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दलितों की नाराजगी का जोखिम नहीं उठा सकते भाजपा-कांग्रेस, 'शुद्धिकरण' पर उत्तराखंड से यूपी-पंजाब तक असर

चंद्रशेखर बुड़ाकोटी, देहरादूनउत्तराखंड के हल्द्वानी में हुए कथित शुद्धीकरण हवन के बाद उपजे विवाद से दलित फैक्टर तेजी से राजनीतिक विमर्श में आ गया है। वर्ष 2027 के चुनाव को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस ने इसे दलित अपमान से जोड़ते हुए बड़ा मुद्दा बना रही है। इसे देखते हुए भाजपा भी इस मुद्दे पर आक्रामक रुख अख्तियार कर चुकी है। उत्तराखंड से पंजाब और यूपी में एससी वर्ग की सीटें काफी अहम हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि तीनों राज्यों में 156 सीटें एससी वर्ग के लिए आरक्षित हैं और आगामी 2027 में इन तीनों पर दोनों दल जोखिम लेने की स्थिति में नहीं हैं।रक्षाबंधन पर दोनों दलों के बीच खुद को महिलाओं का हितैषी साबित करने की होड़ थी। अब इस होड़ की धुरी दलित वर्ग बनता दिखने लगा है। दरअसल, 70 विधानसभा सीट वाले उत्तराखंड में 13 सीट एससी वर्ग के लिए आरक्षित हैं। जबकि दो एसटी के लिए। सरकार बनाने के 36 विधायकों के आंकड़े को हासिल करने के लिए उत्तराखंड में एक-एक सीट अहम है।उत्तराखंड में एससी आरक्षित सीटों पर समीकरण बदलेराज्य में 2012 से एससी आरक्षित सीटों के राजनीतिक समीकरण काफी कुछ बदल गए हैं। वर्ष 2012 में नए परिसीमन के अनुसार तय सीटों पर हुए चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के बीच आरक्षित सीटों में हार जीत का अंतर ज्यादा नहीं था। इसमें बसपा के पास भी दो सीट थीं। वर्ष 2017 में तस्वीर बिलकुल पलट गई। भाजपा की प्रचंड बहुमत वाली सरकार बनाने में एससी आरक्षित सीटों का बड़ा योगदान रहा। तब भाजपा 13 में से 11 सीट जीत गई थी।इसके बाद 2022 के चुनाव में भाजपा की एससी आरक्षित सीटों की संख्या 11 से घटकर नौ रह गई थी। अब वर्ष 2027 में एक बार फिर भाजपा-कांग्रेस आमने सामने होंगे। लेकिन लड़ाई केवल 13 सीटों तक नहीं है। बल्कि इन आरक्षित सीटों से इतर हरिद्वार, यूएसनगर और देहरादून में भी कुछ सीटों पर एससी वोट जीत-हार में अहम भूमिका अदा करता है। राज्य में दलित मतदाता की संख्या 17 से 19 फीसदी तक है।यूपी में 22% दलित वोटरयूपी में करीब 22 फीसदी दलित मतदाता हैं। विधानसभा की 403 में 86 सीट अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए आरक्षित हैं। वर्ष 2022 चुनाव में कांग्रेस ने सिर्फ दो सीटें जीतीं। इनमें कोई भी आरक्षित सीट नहीं है। हालांकि, 2024 लोकसभा में पार्टी बाराबंकी सुरक्षित सीट जीतने में सफल रही।पंजाब में 50 सीटों पर प्रभावपंजाब में 34 सीट आरक्षित हैं, लेकिन दलितों का प्रभाव 50 सीटों पर है। वर्ष 2022 पंजाब चुनाव में कांग्रेस 34 में सिर्फ तीन सीट पर जीत दर्ज कर पाई। वर्ष 2017 के चुनाव में कांग्रेस ने आरक्षित सीट पर एक तरफा जीत हासिल की थी। पार्टी 34 में से 21 सीट जीतने में सफल रही थी।दोनों दलों का क्या कहना हैकांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के उत्तराखंड अध्यक्ष मदन लाल का कहना है कि यह प्रकरण भाजपा की संकीर्ण मानसिकता को दर्शाता है। इस मामले में दोषियों पर कार्रवाई होने तक कांग्रेस चुप नहीं बैठेगी। पूरे प्रदेश में सरकार के खिलाफ विरेाध प्रदर्शन किए जाएंगे। वहीं, भाजपा अनु मोर्चा के उत्तराखंड अध्यक्ष बलबीर घुनियाल का कहना है कि कांग्रेस तुष्टीकरण और वोट बैंक की राजनीति कर रही है। उसे चाहिए कि ऐसी राजनीति से ऊपर उठकर भाईचारे, शांति, एकता और सामाजिक सौहार्द को मजबूत करने की दिशा में काम करें।