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सिंधिया की आवाज सुन सीएम को आई मां की याद:बोले-आवाज सुनकर लगा जैसे मां खाना परोस रही, मंत्री को याद आई मां की सीख
मध्य प्रदेश की राजनीति, नौकरशाही और अन्य घटनाओं पर चुटीली और खरी बात का वीडियो (VIDEO) देखने के लिए ऊपर क्लिक करें। इन खबरों को आप पढ़ भी सकते हैं। 'बात खरी है' मंगलवार से रविवार तक हर सुबह 6 बजे से एप पर मिलेगा। विजय शाह को याद आई मां की नसीहत
अपने बयानों की वजह से अक्सर सुर्खियों में रहने वाले कैबिनेट मंत्री विजय शाह इस बार अपने भाषण देने के अंदाज को लेकर चर्चा में हैं। वीबी-जी राम जी योजना के लॉन्चिंग कार्यक्रम में शाह ने कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस लोगों को 15-20 साल पीछे ले जाना चाहती है, जब देश में नरेंद्र मोदी की सरकार नहीं थी और केंद्र में बीजेपी सत्ता में नहीं थी। शाह ने कहा कि उस दौर में पैदा होने वाली हमारी बहन-बेटियां भगवान को प्यारी हो जाती थीं। बेटियां बचती नहीं थीं। उन्होंने कहा कि उस समय हर एक हजार बच्चों पर सिर्फ 917 बेटियां पैदा होती थीं। मोदी सरकार ने 'बेटी बचाओ' जैसे अभियान और कई योजनाएं शुरू कीं। शाह ने कहा कि अब हर एक हजार बच्चों पर 980 बेटियों का अनुपात हो गया है। केंद्र सरकार की हर घर शौचालय योजना का जिक्र करते हुए उन्होंने बचपन का एक किस्सा भी सुनाया। उन्होंने बताया कि गांव में जब वह सुबह या शाम घर से बाहर निकलते थे तो मां समझाती थीं- "बेटा, बचकर निकलना... बाहर अंगारे पड़े हैं।" अब खरी बात। एमपी सरकार की बेटी बचाओ योजना का श्रेय भी केंद्र को देने के पीछे शाह की अपनी मजबूरियां हैं। आखिर कर्नल सोफिया कुरैशी वाला मामला अभी पूरी तरह ठंडा नहीं पड़ा है। एयर एंबुलेंस तो छोड़िए, सड़क वाली एंबुलेंस भी नहीं मिली
मध्य प्रदेश में बीमार मरीजों को खाट पर अस्पताल ले जाने की तस्वीरें समय-समय पर सामने आती रहती हैं। ये तस्वीरें गांव की बदहाली के साथ सरकारी दावों की हकीकत भी बयां करती हैं। ताजा मामला रीवा के मनगवां इलाके का है। यहां एक महिला की तबीयत बिगड़ी तो परिजन और ग्रामीण उसे इलाज के लिए खाट पर लिटाकर गांव से बाहर ले जाने लगे। इसकी वजह वही पुरानी थी। गांव तक पक्की सड़क नहीं थी। बारिश में रास्ता कीचड़ से लथपथ था और एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच सकती थी। इलाज मिलने से पहले ही महिला ने दम तोड़ दिया। उधर सरकार दावा कर रही है कि प्रदेश के लोगों को एयर एंबुलेंस की सुविधा मिलेगी। अब खरी बात। जिस प्रदेश में कई गांव आज भी सड़क और साधारण एंबुलेंस का इंतजार कर रहे हैं, वहां एयर एंबुलेंस की घोषणा वैसी ही लगती है जैसे छत टपक रही हो और घर में झूमर लगाने की बात हो। कॉमन मैन का सवाल सीधा है- जब सड़क वाली एंबुलेंस ही समय पर नहीं मिल रही, तो एयर एंबुलेंस उसके किस काम आएगी?
मोहन को पसंद आई सिंधिया की आवाज
केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के संसदीय क्षेत्र शिवपुरी में हथियार निर्माण फैक्ट्री की शुरुआत हुई। कार्यक्रम में सिंधिया ने मुख्यमंत्री मोहन यादव और फैक्ट्री लगाने वाले अडानी समूह की तारीफ की। भाषण के दौरान जोश में उन्होंने माइक तक छोड़ दिया। सिंधिया का यह अंदाज देखकर मुख्यमंत्री मोहन यादव भी मुस्कुरा दिए। उन्होंने मंच से कहा, "आज महाराज की आवाज में थोड़ा ज्यादा ही आनंद आया।" अपनी बात समझाने के लिए उन्होंने घर का उदाहरण दिया। बोले, “जैसे मां खाना परोसते समय रोटी पर थोड़ा ज्यादा मक्खन लगा दे, वैसा आनंद आज महाराज की आवाज में था।” मोहन यादव का यह बयान सुनते ही कार्यक्रम में मौजूद लोग भी मुस्कुरा उठे। अब खरी बात। राजनीति में भाषणों का जोश अक्सर सुर्खियां बनता है, लेकिन इस बार चर्चा भाषण से ज्यादा "मक्खन" पर रही। लोग अपने-अपने हिसाब से इसके मायने निकाल रहे हैं। कोई इसे मंच की मिठास बता रहा है, तो कोई राजनीतिक शिष्टाचार। वैसे राजनीति में मक्खन सिर्फ रोटी पर ही नहीं, बातों में भी खूब लगाया जाता है।
और अब अंदर की बात… एसीएस को तवज्जो नहीं मिली तो छापा पड़वा दिया… पिछले दिनों एक अपर मुख्य सचिव (एसीएस) अपने परिवार के साथ भोपाल के वीआईपी रोड स्थित एक नामी होटल में डिनर करने पहुंचे। बताया जाता है कि उन्हें उम्मीद थी कि होटल प्रबंधन उनके आने पर विशेष तवज्जो देगा। लेकिन होटल स्टाफ ने उन्हें आम ग्राहकों की तरह सेवा दी और अपने काम में व्यस्त रहा। खाना खत्म कर एसीएस होटल से लौट गए। कुछ ही देर बाद खाद्य एवं औषधि प्रशासन की टीम जांच के लिए होटल पहुंच गई। अचानक हुई कार्रवाई से होटल प्रबंधन में हड़कंप मच गया। मैनेजर से लेकर पूरा स्टाफ जांच टीम के सवालों के जवाब देने में जुट गया। इसी दौरान जांच टीम में शामिल एक कर्मचारी ने होटल स्टाफ से मुस्कराते हुए तंज कस दिया- "अगर साहब के पीछे भी इतनी ही भाग-दौड़ कर लेते, तो न हमारी रात काली होती और न तुम्हारी।"
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