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जबलपुर हाईकोर्ट ने फांसी की सजा उम्रकैद में बदली:रेप कर की थी मासूम की हत्या, पत्नी-दोस्त बरी; अदालत ने कहा-आरोपी का आपराधिक इतिहास नहीं
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने शहडोल में तीन साल की मासूम से दुष्कर्म और हत्या के मामले में आरोपी रामनारायण ढीमर की फांसी की सजा को बदलकर 25 साल की कठोर उम्रकैद में बदल दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आरोपी को 25 साल की अवधि पूरी होने तक किसी भी तरह की माफी या सजा में छूट का लाभ नहीं मिलेगा। वहीं आरोपी की पत्नी पिंकी और दोस्त राजकुमार को दी गई चार-चार साल की सजा निरस्त करते हुए दोनों को बरी कर दिया। बुधवार को जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अवनीन्द्र कुमार सिंह की डिवीजन बेंच ने शहडोल के जिला एवं सत्र न्यायालय, बुढ़ार से भेजे गए डेथ रेफरेंस पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया। 2023 में मासूम से दुष्कर्म के बाद की थी हत्या मामला शहडोल के खैरहा थाना क्षेत्र के ग्राम छिरहटी का है। अभियोजन के अनुसार 1 मार्च 2023 की रात रामनारायण ने पड़ोस में रहने वाली तीन साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म किया और बाद में उसकी हत्या कर दी थी। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जिला कोर्ट में पेश किया था। जिला एवं सत्र न्यायालय, बुढ़ार ने 13 जनवरी 2026 को रामनारायण को फांसी की सजा सुनाई थी। फांसी की पुष्टि के लिए जिला अदालत ने मामला हाईकोर्ट भेजा था। आरोपी की पत्नी पिंकी और दोस्त राजकुमार को अपराध में सहयोग के आरोप में चार-चार साल की सजा सुनाई गई थी। पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड नहीं मिला, सुधार की संभावना मानी हाईकोर्ट ने सजा पर फैसला सुनाते हुए आरोपी की व्यक्तिगत और सामाजिक पृष्ठभूमि पर भी विचार किया। कोर्ट ने पाया कि उसका पूर्व में कोई आपराधिक इतिहास नहीं था। उसकी उम्र करीब 32 वर्ष है और अदालत ने उसमें सुधार एवं पुनर्वास की संभावना भी मानी। डिवीजन बेंच ने उपलब्ध परिस्थितियों के आधार पर माना कि यह मामला मृत्युदंड के लिए जरूरी ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ श्रेणी में नहीं आता। इसलिए फांसी की सजा को 25 वर्ष की कठोर उम्रकैद में बदलना उचित माना गया। पत्नी और दोस्त को साक्ष्यों के आधार पर बरी किया हाईकोर्ट ने पिंकी और राजकुमार के खिलाफ लगाए गए आरोपों और उपलब्ध साक्ष्यों का भी परीक्षण किया। अदालत ने दोनों को दी गई चार-चार वर्ष की सजा निरस्त करते हुए दोषमुक्त कर दिया। इस मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता आदित्य अधिकारी और अधिवक्ता नितिन गुप्ता ने अदालत मित्र के रूप में पैरवी की।