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रोहतक में किसानों को पराली न जलाने की सलाह:सही प्रबंधन पर ₹1,200 प्रति एकड़ सहायता; कृषि यंत्रों पर 50% तक सब्सिडी
रोहतक जिले के महम खंड के फरमाना बादशाहपुर, बहलबा और मोखरा गांवों में शुक्रवार को कृषि विभाग ने किसानों को पराली न जलाने और फसल अवशेषों के उचित प्रबंधन के प्रति जागरूक किया। एसडीएम विपिन कुमार के निर्देश पर लगाए गए शिविरों में कृषि विकास अधिकारी मोनिका ने बताया कि पराली खेत में मिलाने से मिट्टी की उपजाऊ शक्ति और नमी बढ़ती है। विभाग फसल अवशेष प्रबंधन के लिए सुपर सीडर व मल्चर जैसे कृषि यंत्रों पर 50% तक अनुदान दे रहा है। सही प्रबंधन करने वाले किसानों को प्रति एकड़ 1,200 रुपए की सहायता भी मिलेगी। कृषि यंत्रों पर 50 प्रतिशत तक अनुदान अधिकारी मोनिका ने किसानों से कहा कि फसल अवशेषों को जलाने के बजाय खेत में मिलाना मिट्टी की उपजाऊ शक्ति बढ़ाने का अच्छा तरीका है। इससे जैविक कार्बन बढ़ता है, नमी बनी रहती है और मिट्टी के गुण सुधरते हैं। इन्हें पशु चारे के रूप में भी इस्तेमाल कर सकते हैं। विभाग फसल अवशेष प्रबंधन के लिए सुपर सीडर, मल्चर जैसे कृषि यंत्रों पर 50 प्रतिशत तक अनुदान दे रहा है। सही प्रबंधन करने वाले किसानों को प्रति एकड़ 1,200 रुपए की सहायता राशि भी मिलेगी। पराली जलाने से फैलती हैं हानिकारक गैस मोनिका ने बताया कि पराली जलाने से हानिकारक गैसें फैलती हैं, जिससे वायु प्रदूषण बढ़ता है। इससे मिट्टी के सूक्ष्मजीव और पोषक तत्व नष्ट होते हैं और भूमि की उपजाऊ शक्ति कम होती है। यह इंसानों और पशुओं के स्वास्थ्य के लिए भी बुरा है। उन्होंने किसानों से अपील की, कि वे फसल अवशेषों को आग लगाने के बजाय उनका उचित प्रबंधन करें और पर्यावरण संरक्षण में अपनी सक्रिय भागीदारी निभाएं। प्रदूषणमुक्त वातावरण बनाए रखने की अपील उन्होंने कहा कि पराली का सही प्रबंधन न केवल मिट्टी की सेहत सुधारने में सहायक है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भूमि की उपजाऊ क्षमता बनाए रखने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है। इस अवसर पर ग्राम पंचायत के प्रतिनिधियों, ग्रामीणों, कृषि विभाग के कर्मचारियों ने किसानों को पराली न जलाने के प्रति जागरूक करने का संदेश दिया। जागरूकता रैली के माध्यम से ग्रामीणों से पर्यावरण संरक्षण में सहयोग देने तथा स्वच्छ और प्रदूषणमुक्त वातावरण बनाए रखने की अपील की गई।