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Ahmedabad: एआइ से स्मार्ट होगा शहर का जल प्रबंधन, छह प्रोजेक्ट के लिए 2720 करोड़ मंजूर

अहमदाबाद शहर के दशकों पुराने सीवरेज नेटवर्क को दुरुस्त करने, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) आधारित जल प्रबंधन विकसित करने और सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को तकनीक से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। केंद्र सरकार ने अर्बन चैलेंज फंड के तहत शहर की छह महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट के लिए करीब 2720 करोड़ रुपए मंजूर किए हैं। महापौर हितेश बारोट ने शुक्रवार को संवाददाताओं को बताया कि इससे अहमदाबाद के बुनियादी ढांचे को नई पहचान मिलेगी और नागरिकों को आधुनिक, तकनीक आधारित तथा टिकाऊ शहरी सुविधाएं मिलेंगी। उन्होंने इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह तथा मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल का आभार व्यक्त किया।उनके अनुसार परियोजनाओं के पूरा होने के बाद शहर में सीवरेज ओवरफ्लो और रिसाव की समस्या में कमी आएगी। पूरे सीवरेज और स्टॉर्म वॉटर नेटवर्क की रियल टाइम निगरानी संभव होगी तथा जल, स्वच्छता और परिवहन सेवाओं की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार होगा। इससे अहमदाबाद का शहरी ढांचा अधिक आधुनिक, पर्यावरण अनुकूल और टिकाऊ बनेगा। केंद्र और राज्य सरकार मिलकर उठाएंगी आधी लागत मनपा के सिटी इंजीनियर (डब्ल्यूआरएम) विजय पटेल ने बताया कि कुल 2720 करोड़ रुपए की परियोजनाओं में 50 प्रतिशत राशि अहमदाबाद महानगरपालिका वहन करेगी। इसके लिए बैंक ऑफ बड़ौदा और विश्व बैंक से ऋण लिया जाएगा, जबकि शेष 50 प्रतिशत राशि में 25-25 प्रतिशत हिस्सा केंद्र और राज्य सरकार अनुदान के रूप में देंगी। पश्चिम क्षेत्र के लिए सबसे अधिक 853 करोड़ परियोजनाओं के तहत पश्चिम क्षेत्र के 25 वर्ष से अधिक पुराने सीवरेज नेटवर्क के विकास के लिए करीब 853 करोड़ रुपए, पूर्व क्षेत्र के लिए 551 करोड़ रुपए तथा मध्य और दक्षिण क्षेत्र की ब्रिटिशकालीन सीवरेज लाइनों के पुनर्वास के लिए 290 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं। इसके अलावा 215 करोड़ रुपए की लागत से एआइ आधारित इंटेलिजेंट वाटर मैनेजमेंट सिस्टम विकसित होगा, जिसके जरिए सीवरेज नेटवर्क, स्टॉर्म वॉटर पंपिंग स्टेशन और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) की रियल टाइम डिजिटल मॉनिटरिंग संभव होगी। होगा बायोगैस और ग्रीन एनर्जी का उत्पादन इसके अलावा पश्चिम क्षेत्र में 125 टन प्रतिदिन क्षमता की इंटीग्रेटेड स्लज मैनेजमेंट फैसिलिटी स्थापित की जाएगी। करीब 480 करोड़ रुपए की इस परियोजना में सीवेज स्लज का वैज्ञानिक तरीके से उपचार कर उससे बायोगैस और ग्रीन एनर्जी का उत्पादन किया जाएगा। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ सर्कुलर इकोनॉमी को भी बढ़ावा मिलेगा। वहीं, 331 करोड़ रुपए की लागत से इंटीग्रेटेड ट्रांजिट मैनेजमेंट सिस्टम (आइटीएमएस) और ऑटोमेटेड फेयर कलेक्शन सिस्टम विकसित किए जाएंगे, जिससे शहर की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था अधिक स्मार्ट, सुव्यवस्थित और तकनीक आधारित बनेगी।