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गाड़ी तेज चलाई तो घरवालों के फोन पर पहुंचेगा मैसेज! शामली के 10वीं के छात्र ने बनाया गजब का ऐप

UP News: उत्तर प्रदेश के शामली में कक्षा 10 के छात्र आसिम ने सड़क हादसों को रोकने की दिशा में एक शानदार पहल की है. उन्होंने ‘गति रक्षक’ नाम से ऐसा ऐप तैयार किया है, जो वाहन की रफ्तार तय सीमा से ज्यादा होते ही चालक को अलर्ट करेगा. इतना ही नहीं, अगर बच्चा तेज रफ्तार में वाहन चलाता है तो उसके माता-पिता के मोबाइल पर भी तुरंत चेतावनी संदेश पहुंच जाएगा.
ओवरस्पीड होते ही मोबाइल पर बजने लगेगा अलार्म
आसिम ने इस ऐप को अटल टिंकरिंग लैब में तैयार किया है. ऐप की खासियत यह है कि जैसे ही वाहन निर्धारित गति सीमा से ऊपर जाता है, चालक के मोबाइल पर अलार्म बजने लगता है. यह अलार्म तब तक बंद नहीं होगा, जब तक वाहन की रफ्तार दोबारा तय सीमा के अंदर नहीं आ जाती. इस तरह ऐप चालक को लगातार स्पीड कंट्रोल करने के लिए अलर्ट करता रहेगा.
बच्चों को वाहन देने वाले माता-पिता के लिए भी काम का
‘गति रक्षक’ की एक खास सुविधा अभिभावकों के लिए भी है. माता-पिता अगर अपने बच्चों को वाहन देकर अकेले भेजते हैं तो वे उसकी स्पीड पर नजर रख सकेंगे. अगर बच्चा निर्धारित गति सीमा से ज्यादा तेज वाहन चलाता है, तो ऐप तुरंत अभिभावक के मोबाइल फोन पर चेतावनी संदेश भेज देगा. इससे माता-पिता को भी पता चल सकेगा कि उनका बच्चा सड़क पर किस तरह वाहन चला रहा है.
हाईवे पर खुद पता लगाएगा स्पीड लिमिट
यह ऐप इंटरनेट और GPS की मदद से काम करता है. सफर शुरू करने के बाद जैसे ही वाहन किसी राजमार्ग पर पहुंचता है, ऐप मैप के जरिए उस रास्ते की जानकारी जुटाता है और वहां लागू आधिकारिक गति सीमा को खुद निर्धारित कर लेता है. यानी चालक को हर सड़क की स्पीड लिमिट अलग से सेट करने की जरूरत नहीं होगी.
दिल्ली-देहरादून इकानोमिक कॉरिडोर पर हुआ टेस्ट
‘गति रक्षक’ का परीक्षण दिल्ली-देहरादून इकानोमिक कॉरिडोर पर किया गया. लैब प्रभारी आयुष वर्मा ने इसका टेस्ट किया. परीक्षण के दौरान पाया गया कि जैसे ही वाहन तय सीमा से ज्यादा तेज हुआ, मोबाइल पर अलार्म बजने लगा. रफ्तार नियंत्रित करके वाहन को निर्धारित सीमा के भीतर लाने के बाद ही अलार्म बंद हुआ.
एक साल से अटल टिंकरिंग लैब में कर रहे थे अभ्यास
आसिम कैराना निवासी उच्च प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक मोहम्मद शहजाद के पुत्र हैं. वह शहर के स्काटिश इंटरनेशनल स्कूल में कक्षा 10वीं के छात्र हैं. आसिम पिछले करीब एक साल से स्कूल में नीति आयोग की ओर से स्थापित अटल टिंकरिंग लैब में अभ्यास कर रहे हैं. सड़क हादसों में तेज रफ्तार की वजह से होने वाली मौतों को लेकर चिंता के बाद उन्होंने करीब तीन महीने पहले इस ऐप पर काम शुरू किया था.
नीति आयोग और इंस्पायर अवार्ड के लिए भेजा गया ऐप
अब ‘गति रक्षक’ ऐप तैयार हो चुका है. इसके बाद इसे नीति आयोग और इंस्पायर अवार्ड में चयन के लिए भेजा गया है. लैब प्रभारी आयुष वर्मा के मुताबिक, ऐप का उद्देश्य ओवरस्पीडिंग पर नजर रखना और सड़क हादसों को कम करने में मदद करना है. खासकर उन अभिभावकों के लिए यह तकनीक उपयोगी हो सकती है, जो अपने बच्चों को वाहन देकर अकेले भेजते हैं.
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