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जंतर-मंतर प्रदर्शन : सौरव दास और आशुतोष रांका को SEM कोर्ट ने किन शर्तों पर दी जमानत?

दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के मामले में कॉकरोच जनता पार्टी के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका को राहत मिली है. स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) कोर्ट ने 21 अक्टूबर को दोनों की रिहाई का आदेश दिया. जिसके बाद सौरभ दास और आशुतोष रांका तिहाड़ जेल से रिहा हो गए हैं. हालांकि, दोनों को अपनी रिहाई के लिए शांति बनाए रखने और भविष्य में प्रदर्शन से जुड़ी शर्तों का पालन करने का आश्वासन देना पड़ा है.
जमानत के लिए क्या रखी गई शर्तें
कोर्ट से राहत मिलने के बाद दोनों नेताओं को कुछ शर्तों का पालन करना होगा. उन्होंने 50-50 हजार रुपये के निजी मुचलके भरे और जमानतदार भी पेश किए. दोनों नेताओं ने लिखित रूप से भरोसा दिया कि वे शांति भंग नहीं करेंगे और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करेंगे. इसके अलावा, उन्होंने आश्वासन दिया कि जब तक जंतर-मंतर को कानूनी रूप से दोबारा प्रदर्शन स्थल घोषित नहीं किया जाता, तब तक वे वहां प्रदर्शन के लिए लोगों को नहीं बुलाएंगे.
रिहाई की शर्तों के तहत सौरव दास और आशुतोष रांका ने यह भी भरोसा दिया कि भविष्य में कोई भी प्रदर्शन संविधान और कानून के दायरे में करेंगे. दोनों नेताओं को मामले की हर सुनवाई पर कोर्ट में उपस्थित होना होगा. वहीं, पुलिस को अगली सुनवाई पर उनके जमानतदारों की जांच से जुड़ी रिपोर्ट कोर्ट में पेश करनी होगी.
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13 अक्टूबर को हिरासत में लिए गए थे दोनों नेता
सौरव दास और आशुतोष रांका को 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन से जुड़े मामले में हिरासत में लिया गया था. उन पर बिना अनुमति प्रदर्शन स्थल में प्रवेश करने, बैरिकेडिंग पार करने और पहले दिए गए शांति बॉन्ड की शर्तों का उल्लंघन करने के आरोप लगाए गए थे. इसके बाद 14 अक्टूबर को SEM कोर्ट ने दोनों को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेजने का आदेश दिया था. 19 अक्टूबर को उनकी हिरासत दो दिन के लिए और बढ़ा दी गई. यह अवधि 21 अक्टूबर को समाप्त हो रही थी. दिल्ली पुलिस ने हिरासत तीन दिन और बढ़ाने की मांग की. हालांकि, कोर्ट ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया और दोनों नेताओं की रिहाई का आदेश दे दिया.
आगे क्या होगा?
दोनों नेताओं को रिहाई मिलने से फिलहाल उनकी न्यायिक हिरासत समाप्त हो गई है. हालांकि, इससे जंतर-मंतर पर प्रदर्शन से जुड़े मामले का निपटारा नहीं हुआ है. उन्हें आगे भी कोर्ट की शर्तों का पालन करना होगा और सुनवाई में उपस्थित रहना होगा.
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