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धमतरी में गंगरेल बांध के 2 गेट खोले गए:96.17% भरा जलाशय, 4 हजार क्यूसेक से ज्यादा पानी छोड़ा; आसपास के गांवों को अलर्ट
छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े गंगरेल बांध के दो गेट खोल दिए गए हैं। बांध से 4 हजार क्यूसेक से ज्यादा पानी छोड़ा जा रहा है। गंगरेल जलाशय में 96.17 प्रतिशत पानी भर गया है। दो गेट से छोड़े गए पानी को रुद्री बैराज में भेजा जा रहा है। प्रशासन ने गेट खोलने के बाद आसपास के गांवों को अलर्ट किया है। जल संसाधन विभाग जिले में लगातार हो रही बारिश और बांधों में पानी की आवक को देखते हुए जलाशयों की स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है। 1 सितंबर 2026 को सुबह 8 बजे तक गंगरेल जलाशय में 96.17 प्रतिशत पानी भर गया था। जलाशय में 4,342 क्यूसेक पानी की आवक हो रही है। इसी तरह मुरूमसिल्ली जलाशय में 745 क्यूसेक पानी की आवक दर्ज हुई है। दुधावा जलाशय में 83.56 प्रतिशत पानी भर गया है और 1,178 क्यूसेक पानी आ रहा है। सोढ़ुर जलाशय में 69.25 प्रतिशत पानी भरा है और 167 क्यूसेक पानी की आवक दर्ज की गई है। गंगरेल से करीब 4 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा आगे बारिश की संभावना और जलाशयों में लगातार पानी आने को ध्यान में रखते हुए गंगरेल जलाशय के दो गेटों से करीब 4,000 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। रुद्री बैराज से महानदी में छोड़ा जा रहा पानी यह पानी रुद्री बैराज पहुंचने पर करीब 2,000 क्यूसेक महानदी मुख्य नहर में और 2,000 क्यूसेक महानदी में छोड़ा जा रहा है। महानदी में पानी छोड़े जाने से नदी का जलस्तर बढ़ने की संभावना है। इसे देखते हुए नदी किनारे बसे गांवों को सावधान रहने के निर्देश दिए गए हैं। कलेक्टर ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने जिले के लोगों से सतर्क और सुरक्षित रहने को कहा है। उन्होंने बताया कि जलाशयों में पानी आने और आगे बारिश को देखते हुए प्रशासन पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए है। नदी-नालों के किनारे रहने वालों को अलर्ट उन्होंने महानदी और दूसरे नदी-नालों के किनारे रहने वाले नागरिकों से अपील की है कि नदी का जलस्तर बढ़ने पर वे तुरंत सुरक्षित और ऊंची जगह पर चले जाएं। किसी भी हाल में नदी, नाला, पानी भरे इलाकों या तेज बहाव वाले पानी को पार करने की कोशिश न करें। 100% भरा मॉडमसिल्ली बांध, एक्टिव हुआ साइफन सिस्टम धमतरी जिले में लगातार बारिश हो रही है। इसका असर अब बांधों में भी दिख रहा है। धमतरी का ऐतिहासिक मॉडमसिल्ली बांध 100 फीसदी भर गया है। इसके बाद इसका खास साइफन सिस्टम एक्टिव हो गया है। जलस्तर तय सीमा तक पहुंचने पर बांध के साइफन स्पिलवे से पानी निकलना शुरू हो गया है। ऑटोमेटिक तरीके से खुलते साइफन गेट और तेजी से बाहर निकलते पानी का नजारा आकर्षक लग रहा है। मॉडमसिल्ली बांध धमतरी जिले के सबसे अनोखे और ऐतिहासिक बांधों में से एक है। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी तकनीक है। ब्रिटिश काल में साल 1914 से 1923 के बीच इस बांध को बनाया गया था। सौ साल से ज्यादा पुराना होने के बाद भी बांध की तकनीक आज भी लोगों को हैरान करती है। पानी बढ़ते ही अपने आप एक्टिव होता है साइफन मॉडमसिल्ली बांध में ऑटोमेटिक साइफन सिस्टम लगा है। बांध में पानी का स्तर तय सीमा तक पहुंचने पर यह सिस्टम अपने आप एक्टिव हो जाता है और पानी बाहर निकलना शुरू हो जाता है। इसके लिए अलग से गेट खोलने की जरूरत नहीं पड़ती। यही खास तकनीक मॉडमसिल्ली बांध को दूसरे बांधों से अलग बनाती है। 34 साइफन स्पिलवे से निकलता है पानी मॉडमसिल्ली बांध में 34 साइफन स्पिलवे हैं। बारिश के मौसम में जब बांध का जलस्तर बढ़ता है, तो साइफन सिस्टम एक्टिव होकर ज्यादा पानी को बाहर निकालता है। इस दौरान साइफन से निकलता पानी और एक साथ खुलते ऑटोमेटिक गेट बांध के नजारे को खूबसूरत बना देते हैं। पुरानी इंजीनियरिंग का शानदार उदाहरण मॉडमसिल्ली बांध सिर्फ पानी जमा करने का एक अहम केंद्र ही नहीं है, बल्कि पुराने समय की इंजीनियरिंग का शानदार उदाहरण भी है। करीब एक सदी से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी बांध में इस्तेमाल की गई साइफन तकनीक आज भी बारिश के दौरान अच्छे से काम करती है। बारिश में देखने लायक हुआ बांध का नजारा लगातार बारिश के बाद बांध के पूरी क्षमता तक भरने और साइफन सिस्टम के एक्टिव होने से यहां का नजारा देखने लायक हो गया है। पानी का तेजी से बाहर निकलना और ऑटोमेटिक तरीके से एक्टिव होते साइफन लोगों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। मॉडमसिल्ली बांध की यह अनोखी तकनीक बारिश के मौसम में खास तौर पर देखने को मिलती है। यही वजह है कि हर साल मानसून के दौरान बांध का साइफन सिस्टम लोगों के बीच चर्चा का विषय बन जाता है।