समाचार · मध्य प्रदेश
24 घंटे में सर्पदंश के 7 मरीज जिला अस्पताल पहुंचे:9 साल के बच्चे की मौत, गर्भवती ICU में; झाड़-फूंक से बिगड़ी महिला की हालत
छतरपुर में बारिश के मौसम के साथ सर्पदंश की घटनाएं बढ़ गई हैं। गुरुवार सुबह तक पिछले 24 घंटे में जिला अस्पताल में सांप और जहरीले कीड़े के काटने के 8 मरीज पहुंचे। इनमें एक 9 वर्षीय बच्चे की इलाज के दौरान मौत हो गई, जबकि 35 वर्षीय गर्भवती महिला की हालत गंभीर होने पर उसे आईसीयू में भर्ती किया गया है। राजनगर थाना क्षेत्र के बिला गांव निवासी 9 वर्षीय मयंक अहिरवार बुधवार सुबह घर में खेल रहा था। इसी दौरान उसे जहरीले सांप ने काट लिया। परिजन उसे तत्काल जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद बच्चे को मृत घोषित कर दिया। मयंक राजेश अहिरवार का बेटा था। गर्भवती महिला को आईसीयू में भर्ती किया
ईसानगर थाना क्षेत्र के नंदगांय गांव निवासी 35 वर्षीय रूप आदिवासी को 2 सितंबर की सुबह करीब 8:30 बजे सांप के काटने के बाद जिला अस्पताल लाया गया। हालत गंभीर होने पर डॉक्टरों ने उन्हें आईसीयू में भर्ती किया है। रूप आदिवासी रामचरण आदिवासी की पत्नी हैं। सांप काटने के बाद पहले कराई झाड़-फूंक
मातगुवां थाना क्षेत्र के नंदगांय गांव निवासी 38 वर्षीय जयबाई रैकवार को बुधवार सुबह करीब 5 बजे सोते समय जहरीले सांप ने काट लिया। परिजन उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाने के बजाय पहले दो अलग-अलग स्थानों पर झाड़-फूंक कराने ले गए। झाड़-फूंक से हालत में सुधार नहीं होने पर परिजन जयबाई को जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। परिजनों के अनुसार, झाड़-फूंक करने वालों ने जहर उतरने का दावा किया था और बाद में अस्पताल ले जाने की सलाह दी थी। फिलहाल जयबाई का इलाज अस्पताल के मेडिसिन वार्ड में चल रहा है। ये मरीज भी सर्पदंश के बाद पहुंचे अस्पताल जिला अस्पताल में पिछले दो दिनों में सर्पदंश के बाद पहुंचे अन्य मरीजों में: डॉक्टरों की अपील- झाड़-फूंक में समय न गंवाएं
लगातार बारिश के कारण सर्पदंश की घटनाएं बढ़ने से ग्रामीण क्षेत्रों में चिंता का माहौल है। चिकित्सकों ने लोगों से अपील की कि सांप के काटने की स्थिति में झाड़-फूंक और तंत्र-मंत्र के चक्कर में समय बर्बाद न करें। सर्पदंश के बाद मरीज को तत्काल नजदीकी अस्पताल लेकर जाएं, ताकि समय पर आवश्यक उपचार मिल सके और जरूरत पड़ने पर एंटी-स्नेक वेनम सहित अन्य चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें। समय पर इलाज मिलने से सर्पदंश के गंभीर मामलों में मरीज की जान बचाई जा सकती है।