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ममता बनर्जी ने बंगाल में फिर से चुनाव कराने, ज्ञानेश कुमार को गिरफ्तार करने की मांग की

INT News23 September 2026 at 10:44 pm

पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी और राज्य में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से पहले की मतदाता सूची के आधार पर फिर से चुनाव कराने की मांग की. मतदाता सूची पुनरीक्षण से जुड़े फैसलों को लेकर निर्वाचन आयोग के भीतर असहमति की एक मीडिया रिपोर्ट के बाद ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर हमला तेज कर दिया. उन्होंने कहा- निर्वाचन आयोग हटाओ, भाजपा हटाओ, मुख्य निर्वाचन आयुक्त हटाओ. उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी लोकतंत्र और स्वतंत्रता की रक्षा के लिए एक और संघर्ष के लिए तैयार है.

भाजपा, चुनाव आयोग ने बंगाल चुनाव को ‘लूट’ लिया : ममता बनर्जी

ममता बनर्जी ने फेसबुक लाइव में आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और निर्वाचन आयोग ने इस साल पश्चिम बंगाल में हुए चुनाव को ‘लूट’ लिया. उन्होंने दावा किया कि मतदाताओं को अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने से रोका गया.

अब यह साबित हो गया है कि भाजपा और निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को लूट लिया. पुरानी मतदाता सूचियों को बहाल किया जाना चाहिए और जिन राज्यों में ईवीएम पर कब्जा किये जाने या उन्हें नियंत्रित किये जाने तथा मतदाताओं को उनके अधिकारों का इस्तेमाल करने से रोकने के बाद चुनाव कराये गये, वहां पुरानी मतदाता सूचियों के आधार पर फिर से चुनाव होने चाहिए. -ममता बनर्जी, तृणमूल कांग्रेस

‘जब तक ज्ञानेश कुमार CEC रहेंगे, देश में प्रदर्शन होंगे’

ममता बनर्जी ने कहा- जब तक ज्ञानेश कुमार मुख्य निर्वाचन आयुक्त रहेंगे, तब तक देशभर में विरोध प्रदर्शन होंगे. उन्हें तुरंत गिरफ्तार करके जेल भेजा जाना चाहिए. मुख्य निर्वाचन आयुक्त का पद उनके जैसे व्यक्ति के लिए नहीं है. यह आजादी की एक और लड़ाई है. इस बार उस सीईसी से, जिसकी निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं, और उस भाजपा से, जिसने भारत को बर्बाद कर दिया है.

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चुनाव आयुक्त के मुद्दे पर जल्द होगी ‘इंडिया’ गठबंधन की बैठक : बनर्जी

तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ने कहा कि ‘इंडिया’ गठबंधन के सहयोगियों ने इस मुद्दे पर बात की है और वे जल्द बैठक करेंगे. तृणमूल कांग्रेस इस साल मई में पश्चिम बंगाल में हुए विधानसभा चुनाव में हार गयी थी, जिससे राज्य में उसका लगातार 15 साल का शासन समाप्त हो गया. पार्टी ने अपनी चुनावी हार के लिए अन्य कारणों के अलावा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को भी जिम्मेदार ठहराया, जिसके तहत लाखों नाम हटाये गये थे. कई लाख अन्य नामों को जांच के अधीन रखा गया था. पार्टी ने इसके लिए ‘पक्षपातपूर्ण’ चुनाव आयोग को भी जिम्मेदार बताया.

ममता का दावा- 7-8 महीने पहले ही जतायी थी वोट का अधिकार छीने जाने की आशंका

बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ने दावा किया कि चुनाव से 7-8 महीने पहले ही उनकी पार्टी ने मतदाताओं के अधिकारों को जबरन छीने जाने को लेकर चिंता जतायी थी. उनका कहना था कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं थी, बल्कि पश्चिम बंगाल चुनाव से पहले मतदाताओं की संरचना बदलने की एक व्यापक कोशिश का हिस्सा था.

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ममता बनर्जी के 9 प्रमुख दावे और आरोप

पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया से शुरुआत में 58 लाख मतदाता प्रभावित हुए

27 लाख वोटर्स को बाद में बाहर कर दिया गया.

7 लाख अन्य नामों को हटा दिया गया.

कुल मिलाकर 92 लाख मतदाताओं को वोट करने से वंचित कर दिया गया.

इस प्रक्रिया में एआई आधारित प्रणाली का इस्तेमाल किया गया.

ममता बनर्जी ने निर्वाचन आयोग महानिदेशक (आईटी) सीमा खन्ना पर भी गंभीर आरोप लगाये.

ममता बनर्जी की मांग एसआईआर से पहले की मतदाता सूची को बहाल किया जाये.

जिस मतदाता सूची के आधार पर विधानसभा चुनाव कराया गया था, उसकी फिर से समीक्षा की जाये.

दक्षिण 24 परगना जिले के अलीपुर स्थित डीएम कार्यालय में जहां ईवीएम रखी गयी थी, वहीं आग लगी.

इन लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग

उप चुनाव आयुक्त

आईटी अधिकारियों

निर्वाचक पंजीकरण अधिकारियों

अन्य लोग

दीदी ने किया देशव्यापी आंदोलन का आह्वान

ममता बनर्जी ने निर्वाचन आयोग के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन का आह्वान किया. उन्होंने राजनीतिक दलों, गैर सरकारी संगठनों तथा अन्य लोगों से विरोध प्रदर्शनों में शामिल होने की अपील की.

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बंगाल की भाजपा सरकार पर दमन के लगाये आरोप

बंगाल की पूर्व चीफ मिनिस्टर ने पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार पर व्यापक दमन का भी आरोप लगाया. उन्होंने दावा किया कि 4 महीनों में 65 से अधिक लोगों की हत्या हुई तथा करीब 14,000 मामले दर्ज किये गये. उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस का इस्तेमाल राजनीतिक उद्देश्यों के लिए किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि अधिकारियों को याद रखना चाहिए कि ‘सरकारें बदलती हैं, लेकिन वर्दी बनी रहती है’. उन्होंने इसे महिलाओं और अन्य वर्गों की ओर से न्याय की मांग से जुड़ी शिकायतों से जोड़ा.

अंग्रेजी अखबार में खबर छपने के बाद आया ममता का बयान

ममता बनर्जी की यह टिप्पणी ऐसे समय आयी है, जब अंग्रेजी दैनिक ‘इंडियन एक्सप्रेस’ में प्रकाशित एक खबर में दावा किया गया है कि देशभर में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान विभिन्न राज्यों में मतदाताओं के नाम हटाये जाने समेत कई मुद्दों को लेकर चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने आपत्तियां जतायी थीं. इस खबर के बाद राजनीतिक विवाद तेज हो गया. हालांकि, निर्वाचन आयोग ने कहा है कि एसआईआर से जुड़े फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी से सर्वसम्मति से लिये गये थे.