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सौरभ दास और आशुतोष रांका को मिली जमानत, 7 दिन बाद जेल से बाहर आएंगे CJP नेता

INT News21 October 2026 at 07:14 pm

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के सह-संयोजक सौरभ दास और आशुतोष रांका को सात दिन बाद राहत मिली है. दिल्ली की स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) कोर्ट ने बुधवार को दोनों नेताओं को रिहा करने का फैसला सुनाया. दिल्ली पुलिस ने अदालत से दोनों की न्यायिक हिरासत तीन दिन और बढ़ाने की मांग की थी, लेकिन कोर्ट ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया.

दोनों नेताओं को 14 अक्टूबर को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेजा गया था. इसके बाद 19 अक्टूबर को उनकी हिरासत दो दिन के लिए और बढ़ा दी गई थी. बुधवार को हिरासत की अवधि खत्म होने पर पुलिस ने इसे आगे बढ़ाने की मांग की थी.

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन से जुड़ा है पूरा मामला

सौरभ दास और आशुतोष रांका को जंतर-मंतर के डी-नोटिफाइड प्रदर्शन स्थल में कथित तौर पर जबरन घुसने और शांति बनाए रखने के लिए दिए गए बांड का उल्लंघन करने के आरोप में हिरासत में लिया गया था. इसी मामले में दोनों को न्यायिक हिरासत में भेजा गया था. 14 अक्टूबर को पांच दिन की हिरासत का आदेश दिया गया था. इसके बाद 19 अक्टूबर को SEM कोर्ट ने हिरासत की अवधि दो दिन और बढ़ा दी. इस तरह दोनों नेताओं को कुल सात दिन न्यायिक हिरासत में रहना पड़ा.

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दोनों नेताओं के खिलाफ दो थानों में FIR दर्ज

गौरतलब है कि सौरभ दास और आशुतोष रांका के खिलाफ दिल्ली के दो अलग-अलग थानों में FIR दर्ज की गई हैं. कनॉट प्लेस थाने में दर्ज एफआईआर में दोनों पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 223A, 332 और 61(2) लगाई गई हैं. ये धाराएं सरकारी आदेश का पालन नहीं करने, अपराध करने के इरादे से किसी परिसर में घुसने और आपराधिक साजिश से जुड़े मामलों में लागू होती हैं. वहीं, संसद मार्ग थाने में दर्ज दूसरी एफआईआर में बीएनएस की धारा 221, 115(2), 132, 121(1) और 3(5) लगाई गई हैं. ये धाराएं सरकारी कर्मचारी के काम में बाधा डालने, चोट पहुंचाने, सरकारी कर्मचारी को ड्यूटी करने से रोकने के लिए हमला या बल प्रयोग करने और साझा मंशा से जुड़े आरोपों से संबंधित हैं.

दिल्ली हाईकोर्ट में भी पहुंचा था मामला

न्यायिक हिरासत बढ़ाए जाने के खिलाफ सौरभ दास और आशुतोष रांका ने दिल्ली हाईकोर्ट में भी याचिका दायर की थी. बुधवार को जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की. सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सवाल किया कि जब मामला उसी दिन SEM कोर्ट में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध था, तो याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट का रुख क्यों किया. अदालत ने दोनों नेताओं को पहले SEM कोर्ट में होने वाली सुनवाई का इंतजार करने और उसके बाद उपलब्ध कानूनी विकल्पों पर विचार करने की सलाह दी थी.

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हाईकोर्ट ने कानूनी विकल्पों पर विचार करने को कहा

जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद ने कहा कि अगर शाम चार बजे तक फैसला याचिकाकर्ताओं के पक्ष में आ जाता है, तो मामला वहीं समाप्त हो सकता है. वहीं, अगर फैसला उनके पक्ष में नहीं आता है तो उसके बाद वो हाईकोर्ट का रुख कर सकते हैं. हालांकि, CJP के वकील ने हाईकोर्ट में ही सुनवाई करने और राहत देने की अपील की. इस बीच, SEM कोर्ट ने हिरासत बढ़ाने की पुलिस की मांग को स्वीकार नहीं किया और दोनों नेताओं की रिहाई का आदेश दे दिया.