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नेहरू, इंदिरा गांधी और CIA पर नया खुलासा, ब्रिटिश इतिहासकार मैकगैर की किताब से उठे नए सवाल

INT News11 July 2026 at 07:27 pm

British historian and author Paul McGarr : ब्रिटिश इतिहासकार और लेखक पॉल मैकगैर (Paul McGarr) की किताब से भारत के राजनीतिक और खुफिया इतिहास से जुड़े कई विवादित दावे सामने आए हैं. एएनआई न्यूज एजेंसी के मुताबिक, किताब में कहा गया कि आजाद भारत के शुरुआती दशकों में अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA और ब्रिटिश इंटेलिजेंस की भारतीय राजनीति और प्रशासन तक पहुंच को लेकर कई दस्तावेज और शोध उपलब्ध हैं. हालांकि, इन दावों पर अलग-अलग इतिहासकारों की राय भी अलग रही है और इन्हें लेकर वर्षों से बहस जारी है.

नेहरू के विशेष सहायक पर CIA से संबंध का दावा

एएआई न्यूज एजेंसी से हुई बातचीत में लेखक पॉल मैकगैर ने अपनी किताब और उपलब्ध स्रोतों का हवाला देते हुए दावा किया कि जवाहरलाल नेहरू के विशेष सहायक एम. ओ. मथाई पर CIA (Central Intelligence Agency) से धन लेने के आरोप लगे थे. किताब में बताया गया कि उस समय उनकी संपत्ति को लेकर सवाल उठने के बाद जांच भी हुई थी. कुछ लेखकों ने यहां तक दावा किया कि 1946 से 1959 के बीच पूर्व पीएम नेहरू सचिवालय के दस्तावेज अमेरिकी एजेंसियों तक पहुंचते थे. हालांकि, इन आरोपों को लेकर कभी सर्वसम्मत निष्कर्ष सामने नहीं आया और इस विषय पर इतिहासकारों के बीच मतभेद बने हुए हैं.

1962 के भारत-चीन युद्ध को लेकर भी दावा

एएनआई के कार्यक्रम में लेखक मैकगैर 1962 के भारत-चीन युद्ध का भी चर्चा की है. उन्होंने उपलब्ध दस्तावेज के आधार पर दावा किया कि भारतीय खुफिया ब्यूरो (IB) ने युद्ध से पहले चीन की सैन्य गतिविधियों और संभावित कार्रवाई को लेकर सरकार को चेतावनी दी थी. लेकिन तबके तत्कालीन आईबी प्रमुख बी. एन. मुल्लिक ने यह जानकारी प्रधानमंत्री नेहरू, रक्षा मंत्री वी. के. कृष्ण मेनन और गृह मंत्री लाल बहादुर शास्त्री तक पहुंचाई थी. इसके बावजूद सरकार ने इन चेतावनियों को अपेक्षित गंभीरता से नहीं लिया, जिससे बाद में भारत को सैन्य चुनौती का सामना करना पड़ा.

इंदिरा गांधी और CIA को लेकर भी चर्चा

ब्रिटिश इतिहासकार मैकगैर ने पूर्व अमेरिकी राजनयिक डेनियल पैट्रिक मोयनिहान की पुस्तक का भी उल्लेख किया. इसमें दावा किया गया कि केरल और पश्चिम बंगाल में वामपंथी दलों को सत्ता में आने से रोकने के लिए CIA (Central Intelligence Agency) ने कांग्रेस के पक्ष में आर्थिक मदद पहुंचाई थी. यह भी कहा गया कि उस समय इंदिरा गांधी कांग्रेस अध्यक्ष थीं और उन्हें इन गतिविधियों की जानकारी थी. हालांकि, इन दावों पर भी कोई अंतिम न्यायिक या आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है और इन्हें लेकर इतिहासकारों के बीच लंबे समय से बहस जारी है.

अजीत डोभाल की भूमिका पर सकारात्मक टिप्पणी

ब्रिटिश इतिहासकार मैकगैर ने भारत के वर्तमान राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के बारे में चर्चा हुई.उन्होंने कहा कि डोभाल ने भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति को अधिक सक्रिय, मजबूत और निर्णायक दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े फैसलों में अधिक आक्रामक और प्रभावी रणनीति अपनाई गई, जिसमें डोभाल की सलाह अहम रही.

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