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जाह्नवी कपूर के ‘पेड्डी’ सीन विवाद पर...विजय-रश्मिका ने बताई फिल्मी दुनिया की सच्चाई

INT News21 October 2026 at 10:41 pm

Janhvi Kapoor Peddi Controversy : फिल्मों में काम करते समय कलाकारों को कई बार ऐसे कपड़े पहनने या सीन करने पड़ते हैं, जिनमें वे सहज महसूस नहीं करते. लेकिन फिल्म साइन करने के बाद उनके लिए मना करना भी आसान नहीं होता. उन्हें डर रहता है कि कहीं उन्हें गैर-पेशेवर न समझ लिया जाए. अभिनेत्री जाह्नवी कपूर (Janhvi Kapoor) की तेलुगु फिल्म ‘पेड्डी’ (Peddi) के कुछ दृश्यों को लेकर हुई आलोचना के बीच विजय देवरकोंडा (Vijay Deverakonda) और रश्मिका मंदाना (Rashmika Mandanna) ने इसी मुद्दे पर अपनी बात रखी है. दोनों हाल ही में करण जौहर के चैट शो ‘कॉफी विद करण सीजन 9’ (Koffee with Karan Season 9) में पहुंचे थे.

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रश्मिका मंदाना ने बताई अपनी परेशानी

शो के दौरान रश्मिका ने बताया कि कमर्शियल फिल्मों में कई बार कलाकारों को ऐसे कपड़े पहनने पड़ते हैं, जिनमें वे सहज महसूस नहीं करते. उन्होंने माना कि कुछ किरदारों की मांग के अनुसार खास तरह के कपड़े पहनने पड़ सकते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि कलाकार हर बात के लिए तैयार हो जाएं.

रश्मिका के मुताबिक, हर कलाकार की अपनी कुछ सीमाएं होती हैं. अगर वह किसी कपड़े या सीन को लेकर सहज नहीं है, तो उसे अपनी परेशानी बताने का अधिकार होना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में निर्देशक का सहयोग बहुत मायने रखता है. वह उन लोगों के साथ काम करना पसंद करती हैं, जो कलाकारों की बात समझते हैं और उनकी असहजता का सम्मान करते हैं.

‘मना करना भी आसान नहीं होता’

विजय देवरकोंडा ने रश्मिका की बात से सहमति जताई. उन्होंने बताया कि किसी सीन को लेकर अपनी असहजता जाहिर करना आसान नहीं होता, खासकर तब जब कलाकार पहले ही फिल्म में काम करने के लिए हामी भर चुका हो.

विजय के मुताबिक, फिल्म साइन करने के बाद कई बार कलाकारों को लगता है कि अब उन्हें हर सीन करना ही पड़ेगा. उन्हें डर रहता है कि अगर उन्होंने किसी सीन के लिए मना किया, तो उन्हें गैर-पेशेवर कहा जा सकता है. इसी दबाव के कारण कुछ कलाकार खुलकर अपनी बात नहीं रख पाते.

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि फिल्म के सेट पर ऐसा माहौल होना चाहिए, जहां कलाकार बिना किसी डर के अपनी परेशानी बता सकें. अगर कोई कलाकार किसी सीन को लेकर सहज नहीं है, तो उसकी बात सुनी जानी चाहिए.

विजय से बात करके हिम्मत जुटाती हैं रश्मिका

रश्मिका ने यह भी बताया कि कई बार उन्हें अपनी बात रखने में मुश्किल होती है. ऐसे में वह विजय से बात करती हैं और उनसे सलाह लेती हैं. उनके मुताबिक, जब वह विजय से कहती हैं कि वह किसी चीज के लिए मना करना चाहती हैं, तो विजय उन्हें समझाते हैं कि उन्हें ऐसा करने का पूरा अधिकार है.

रश्मिका की बात से यह मुद्दा सामने आता है कि फिल्म के सेट पर कलाकारों को अपनी असहमति जाहिर करने की आजादी मिलनी चाहिए. किसी सीन को लेकर परेशानी होने पर उन्हें यह डर नहीं होना चाहिए कि इससे उनके काम या पेशेवर छवि पर असर पड़ेगा.

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जाह्नवी कपूर की ‘पेड्डी’ के किन दृश्यों पर उठे सवाल?

राम चरण और जाह्नवी कपूर की फिल्म ‘पेड्डी’ में अभिनेत्री के किरदार अचियम्मा को दिखाने के तरीके पर सोशल मीडिया पर सवाल उठे थे. कुछ दर्शकों ने कैमरे के उन एंगल पर आपत्ति जताई, जिनमें जाह्नवी के शरीर के खास हिस्सों को ज्यादा दिखाए जाने का आरोप लगाया गया.

इसके अलावा, फिल्म के एक दृश्य को लेकर भी आलोचना हुई, जिसमें बिजली जाने के दौरान पुरुष किरदार जाह्नवी के किरदार को चूमता नजर आता है. दर्शकों ने इस दृश्य में महिला किरदार की सहमति को लेकर सवाल उठाए.

इस विवाद के बीच जाह्नवी के कथित निजी संदेशों के स्क्रीनशॉट ऑनलाइन सामने आने की खबरें भी आईं. दावा किया गया कि इन संदेशों में उन्होंने कुछ कैमरा एंगल पर आपत्ति जताई थी. हालांकि, इन संदेशों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, निर्देशक बुच्ची बाबू सना ने माफी मांगने और संबंधित दृश्यों में बदलाव करने की बात कही थी.

जाह्नवी की फिल्म के दृश्यों पर हुई आलोचना के बीच विजय और रश्मिका की बातचीत ने फिल्म इंडस्ट्री में कलाकारों की सहमति, उनकी निजी सीमाओं और अपनी बात खुलकर रखने के अधिकार पर चर्चा को फिर से सामने ला दिया है.

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