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BRICS डेलीगेट्स ने वैश्विक धरोहर भीमबेटका में शैलाश्रय देखे:रायसेन में प्राचीन मानव सभ्यता के बारे में जाना; तब की गतिविधियों के चित्र देखे
ब्रिक्स देशों के प्रतिनिधियों ने रविवार को रायसेन जिले में स्थित यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल भीमबेटका शैलाश्रयों का भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने हजारों वर्ष पुरानी शैलचित्र कला, प्राकृतिक शैलाश्रयों और प्राचीन मानव सभ्यता से जुड़े प्रमाणों का अवलोकन किया। प्रतिनिधियों को बताया गया कि भीमबेटका के शैलाश्रय प्रागैतिहासिक मानव जीवन और कला के महत्वपूर्ण प्रमाण हैं। यहां के शैलचित्रों में तत्कालीन मानव की दैनिक गतिविधियों, शिकार, पशु-पक्षियों, सामूहिक कार्यों और सामाजिक जीवन की झलक मिलती है। इन हजारों वर्ष पुरानी चित्रकलाओं में उस समय के मानव की कल्पनाशीलता और कलात्मक अभिव्यक्ति स्पष्ट दिखाई देती है। डेलीगेट्स ने विभिन्न शैलाश्रयों में जाकर इन चित्रों का बारीकी से अवलोकन किया। प्राकृतिक चट्टानों के बीच बने शैलाश्रयों और उनमें संरक्षित कलाकृतियों को देखकर विदेशी प्रतिनिधि काफी प्रभावित हुए। उन्होंने भीमबेटका की प्राकृतिक संरचना और हजारों वर्षों से संरक्षित इस प्राचीन विरासत के बारे में विस्तृत जानकारी भी प्राप्त की। भीमबेटका के शैलचित्र केवल कला के उदाहरण नहीं हैं, बल्कि ये उस दौर के मानव के जीवन, रहन-सहन और प्रकृति के साथ उसके संबंधों को समझने में भी सहायक हैं। चित्रों में दर्शाए गए पशु-पक्षी, शिकार के दृश्य और सामूहिक गतिविधियां तत्कालीन सामाजिक जीवन को दर्शाते हैं। डेलीगेट्स ने इन चित्रों की बारीकी और उनके लंबे समय से सुरक्षित रहने की प्रक्रिया में विशेष रुचि दिखाई। BRICS डेलीगेट्स का यह भ्रमण भारत की समृद्ध सांस्कृतिक और पुरातात्विक विरासत से विदेशी प्रतिनिधियों को परिचित कराने की दिशा में महत्वपूर्ण रहा। इस अवसर पर अपर कलेक्टर मनोज उपाध्याय सहित जिला प्रशासन और संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद थे। उन्होंने डेलीगेट्स के भ्रमण की व्यवस्थाओं में सहयोग किया और उन्हें भीमबेटका से जुड़ी ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक जानकारी प्रदान की।