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पूर्व नेता प्रतिपक्ष रामगोविन्द चौधरी के पार्थिव शरीर का आज बलिया के टीडी कॉलेज में अंतिम दर्शन, शाम चार बजे पहुंचेगा पार्थिव शरीर

UP News: समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता, पूर्व मंत्री और उत्तर प्रदेश विधानसभा के पूर्व नेता प्रतिपक्ष श्रद्धेय रामगोविन्द चौधरी के निधन से बलिया में शोक की लहर है. उनके पार्थिव शरीर को शनिवार को श्री मुरली मनोहर टाउन महाविद्यालय (टीडी कॉलेज), बलिया लाया जाएगा, जहां शाम 4 बजे लोग उनके अंतिम दर्शन कर श्रद्धासुमन अर्पित कर सकेंगे. रामगोविन्द चौधरी का टीडी कॉलेज से गहरा और पुराना रिश्ता रहा. उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत छात्र राजनीति से की थी. उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार वह टीडी कॉलेज में महामंत्री चुने गए और बाद में छात्रसंघ अध्यक्ष भी रहे. यही छात्र राजनीति आगे चलकर उनके लंबे राजनीतिक सफर की बुनियाद बनी.
छात्र राजनीति से विधानसभा तक का सफर
रामगोविन्द चौधरी ने छात्र राजनीति से शुरुआत करने के बाद प्रदेश की सक्रिय राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई. वर्ष 1977 में उन्होंने चिलकहर विधानसभा क्षेत्र से पहली बार चुनाव जीतकर विधानसभा में प्रवेश किया. इसके बाद वह कुल आठ बार विधायक चुने गए. उन्होंने चिलकहर के साथ बांसडीह विधानसभा क्षेत्र का भी प्रतिनिधित्व किया. उनका राजनीतिक सफर केवल चुनावी राजनीति तक सीमित नहीं रहा. वह उत्तर प्रदेश सरकार में कई बार मंत्री रहे और 2017 से 2022 तक विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी संभाली. वह समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके थे.
जिस कॉलेज से शुरू हुआ सियासी सफर, वहीं अंतिम दर्शन
रामगोविन्द चौधरी के लिए टीडी कॉलेज महज शिक्षण संस्थान नहीं था, बल्कि उनके राजनीतिक जीवन का शुरुआती पड़ाव था. छात्रसंघ की राजनीति से उन्होंने यहीं से अपनी पहचान बनाई थी. ऐसे में निधन के बाद उनके पार्थिव शरीर का इसी परिसर में अंतिम दर्शन के लिए पहुंचना उनके लंबे सार्वजनिक जीवन की एक भावनात्मक कड़ी के रूप में देखा जा रहा है. टीडी कॉलेज में शाम चार बजे पार्थिव शरीर पहुंचने की सूचना के बाद उनके समर्थकों, पूर्व छात्र नेताओं, राजनीतिक कार्यकर्ताओं और शुभचिंतकों के पहुंचने की संभावना है. लोग यहां अपने प्रिय नेता को अंतिम श्रद्धांजलि देंगे.
बलिया की सियासत में लंबी छाप
रामगोविन्द चौधरी का राजनीतिक जीवन कई दशकों तक बलिया की राजनीति के केंद्र में रहा. छात्र राजनीति से निकले चौधरी ने जेपी आंदोलन से लेकर विधानसभा की राजनीति तक सक्रिय भूमिका निभाई. उनके राजनीतिक सफर में चिलकहर और बांसडीह दोनों विधानसभा क्षेत्रों की महत्वपूर्ण भूमिका रही. विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार वह समाजवादी राजनीति के प्रमुख नेताओं में रहे और मुलायम सिंह यादव तथा बाद में अखिलेश यादव के साथ भी उनकी राजनीतिक निकटता रही.
नेताओं और समर्थकों में शोक
उनके निधन की सूचना के बाद बलिया समेत प्रदेश के राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में शोक की प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं. छात्र राजनीति से जुड़े पुराने साथी और समर्थक भी उनके निधन को अपने लिए व्यक्तिगत क्षति बता रहे हैं.
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