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खाकी और हुकूमत पर रौब जमाने वाला फर्जी 'अंडर सेक्रेटरी' गिरफ्तार, कार से मिले चौकाने वाले दस्तावेज

INT News23 September 2026 at 10:35 pm

रांची. झारखंड की नौकरशाही और पुलिस महकमे के गलियारों में खुद को गृह विभाग का ''अंडर सेक्रेटरी'' और स्पेशल ब्रांच का ''डीएसपी'' बताकर रौब गांठने वाले एक शातिर बहरूपिये का खेल मंगलवार की शाम आखिरकार खत्म हो गया. पिठोरिया थाना पुलिस ने लालपुर स्थित अमरावती अपार्टमेंट निवासी 52 वर्षीय अरुण कुमार अग्रवाल को गिरफ्तार कर उसके तिलिस्म को ध्वस्त कर दिया है. आरोपी के पास से वीआईपी पास लगी ब्रेजा कार, आईफोन और गृह विभाग के कई अति-संवेदनशील गोपनीय दस्तावेज जब्त किए गए हैं. पिठोरिया थाना प्रभारी सतीश कुमार के बयान पर कांड संख्या 97/2026 दर्ज करते हुए आरोपी के खिलाफ बीएनएस और शासकीय गुप्त बात अधिनियम (ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट) की धारा 3, 5 व 6 के तहत कार्रवाई की गई है.

धौंस और फर्जीवाड़े का पूरा ताना-बाना

कहानी की शुरुआत करीब एक साल पहले हुई, जब पिठोरिया थाना प्रभारी के फोन पर अक्सर एक नंबर से कॉल आने लगी. कॉलर खुद को गृह विभाग का अवर सचिव ‘अजय कुमार’ बताता था. वह धौंस जमाता था कि उसी ने डीजीपी और गृह सचिव से कहकर उनकी पोस्टिंग कराई है. इसी प्रभाव की आड़ में वह छोटे-मोटे अवैध काम कराने और अपने घर उपहार भिजवाने का दबाव बनाता था. 21 सितंबर को आरोपी ने चंदवे स्थित अपने आवास के बाहर हंगामे की सूचना देकर पुलिस को बुलाया. वहां पहुंचते ही उसने थाना प्रभारी को धमकाते हुए कहा "क्या सतीश तुमको नौकरी नहीं करनी है? मुझे हल्के में मत लो."

कार का स्टीकर बना शक की वजह

घटनास्थल पर थाना प्रभारी की नजर आरोपी की सिल्वर-ब्लैक ब्रेजा कार (जेएच 01 एफएन-3100) पर पड़ी. डैशबोर्ड पर पुलिस का लाल-नीला बोर्ड, विंडशील्ड पर गृह विभाग का तिकोना वीआईपी पास और विधानसभा के फर्जी स्टीकर चिपके थे. शक गहराने पर पुलिस ने 22 सितंबर को उसे कागजात लेकर थाने बुलाया. थाने पहुंचते ही जब उससे गृह विभाग का आधिकारिक आई-कार्ड मांगा गया, तो वह सकपका गया. क्रॉस वेरिफिकेशन में गृह विभाग ने साफ कर दिया कि इस नाम का कोई अफसर वहां नहीं है. मुख्यालय डीएसपी अमर कुमार पाण्डेय ने भी पुष्टि की कि यही व्यक्ति उन्हें भी फोन पर प्रभाव में लेने की कोशिश करता रहा था.

कड़ाई से पूछताछ में खुली पोल

पुलिस की सख्ती के आगे जालसाज टूट गया और उसने अपनी असली पहचान अरुण कुमार अग्रवाल के रूप में कबूल की. उसने बताया कि फर्जी पहचान और वीआईपी पास की बदौलत वह बिना रोक-टोक प्रोजेक्ट भवन और मंत्रालयों में दाखिल होता था, जहां से गोपनीय फाइलें और कागजात उड़ा लेता था. इसके बाद वह अफसरों को मनचाही पोस्टिंग और विभागीय जांच रफा-दफा कराने के नाम पर झांसा देकर ठगी करता था.

तलाशी के दौरान आरोपी की गाड़ी से स्पेशल ब्रांच के डीएसपी और गृह विभाग के अवर सचिव के 4 फर्जी आईडी, राजभवन व मंत्रालयों के 10 वीआईपी कार पास, पूर्व नौकरशाहों व विधायकों के सादे लेटरहेड बरामद हुए. इनमें पूर्व सचिव अमित खरे (मानव संसाधन विकास विभाग), विधायक गीताश्री उरांव, डॉ. देवनिश खेश, डॉ. दीपक गुप्ता और सेंट जेवियर्स कॉलेज रांची का सादा लेटरहेड शामिल हैं. सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि उसके पास से नक्सलियों पर इनाम घोषणा, इंस्पेक्टर से डीएसपी प्रमोशन की डीजीपी बोर्ड बैठक का 19 पन्नों का गोपनीय कार्यवृत्त और आईपीएस कैडर प्रमोशन से जुड़े अति-संवेदनशील दस्तावेज बरामद हुए हैं. पुलिस अब यह पता लगा रही है कि मंत्रालयों के भीतर इस जालसाज के मददगार कौन-कौन थे. जांच हुई तो यह भी पता चला कि उसने डीएसपी अमर कुमार पांडेय को भी फोन किया था, स्वयं को अधिकारी बताकर प्रभावित करने की कोशिष की थी.