समाचार · मध्य प्रदेश
सीहोर में ITI निजीकरण के विरोध में छात्रों का प्रदर्शन:चकल्दी से तीन दिवसीय पदयात्रा शुरू, 16 सरकारी संस्थानों को बचाने की मांग
सीहोर जिले में सरकारी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (ITI) के कथित निजीकरण के प्रस्ताव के विरोध में छात्रों और युवाओं ने प्रदर्शन शुरू कर दिया है। क्रांतिकारी विद्यार्थी संगठन के बैनर तले तीन दिवसीय पदयात्रा चकल्दी से शुरू हुई। संगठन ने प्रदेश के 16 सरकारी ITI के निजीकरण के कथित फैसले पर रोक लगाने और शिक्षा के व्यवसायीकरण को बंद करने की मांग की है। चकल्दी में बड़ी संख्या में छात्र और युवा जुटे। उनके हाथों में तिरंगे और लाल झंडे थे। प्रदर्शनकारियों ने ‘शिक्षा का ना हो व्यापार, ज्ञान पर हो सबका अधिकार’ और ‘शिक्षा अधिकार है, सौदा नहीं’ जैसे नारे लगाए। शिक्षा के व्यवसायीकरण का लगाया आरोप पदयात्रा से पहले हुई सभा में विद्यार्थी नेताओं ने भाजपा सरकार पर शिक्षा का व्यवसायीकरण करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि शिक्षा बिकाऊ होने पर योग्यता के बजाय पैसे के आधार पर तय होगा कि कौन पढ़ सकेगा। नेताओं ने सरकारी ITI के निजीकरण के प्रस्ताव को छात्र विरोधी, शिक्षा विरोधी और जन विरोधी बताया। तीन दिवसीय पदयात्रा के दौरान छात्र कई गांवों और कस्बों से होकर गुजरेंगे। संगठन का कहना है कि इसका उद्देश्य लोगों को आंदोलन की मांगों के बारे में जागरूक करना है। संगठन ने रखीं 5 प्रमुख मांगें क्रांतिकारी विद्यार्थी संगठन ने चकल्दी ITI सहित प्रदेश के सभी 16 सरकारी ITI के निजीकरण और व्यवसायीकरण पर रोक लगाने की मांग की है। इसके अलावा चकल्दी ITI में 6 नए ट्रेड शुरू करने और स्थानीय स्तर पर अप्रेंटिसशिप सेंटर उपलब्ध कराने की मांग की गई है। संगठन ने केजी से पीजी तक पूरी तरह निशुल्क और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा लागू करने की मांग भी रखी है। सरकारी स्कूल, कॉलेज और ITI को पर्याप्त बजट देने के साथ सभी खाली शिक्षक और प्रशिक्षक पदों को तुरंत भरने की मांग की गई है। संगठन ने सभी विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति, छात्रावास, पुस्तकें और डिजिटल संसाधन उपलब्ध कराने की भी मांग की है। साथ ही छात्रों और युवाओं समेत सभी वर्गों से आंदोलन में शामिल होकर सार्वजनिक शिक्षा को बचाने की अपील की है। पदयात्रा के समापन पर कलेक्टर कार्यालय में बड़ी सभा आयोजित की जाएगी। इसमें आंदोलन की आगे की रणनीति की घोषणा की जा सकती है।