Saturday, 18 July 2026
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सगोत्र विवाह पर सामाजिक बहिष्कार का मामला पहुंचा हाईकोर्ट:सभी पक्षों को नोटिस; धमकी या उत्पीड़न की स्थिति में याचिकाकर्ताओं को तत्काल सुरक्षा दे पुलिस

INT News17 July 2026 at 10:53 pm

सगोत्र विवाह के बाद सामाजिक बहिष्कार और आर्थिक दंड से जुड़े मामले में मध्यप्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच ने राज्य शासन सहित सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। कोर्ट ने अपने 17 जुलाई के आदेश में स्पष्ट किया है कि यदि याचिकाकर्ताओं या उनके परिवार को किसी प्रकार की धमकी, दबाव या सुरक्षा संबंधी खतरा उत्पन्न होता है, तो पुलिस तत्काल हस्तक्षेप कर उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करेगी। जस्टिस सुबोध अभ्यंकर व न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की डबल बेंच ने बड़वानी, धार और खरगोन क्षेत्र से जुड़े इस मामले की सुनवाई करते हुए यह अंतरिम निर्देश दिए। मामला क्षत्रिय कुशवाह समाज संगठन के कुछ पदाधिकारियों द्वारा रूप से लिए गए उन निर्णयों से जुड़ा है, जिनमें सगोत्र विवाह करने वाले दंपती और उनके परिवार का सामाजिक बहिष्कार, समाज से निष्कासन तथा विवाह में शामिल लोगों पर आर्थिक दंड लगाने जैसी कार्रवाई की गई थी। सामाजिक दबाव और धमकियों का आरोप याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट को बताया कि विवाह के बाद उनके परिवार को लगातार सामाजिक दबाव, बहिष्कार और धमकियों का सामना करना पड़ रहा है। उनका आरोप है कि समाज संगठन के कुछ पदाधिकारियों ने ऐसे फैसले लिए, जो संविधान प्रदत्त मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करते हैं। याचिका में कहा गया है कि सुरक्षा और कार्रवाई की मांग को लेकर पुलिस और जिला प्रशासन के समक्ष कई बार शिकायतें की गईं, लेकिन पर्याप्त और प्रभावी कदम नहीं उठाए गए। इसके कारण परिवार की सुरक्षा, स्वतंत्रता और सम्मान पर खतरा बना हुआ है। बालिगों के विवाह में हस्तक्षेप नहीं कर सकता कोई संगठन याचिकाकर्ताओं ने अपनी अपील में सुप्रीम कोर्ट के चर्चित ‘शक्ति वाहिनी बनाम भारत संघ’ फैसले सहित अन्य न्यायिक निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि दो बालिग व्यक्तियों के वैध विवाह में किसी भी जातीय संगठन, खाप पंचायत या निजी संस्था को हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है। न ही ऐसे संगठन सामाजिक बहिष्कार, आर्थिक दंड या समानांतर न्याय व्यवस्था लागू कर सकते हैं। सभी पक्षों से मांगा जवाब हाई कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य शासन समेत सभी शासकीय और निजी प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। प्रतिवादियों के जवाब प्राप्त होने के बाद मामले की अगली सुनवाई की जाएगी। याचिकाकर्ताओं की ओर से एडवोकेट अभिनव पी. धनोडकर ने पैरवी की।