पण जरूरी स्वामी कृष्ण प्रेमानंद ने गुरु-शिष्य परंपरा और नियमित साधना के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आध्यात्मिक उन्नति के लिए अभ्यास, अनुशासन और समर्पण जरूरी है। आचार्य स्वामी परिपूर्णानंद ने भोपाल के वातावरण को ध्यान और साधना के अनुकूल बताते हुए शहर के प्रति आत्मीयता भी व्यक्त की। 22-23 अगस्त को दानिशकुंज केंद्र में होंगे सत्र

शिविर के अगले चरण में 22 और 23 अगस्त को दानिशकुंज, कोलार रोड स्थित क्रियायोग केंद्र में दीक्षा संस्कार एवं ध्यान सत्र आयोजित किए जाएंगे।