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हरियाणा HSPCB के खाते से 169 करोड़ गबन:CBI बोली- खाता खोलने की मंजूरी नहीं ली; रिकॉर्ड भी नहीं मिला, वरिष्ठ लेखा अधिकारी 3 दिन की रिमांड पर
हरियाणा के 657 करोड़ रुपए के बैंक घोटाले की जांच कर रही CBI ने बड़ा खुलासा किया है। एजेंसी के मुताबिक, हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (HSPCB) के पास इस बात का कोई रिकॉर्ड नहीं है कि चंडीगढ़ के सेक्टर-32 स्थित IDFC फर्स्ट बैंक में वह खाता क्यों और किस मंजूरी से खोला गया, जिससे 169 करोड़ रुपए का गबन किया गया।
CBI ने बताया कि खाता खोलने के लिए बोर्ड के शीर्ष अधिकारियों से कोई मंजूरी नहीं ली गई। इस पूरे मामले की जानकारी वरिष्ठ लेखा अधिकारी परवीन कुमार से ऊपर किसी अधिकारी को नहीं दी गई। एजेंसी के अनुसार, 169 करोड़ रुपए का यह गबन हरियाणा सरकार के आठ विभागों को प्रभावित करने वाला सबसे बड़ा मामला है, जबकि कुल घोटाला 657 करोड़ रुपए का है। CBI के प्रमुख खुलासे
27 फरवरी 2025 को IDFC फर्स्ट बैंक में खाता खोला गया। उस समय विनीत गर्ग HSPCB के चेयरमैन और प्रदीप कुमार सदस्य सचिव थे। खाता खोलने के फॉर्म पर अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता के रूप में वरिष्ठ लेखा अधिकारी परवीन कुमार ने हस्ताक्षर किए। खाता खोलने की ई-फाइल परवीन के पास आई, जिसे उन्होंने डेटा एंट्री ऑपरेटर सौरभ शर्मा को भेज दिया। 110 करोड़ चेक से निकाले
CBI के मुताबिक, परवीन के हस्ताक्षर वाले चेकों के जरिए 110 करोड़ रुपए निकाले गए। पहला चेकबुक विभाग में आने के बाद गायब हो गया, जबकि दूसरे चेकबुक का इस्तेमाल फर्जी डेबिट और फर्जी कंपनियों के खातों में रकम ट्रांसफर करने के लिए किया गया।
जांच में सामने आया कि रकम कैपको फिनटेक, स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स, एएस बुलियन ट्रेडर्स, दिशा ट्रेडर्स, भारत सोलर, मन्नत कॉन्ट्रैक्टर्स और एसआरआर प्लानिंग गुरुज जैसी कंपनियों में भेजी गई।
निवेश सीमा भी छिपाने का आरोप
CBI का आरोप है कि परवीन कुमार को वित्त विभाग के 12 जुलाई 2024 के आदेश की पूरी जानकारी थी। इस आदेश के अनुसार IDFC फर्स्ट बैंक जैसे नव सूचीबद्ध बैंकों में अधिकतम 50 करोड़ रुपए और स्मॉल फाइनेंस बैंकों में 25 करोड़ रुपए तक ही निवेश किया जा सकता था।
एजेंसी का आरोप है कि परवीन ने जानबूझकर अपने वरिष्ठ अधिकारियों को इस निवेश सीमा की जानकारी नहीं दी और अपने नोट्स में भी इसका उल्लेख नहीं किया। इससे IDFC फर्स्ट बैंक में तय सीमा से अधिक निवेश हो गया।
3 दिन की CBI रिमांड
CBI ने अदालत से कहा कि गबन की रकम से खरीदी गई संपत्तियों और सोने की बरामदगी के लिए परवीन कुमार से पूछताछ जरूरी है। पंचकूला की विशेष CBI अदालत ने दलीलें स्वीकार करते हुए परवीन कुमार को 3 दिन की CBI रिमांड पर भेज दिया।