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फर्जी 10वीं पास मामले में कोर्ट का अनोखा आदेश:5 स्वदेशी पौधे लगाने की शर्त पर जमानत; 2 साल तक उनकी देखभाल करनी होगी
फर्जी ओपन स्कूलिंग बोर्ड का 10वीं कक्षा का प्रमाण पत्र जमा कर उच्च कक्षा में दाखिला लेने के करीब 4 साल पुराने मामले में सोनीपत की जिला सत्र अदालत ने आरोपी आकाश को नियमित जमानत दे दी है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सुभाष चंद्र सिरोही की अदालत ने जमानत देते हुए आरोपी के सामने पर्यावरण संरक्षण की अनूठी शर्त रखी। उसे सार्वजनिक स्थान पर 5 स्वदेशी पौधे लगाने होंगे और अगले 2 साल तक उनकी देखभाल करनी होगी। साथ ही अगली सुनवाई से पहले पौधे लगाने के प्रमाण के तौर पर तस्वीरें अदालत में जमा करानी होंगी। अदालत ने जांच में आरोपी के सहयोग, उसके आपराधिक इतिहास नहीं होने और आगे हिरासत में रखने की जरूरत नहीं होने को जमानत का आधार माना। कोविड के दौरान सामने आया था फर्जी प्रमाण पत्रों का मामला यह मामला बरोदा थाना के अंतगर्त एफआईआर दिनांक 10 अक्टूबर 2022 से जुड़ा है। थाना बरोदा में भारतीय दंड संहिता की धाराओं 120-B, 420, 467, 468 और 471 के तहत केस दर्ज किया गया था। हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड (HBSE), भिवानी के सचिव के 24 मार्च 2022 के पत्र के आधार पर तत्कालीन अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक निकिता खट्टर ने मामले की जांच की थी। जांच में सामने आया था कि कोविड-19 महामारी के दौरान साल 2021 में बोर्ड परीक्षाएं आयोजित नहीं हुई थीं और परिणाम सरकार की नीति के अनुसार घोषित किए जाने थे। इसी दौरान दूसरे राज्यों और ओपन बोर्डों से 10वीं पास कर दाखिला लेने वाले स्टूडेंट्स के दस्तावेजों की जांच में 'हरियाणा काउंसिल ऑफ ओपन स्कूलिंग' नाम से फर्जी संस्थान के प्रमाण पत्र सामने आए थे। आकाश पर फर्जी प्रमाण पत्र से दाखिला लेने का आरोप गोहाना के गांव छिछड़ाना निवासी 26 वर्षीय आकाश पर आरोप था कि उसने कथित फर्जी काउंसिल का 10वीं कक्षा का प्रमाण पत्र जमा कराकर आगे की कक्षा में दाखिला लिया था। बचाव पक्ष के अधिवक्ता विकास कुंडू ने अदालत में दलील दी कि आकाश निर्दोष है और वह खुद ठगी का शिकार हुआ है। प्रमाण पत्र का इस्तेमाल करते समय उसकी उम्र कम थी। पुलिस का नोटिस मिलने पर वह स्वयं जांच में शामिल हुआ, हलफनामा दिया और अपने साथ हुई कथित धोखाधड़ी से जुड़े दस्तावेज भी सौंपे। बचाव पक्ष ने यह भी बताया कि आरोपी का कोई पुराना आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है और वह 20 सितंबर 2026 से न्यायिक हिरासत में है। सरकारी पक्ष ने संगीन आरोप बताकर किया जमानत का विरोध राज्य की ओर से लोक अभियोजक रोशनी और एएसआई कृष्ण ने जमानत याचिका का विरोध किया। सरकारी पक्ष ने दलील दी कि मामला फर्जी दस्तावेजों के आधार पर दाखिला लेने से जुड़ा है और आरोप गंभीर प्रकृति के हैं। वहीं, जांच अधिकारी के अनुसार आरोपी के खिलाफ जांच पूरी हो चुकी है और एक सप्ताह के भीतर चालान अदालत में पेश कर दिया जाएगा। जांच में सहयोग और बरामदगी की जरूरत नहीं होने को माना आधार अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सुभाष चंद्र सिरोही ने केस की फाइल और पुलिस जांच रिपोर्ट का अवलोकन किया। अदालत ने पाया कि जांच के दौरान नोटिस मिलने पर आकाश पुलिस के सामने पेश हुआ था और उसने अपने पक्ष में हलफनामा व दस्तावेज दिए थे। अदालत के अनुसार, आरोपी से अब कोई नई बरामदगी नहीं होनी है, उसका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है और पुलिस जल्द चालान पेश करने वाली है। ऐसे में उसे आगे हिरासत में रखने का औचित्य नहीं बनता। इन तथ्यों के आधार पर अदालत ने उसकी पहली नियमित जमानत याचिका मंजूर कर ली। दो साल तक पौधों की देखभाल करनी होगी अदालत ने जमानत देते हुए आरोपी को आदेश दिया कि वह किसी सार्वजनिक स्थान पर पीपल, नीम या बरगद जैसे 5 स्वदेशी पौधे लगाए। इन पौधों की अगले 2 वर्षों तक देखभाल करना भी अनिवार्य होगा। आरोपी को अगली सुनवाई से पहले पौधे लगाने के प्रमाण के रूप में तस्वीरें संबंधित अदालत में जमा करानी होंगी। अदालत ने संबंधित इलाका या ड्यूटी मजिस्ट्रेट की संतुष्टि के अनुसार बेल बॉन्ड प्रस्तुत करने पर आरोपी को रिहा करने का आदेश दिया।