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सरायकेला-खरसावां में सुस्त पड़ा मानसून, कम बारिश से धान की खेती प्रभावित

सरायकेला से शचिंद्र कुमार दाश की रिपोर्ट
Seraikela Kharsawan Monsoon : सरायकेला-खरसावां जिले में मानसून की रफ्तार अब तक सुस्त बनी हुई है. इसका असर अब खेती-किसानी पर साफ दिखने लगा है. जिला कृषि विभाग की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार एक जून से 30 जून तक जिले में सामान्य से करीब 21 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है. जून माह में जिले में 97.2 मिलीमीटर वर्षा हुई है, जबकि सामान्य वर्षा 122.8 मिलीमीटर है. मानसून की धीमी शुरुआत से खरीफ खेती की रफ्तार धीमी पड़ गई है और किसानों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है.
धान की खेती करने वाले किसान चिंतित
बारिश की कमी का सबसे अधिक असर धान की खेती पर पड़ रहा है. सामान्य से कम वर्षा होने के कारण कृषि कार्य समय से पीछे चल रहा है. किसानों का कहना है कि मौजूदा बारिश धान की रोपनी के लिए पर्याप्त नहीं है. खेतों में तैयार धान के बिचड़ों के खराब होने की आशंका बढ़ने लगी है. यदि अगले दो सप्ताह के भीतर अच्छी वर्षा नहीं हुई, तो धान की खेती पर असर पड़ सकता है और उत्पादन भी प्रभावित हो सकता है.’
कहीं सूख रहे हैं बिचड़े, तो कहीं खाली पड़े हैं खेत
कमजोर मानसून के कारण इस वर्ष जून माह में अपेक्षित वर्षा नहीं हो सकी. इसका असर जिले में धान की खेती पर साफ दिखाई दे रहा है. कई स्थानों पर नर्सरी में तैयार धान के बिचड़े सूखने लगे हैं, जबकि ट्रैक्टर और हल से जोते गये खेत अब भी पानी के इंतजार में खाली पड़े हैं. जिले में सामान्यतः रोहिणी अथवा आर्द्रा नक्षत्र के दौरान कृषि कार्य शुरू हो जाता है, लेकिन इस बार खेतों में पर्याप्त पानी नहीं होने से रोपनी प्रभावित है. कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि अधिक दिनों तक नर्सरी में रहने से बिचड़ों की गुणवत्ता प्रभावित होती है और बाद में इसका असर उत्पादन पर भी पड़ता है. समय पर रोपनी नहीं होने से फसल की अवधि भी प्रभावित होगी.
पिछले वर्ष जून में हुई थी सामान्य से साढ़े तीन गुना अधिक बारिश
सरायकेला-खरसावां जिले में पिछले वर्ष जून माह में मानसून पूरी तरह मेहरबान रहा था. जून 2025 में जिले में 468 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई थी, जो सामान्य वर्षा से करीब साढ़े तीन गुना अधिक थी. समय पर हुई अच्छी बारिश से खेतों में पर्याप्त नमी बनी रही और धान की रोपनी भी समय पर पूरी हो गई थी. इसका सकारात्मक असर धान के उत्पादन पर भी देखने को मिला था. इसके विपरीत इस वर्ष जून माह में सामान्य से काफी कम वर्षा होने से किसानों की चिंता बढ़ गई है.
क्या कहते है किसान ?
बिचड़ा तैयार, लेकिन खेतों में पानी नहीं : पंकज महतो
अधिकांश किसान आज भी वर्षा आधारित खेती पर निर्भर हैं. जून में पर्याप्त बारिश नहीं होने से धान का बिचड़ा लगाने का काम प्रभावित है. किसान खेत तैयार कर बारिश का इंतजार कर रहे हैं. समय पर वर्षा नहीं हुई तो उत्पादन प्रभावित होगा और किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा.
धान की खेती पिछड़ने लगी है : मनोज महतो
वर्षा में देरी के कारण इस वर्ष भी धान की खेती पिछड़ती नजर आ रही है. खेतों में बिचड़ा डालने का काम लगभग ठप पड़ा है. अगले एअक सप्ताह में अच्छी बारिश नहीं हुई, तो निश्चित रुप से धान की खेती पर असर पड़ेगा.
मानसून की बारिश का इंतजार कर रहे है : शैलेश सिंह
इस साल कब मानसून आया और चला गया, इसका अहसास भी नहीं हुआ. यदि समय पर बारिश होती तो किसान अब तक खेत तैयार कर बीज डाल चुके होते. किसान अभी भी मानसून की अच्छी बारिश की इंतजार कर रहे हैं.
हजारों एकड़ भूमि पर रोपनी नहीं हो सकी : रमेश महतो
पर्याप्त वर्षा नहीं होने से क्षेत्र के किसान चिंतित हैं. सरायकेला-खरसावां में अधिकांश कृषि भूमि पर अब तक धान की रोपनी शुरू नहीं हो सकी है. सारी तैयारी धरी की धरी रह गयी है. पानी की कमी के कारण खेती प्रभावित हो रही है. तालाबों में भी खेती करने लायक पानी नहीं है.
जून 2026 में जिला के किस प्रखंड में कितनी बारिश (मिमी में) हुई
प्रखंड : इस वर्ष हुई बारिश : जून माह की सामान्य बारिश :
सरायकेला : 46 : 132
खरसावां : 112.6 : 162.1
गम्हरिया : 77 : 219
राजनगर : 50.6 :150
चांडिल : 124.2 : 72.7
नीमडीह : 69.2 : 89.9
ईचागढ़ : 151.6 : 65.4
कुकडू : 146.6 : 51.0
सरायकेला-खरसावां जिले में पिछले 10 वर्षों में जून माह में हुई बारिश का आंकड़ा
वर्ष : वर्षापात (मिलीमीटर में)
2025 : 97.2
2024 : 468
2024 : 40.6
2023 : 71.8
2022 : 128.4
2021 : 205.5
2020 : 188.5
2019 : 114.8
2018 : 114
2017 : 122.7
2016 : 80.2
2016 : 80.2
2015 : 116.9
2014 : 174
2013 : 147.1
2012 : 131.4
2011 : 347.3
2010 : 66.7
2009 : 77.8
2008 : 568
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