समाचार · उत्तराखंड
‘देहरादून भी NCR का ही एक हिस्सा’… 5 साल की उपलब्धियां गिनाते हुए बोले पुष्कर सिंह धामी

पुष्कर सिंह धामी का उत्तराखंड में बतौर मुख्यमंत्री 5 साल का कार्यकाल पूरा कर लिया है। वे नारायण दत्त तिवारी के बाद लंबे समय तक रहने वाले दूसरे मुख्यमंत्री हैं। सीएम ने कहा है कि दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेव बनने से देहरादून भी एक तरह से एनसीआर का हिस्सा लगता है।धामी ने अपने पांच साल के कार्यकाल के दौरान किए गए कार्यों जानकारी देते हुए यह बात कही। धामी ने दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेव को लेकर कहा है कि 'इस एक्सप्रेसवे के बन जाने से एक तरह से ऐसा हो गया है कि देहरादून भी एनसीआर (नेशनस कैपिटल रीजन) का ही एक हिस्सा हो गया है।' आपको बता दें कि इस एक्सप्रेसवे के जरिए करीब 2.5 घंटे में दिल्ली से देहरादून का सफर हो रहा है। यही वजह है कि सीएम ने एक तरह से अब देहरादून सिटी को भी एनसीआर से जोड़ दिया।एक्सप्रेसवे की खासियतेंआपको बता दें कि दिल्ली से शुरू होकर उत्तर प्रदेश के मेरठ, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, शामली जनपदों से होते हुए देहरादून तक जाने वाला यह एक्सप्रेसवे कुल 213 किलोमीटर लंबा है। इस एक्सप्रेस वे में 12 किलोमीटर लंबा एशिया का सबसे लंबा वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर है। इसमें 6 लेन का एक्सेस कंट्रोल्ड कॉरिडोर, 2 आरओबी, 10 पुल और 7 इंटरचार्ज भी हैं।पीएम मोदी पर क्या कहा?धामी ने एनडीटीवी को दिए एक इंटरव्यू में बताया कि नरेंद्र मोदी बतौर प्रधानमंत्री अपने कार्यकाल में अबतक कुल 28 बार उत्तराखंड आ चुके हैं जो कि राज्य के विकास के लिए उनकी प्रतिबद्धता को दिखाता है। वहीं धामी ने इस बात पर भी खुशी जताई कि उत्तराखंड देश का पहला ऐसा राज्य बना जिसने यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) को लागू किया।यूसीसी के फायदे भी गिनाएसीएम ने यूसीसी के फायदे गिनाते हुए कहा कि 'इसके जरिए सभी को न्याय मिलने की प्रक्रिया तेज हुई। समानता का अधिकार मिला। और हमने पहले ही कहा था कि उत्तराखंड दो-दो अंतराष्ट्रीय सीमाओं से लगा हुआ है राज्या है। जहां हर परिवार से कोई सेना में है तो कोई पैरा मिलिट्री फोर्स में है। चारों धाम यहां है आदि कैलाश यहां है। गांगा और यमुना जैसी पवित्रा नदियां हैं और उत्तराखंड उनका उद्दगम स्थल है तो यहां पर सभी के लिए एकसमान कानून होना चाहिए। देवभूमि का देवत्व बना रहना चाहिए और मुस्लिम महिलाओं को भी समानता का अधिकार मिले। बहु विवाह इद्दत, हलाता और तीन तलाक जैसी कुरीतियां हैं उन सब से कहीं न कहीं सम्मान से जीन का अधिकार मिला है।