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एपस्टीन फाइल में हरदीप सिंह पुरी का नाम: 2014-15 के ईमेल से गरमाई सियासत, राहुल गांधी के आरोपों पर मंत्री ने दी सफाई

अमेरिकी यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन से जुड़े दस्तावेजों में केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी के ईमेल का जिक्र सामने आया है. इससे राजनीतिक विवाद बढ़ गया है. विपक्षी नेताओं ने इन संपर्कों पर सवाल उठाए हैं. वहीं, पुरी ने आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए सफाई दी है. उन्होंने कहा कि एपस्टीन से उनकी मुलाकातें पेशेवर सिलसिले में हुई थीं. उनका उसके आपराधिक कृत्यों से कोई संबंध नहीं था.
राहुल गांधी के आरोपों के बाद पुरी ने दी सफाई
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की ओर से एपस्टीन फाइल का मुद्दा उठाए जाने के बाद हरदीप सिंह पुरी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपना पक्ष रखा. उन्होंने आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि सार्वजनिक हुए लाखों दस्तावेजों में उनके नाम का उल्लेख कुछ ईमेल तक सीमित है. पुरी ने राहुल गांधी पर तथ्यों को समझे बिना आरोप लगाने का भी आरोप लगाया.
2014-15 के ईमेल से बढ़ा विवाद, संपर्कों पर उठे सवाल
एपस्टीन से संबंधित दस्तावेजों में साल 2014 और 2015 के दौरान पुरी और एपस्टीन के बीच ईमेल संवाद का ज़िक्र है. इन संदेशों को लेकर विपक्ष सवाल कर रहा है कि साल 2008 में एपस्टीन को यौन अपराध से जुड़े मामले में सज़ा मिलने के बाद भी उससे संपर्क क्यों रखा गया. हालांकि, किसी भी दस्तावेज़ में नाम या ईमेल का उल्लेख होना अपने आप में किसी आपराधिक गतिविधि में शामिल होने का सबूत नहीं है.
रीड हॉफमैन से मुलाकात और भारत में कारोबार पर हुई थी चर्चा
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, पुरी ने अपने स्पष्टीकरण में लिंक्डइन के सह-संस्थापक रीड हॉफमैन के साथ हुई बातचीत का भी जिक्र किया. उनके अनुसार, चर्चा का मकसद भारत में इन्वेस्टमेंट, इंटरनेट-आधारित उद्यमों और कारोबार की संभावनाओं से जुड़ा था. पुरी ने कहा कि उस समय वह केंद्र सरकार में मंत्री नहीं थे और उनका संपर्क पेशेवर गतिविधियों के संदर्भ में था.
एपस्टीन से तीन-चार मुलाकातों की बात स्वीकार कर चुके हैं पुरी
हरदीप सिंह पुरी ने माना कि अंतरराष्ट्रीय शांति संस्थान और बहुपक्षीय सहयोग से जुड़े अपने काम के दौरान उनकी एपस्टीन से लगभग तीन या चार बार मुलाकात हुई थी. उनके अनुसार, ये मुलाकातें पेशेवर दायरे में हुई थीं. मंत्री ने साफ़ किया कि एपस्टीन की आपराधिक गतिविधियों से उनका कोई संबंध नहीं रहा है.
ईमेल में इस्तेमाल भाषा पर भी उठे सवाल
विवाद की एक वजह ईमेल में इस्तेमाल किए गए कुछ शब्द और बातचीत का लहजा भी है. विपक्षी नेताओं ने सवाल किया है कि एपस्टीन के आपराधिक अतीत की जानकारी सामने आने के बावजूद उसके साथ बातचीत क्यों जारी रही. इन संदेशों की व्याख्या को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं. हालांकि, ईमेल की भाषा या संपर्क की मौजूदगी के आधार पर किसी व्यक्ति की आपराधिक संलिप्तता का निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा.
महुआ मोइत्रा और पवन खेड़ा ने भी पूछे सवाल
तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा और कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने पुरी के स्पष्टीकरण पर सवाल उठाए. विपक्षी नेताओं ने ईमेल में मीटिंग, बातचीत और संपर्कों से जुड़े संदर्भों का हवाला देते हुए पूछा कि इन मुलाकातों की प्रकृति क्या थी और एपस्टीन के साथ बातचीत की ज़रूरत क्यों पड़ी. इन सवालों को लेकर राजनीतिक बहस और तेज़ हो गई है.
पुरी का दावा-आपराधिक गतिविधियों से कोई संबंध नहीं
केंद्रीय मंत्री ने अपने बचाव में कहा है कि एपस्टीन से उनका संपर्क पेशेवर काम तक सीमित था. उन्होंने यह भी कहा कि एपस्टीन के खिलाफ सामने आए यौन अपराधों और पीड़ितों से जुड़े मामलों से उनका कोई लेना-देना नहीं है. इस तरह पुरी ने आरोपों को ख़ारिज करते हुए अपने संपर्कों को सामान्य पेशेवर बातचीत का हिस्सा बताया है.
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