Thursday, 3 September 2026
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राम मंदिर ट्रस्ट की नई टीम को जानें: CEO रिटायर्ड एयर मार्शल, कोषाध्यक्ष बिजनेसमैन; देखें पूरी लिस्ट

INT News3 September 2026 at 08:42 am

Ram Mandir Trust New Team : बुधवार को हुई ट्रस्ट की दो बैठकों में यह फैसला लिया गया. जितेंद्र मिश्रा तीन साल तक CEO के पद पर रहेंगे. वहीं, ट्रस्ट के मौजूदा कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि को पूर्णकालिक महासचिव बनाया गया है. दिल्ली के कारोबारी महेश भागचंदका को नया कोषाध्यक्ष नियुक्त किया गया है.

कौन हैं रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा?

जितेंद्र मिश्रा भारतीय वायुसेना के अनुभवी अधिकारी रहे हैं. वह फाइटर कॉम्बैट लीडर और एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट के तौर पर काम कर चुके हैं. 30 अप्रैल को वह पश्चिमी वायु कमान के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ के पद से रिटायर हुए थे.

वह ऑपरेशन सिंदूर की योजना बनाने वाले वरिष्ठ अधिकारियों में भी शामिल रहे थे. इस ऑपरेशन में उनकी भूमिका के लिए उन्हें विशिष्ट सेवा का सम्मान भी मिला था.

उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के भोपालपुरा गांव के रहने वाले जितेंद्र मिश्रा अब राम मंदिर ट्रस्ट के रोजमर्रा के कामकाज की जिम्मेदारी संभालेंगे. उनकी भूमिका में सुरक्षा, लॉजिस्टिक्स, भीड़ प्रबंधन और ट्रस्ट के करोड़ों रुपये के वित्तीय कामकाज की निगरानी जैसे अहम काम शामिल हो सकते हैं.

उनकी नियुक्ति को ट्रस्ट के कामकाज में बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है. अब कई प्रशासनिक और संचालन से जुड़े काम केवल ट्रस्टियों के भरोसे रहने के बजाय पेशेवर प्रबंधन के जरिए किए जाएंगे.

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महेश भागचंदका बने नए कोषाध्यक्ष

दिल्ली के कारोबारी महेश भागचंदका को ट्रस्ट का नया कोषाध्यक्ष बनाया गया है. वह M2K ग्रुप के फाउंडर-चेयरमैन हैं और अशोक सिंघल फाउंडेशन की कमान भी संभालते हैं. वह विश्व हिंदू परिषद के पूर्व अध्यक्ष अशोक सिंघल के रिश्तेदार भी हैं.

भागचंदका अब राम मंदिर ट्रस्ट की वित्तीय जिम्मेदारियां संभालेंगे. इनमें मंदिर के निर्माण और प्रबंधन से जुड़े खर्च के साथ-साथ मिलने वाले बड़े पैमाने के चंदे और दान की निगरानी भी शामिल है.

विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने उनकी नियुक्ति का स्वागत किया है. उन्होंने भागचंदका को राम जन्मभूमि आंदोलन का 'फ्रंटलाइन सोल्जर' बताया.

राम जन्मभूमि केस लड़ने वाले वकील भी बने ट्रस्टी

ट्रस्ट में पूर्व उत्तर प्रदेश एडिशनल एडवोकेट जनरल मदन मोहन पांडेय को भी शामिल किया गया है. 74 वर्षीय पांडेय अयोध्या के रहने वाले हैं और राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद में रामलला विराजमान और दिवंगत महंत रामचंद्र परमहंस दास की ओर से पैरवी कर चुके हैं.

वह 1990 के दशक की शुरुआत से इस कानूनी लड़ाई से जुड़े रहे और 2019 में सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले तक मामले की पैरवी में शामिल रहे.

नर्मला यादव बनीं ट्रस्ट की पहली महिला सदस्य

ट्रस्ट में नर्मला यादव को भी नया सदस्य बनाया गया है. वह शिकोहाबाद के पीजी कॉलेज की पूर्व प्रिंसिपल और लंबे समय से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़ी कार्यकर्ता रही हैं.

नर्मला यादव फिलहाल राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ की उपाध्यक्ष हैं. उनकी नियुक्ति के बाद फिरोजाबाद और उनके मायके एटा के आवागढ़ में खुशी का माहौल रहा.

वह राम मंदिर के निर्माण और प्रबंधन की जिम्मेदारी संभालने वाले ट्रस्ट की पहली महिला सदस्य बनी हैं.

चढ़ावे की रकम में गड़बड़ी के आरोप के बाद बदलाव

ट्रस्ट में यह फेरबदल मंदिर में चढ़ावे की रकम में कथित गड़बड़ी के आरोपों के बाद हुआ है. 7 जून को समाजवादी पार्टी नेता तेज नारायण 'पवन' पांडेय ने आरोप लगाया था कि मंदिर में चढ़ावे के 5 करोड़ से 7.5 करोड़ रुपये के बीच की रकम में गड़बड़ी हुई है.

इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को पहली विशेष जांच टीम (SIT) गठित की. 25 जून को आठ नामजद आरोपियों और अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई. इन पर आपराधिक विश्वासघात, धोखाधड़ी, चोरी और आपराधिक साजिश समेत कई धाराओं में मामला दर्ज हुआ.

अगले ही दिन सभी आठ नामजद आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया. जांच के दौरान उनके घरों से करीब 80 लाख रुपये बरामद किए जाने की बात सामने आई.

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SIT ने बताईं 'गंभीर खामियां', लेकिन शीर्ष नेतृत्व को क्लीन चिट

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद जुलाई में एक दूसरी SIT का गठन किया गया था, जिसकी अगुवाई एक IPS अधिकारी को दी गई.

पहली SIT ने 17 अगस्त को अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपी. रिपोर्ट में ट्रस्ट के कामकाज में 'गंभीर खामियों' की बात कही गई. इसमें भारतीय स्टेट बैंक की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए और ट्रस्ट में पेशेवर वित्तीय प्रबंधन की कमी को रेखांकित किया गया.

हालांकि, जांच रिपोर्ट में ट्रस्ट के शीर्ष नेतृत्व के स्तर पर वित्तीय गड़बड़ी का कोई सबूत नहीं मिलने की बात कही गई.