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धमनार में रावण की नाक पर मुक्का मारकर वध:129 साल पुरानी परंपरा; 51 फीट ऊंची प्रतिमा पर रावण की सेना का हुआ युद्ध

INT News21 October 2026 at 10:34 pm

मंदसौर जिले के ग्राम धमनार में बुधवार देर शाम 51 फीट ऊंचे रावण की नाक पर मुक्का मारकर उसके वध की 129 साल पुरानी परंपरा निभाई गई। इस बार अरुण माली ने रावण की नाक पर मुक्का मारकर वध की रस्म पूरी की। दशहरे पर 20 अक्टूबर को होने वाला आयोजन बारिश के कारण स्थगित कर दिया गया था। इसके बाद बुधवार को बड़ी संख्या में ग्रामीणों और आसपास के क्षेत्रों से आए लोगों की मौजूदगी में राम और रावण की सेनाओं के बीच प्रतीकात्मक युद्ध हुआ। इसमें दोनों पक्षों के लोग एक-दूसरे पर जलते हुए टोकरे और पटाखे फेंकते हैं। युद्ध तब तक चलता है, जब तक राम की सेना का कोई युवक रावण की नाक तक पहुंचकर उस पर मुक्का नहीं मार देता। रावण की सेना रोकती है नाक तक पहुंचने का रास्ता धमनार में दशहरे पर राम और रावण की सेनाओं के बीच युद्ध का आयोजन किया जाता है। इसमें राम की सेना मैदान में रहती है, जबकि रावण की सेना उसकी 51 फीट ऊंची प्रतिमा पर खड़ी होकर राम की सेना के लोगों को नाक तक पहुंचने से रोकती है। युद्ध के दौरान दोनों पक्षों के लोग एक-दूसरे पर जलते हुए टोकरे और पटाखे फेंकते हैं। इस दौरान राम की सेना के युवक रावण की नाक तक पहुंचने की कोशिश करते हैं, जबकि रावण की सेना उन्हें रोकने का प्रयास करती है। नाक पर मुक्का लगते ही खत्म हो जाता है युद्ध इस परंपरा में रावण का वध तीर चलाकर या प्रतिमा जलाकर नहीं, बल्कि उसकी नाक पर मुक्का मारकर किया जाता है। जैसे ही राम की सेना का कोई युवक रावण की सेना के बीच से निकलकर उसकी नाक पर मुक्का मारता है, युद्ध समाप्त हो जाता है और रावण वध की रस्म पूरी मानी जाती है। इस बार अरुण माली ने यह परंपरा निभाई। बारिश के कारण आयोजन तय दिन पर नहीं हो सका था, इसलिए इसे बुधवार शाम को आयोजित किया गया। 129 साल से निभाई जा रही परंपरा धमनार में राम-रावण युद्ध और नाक पर मुक्का मारकर वध करने की परंपरा पिछले 129 वर्षों से चली आ रही है। आयोजन देखने के लिए हर साल बड़ी संख्या में ग्रामीण और आसपास के क्षेत्रों के लोग जुटते हैं। जलते टोकरे और पटाखों के कारण युद्ध का दृश्य काफी उग्र नजर आता है, लेकिन स्थानीय लोग इसे अपनी पुरानी परंपरा और दशहरा उत्सव का अहम हिस्सा मानते हैं।