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Jharkhand Liquor Scam: IAS विनय चौबे के करीबी अरुण सिंह से ACB की कड़ी पूछताछ, खुलेगा मनी ट्रेल का राज?

रांची : झारखंड के चर्चित शराब घोटाला मामले में एसीबी अब कारोबारियों के साथ आरोपी आइएएस अधिकारी विनय चौबे के संबंधों की भी गहन जांच कर रही है. एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि उत्पाद नीति बनाने, कंपनियों के चयन और पूरी प्रक्रिया में क्या अनियमितताएं हुई तथा कथित घोटाले का मनी ट्रेल क्या है. इन्हीं, सवालों के जवाब तलाशने के लिए गुरुवार को एसीबी अधिकारियों ने नेक्सजेन कंपनी के सीईओ और विनय चौबे के करीबी माने जानेवाले अरुण कुमार सिंह को एसीची मुख्यालय बुलाकर पूछताछ की.
अरुण कुमार सिंह से की गई विस्तार से पूछताछ
दोपहर करीब तीन बजे अरुण कुमार सिंह एसीबी कार्यालय पहुंचे और अधिकारियों के सवालों के जवाब दिये. सूत्रों के अनुसार जांच टीम ने अरुण कुमार सिंह से उनके और तत्कालीन उत्पाद सचिव विनय चौबे के संबंधों को लेकर विस्तार से पूछताछ की. उनसे पूछा गया कि दोनों के बीच किस तरह के व्यावसायिक या अन्य लेन-देन हुए, धन का आदान-प्रदान किन परिस्थितियों में हुआ, कथित घोटाले की राशि का उपयोग कहां-कहां किया गया और उससे किन संपत्तियों (जमीन या अन्य परिसंपत्तियों) की खरीद की गयी. सूत्रों का दावा है कि अरुण कुमार सिंह ने जांच टीम को कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां दी हैं.
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डिजिटल फोरेंसिक और दस्तावेजों के आधार पर जांच शुरू
हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि एसीबी की ओर से की जानी बाकी है. इधर, एसीबी ने कार्रवाई तेज करते हुए डिजिटल फोरेंसिक और वित्तीय दस्तावेजों के आधार पर जांच के अगले चरण की शुरुआत कर दी है. इसी क्रम में जेएसबीसीएल के आइटी प्रबंधक अमर कुमार महतों को सात अगस्त को पूछताछ के लिए तलब किया गया है. उनसे ट्रैक एंड ट्रेस सिस्टम, डिजिटल निगरानी व्यवस्था, सिस्टम लॉग और शराब आपूर्ति की डिजिटल ट्रैकिंग से जुड़े तकनीकी पहलुओं पर पूछताछ को जायेगी. वहीं, पहले जारी समन का पालन नाहीं करनेवाले प्लेसमेंट हेल्थकेयर एंड रिसर्च सेंटर प्रालि के संयुक्त सहायक निदेशक विकास अग्रवाल तथा ए-टू-जेड इंफ्रा सर्विसेज लिमिटेड के निदेशक मनोज तिवारी और अरुण गौर को 10 अगस्त को दोबारा पूछताछ के लिए बुलाया गया है. एसीबी के अनुसार दस्तावेजों, वित्तीय अभिलेखों, डिजिटल साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर सभी संबंधित लोगों से विस्तृत पूछताछ की जायेगी.
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