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रेवाड़ी विधायक ने 386 दिन बाद लौटाया डबल न्योता:बोले- मुझे नहीं मिला निमंत्रण; राव बोले- बाबूओं ने बिगाड़ा था CM का कार्यक्रम
रेवाड़ी भाजपा में एक साल पहले शुरू हुआ था। बावल रैली से पहले पिछले साल 15 अगस्त को ऐसी ही पटकथा लिखी गई थी। राव तुलाराम स्टेडियम में 15 जून को रेवाड़ी विधानसभा की रैली हुई थी। जिसमें राव इंद्रजीत सिंह तो पहुंचे थे, परंतु उनके समर्थक पार्टी पदाधिकारियों और सरकार में महत्वपूर्ण पदों पर बैठे समर्थक नजर नहीं आए थे। पार्टी ने तब इस पर संज्ञान नहीं लिया, परंतु विधायक को यह बात याद थी। 30 जून को बावल रैली में सांसद- विधायकों के साथ संगठन और सरकार में महत्वपूर्ण पदों पर बैठे लोगों ने दूरी बनाई तो सुर्खियां बन गई। 6 जुलाई को विधायक ने अपनी पिछले साल 15 जून की रैली के साथ बावल में सीएम के कार्यक्रम के बहिष्कार का न्यौता एक ही बार में डबल करके लौटा दिया। सोमवार को धारूहेड़ा पहुंचें राव इंद्रजीत सिंह ने जिस प्रकार से निमंत्रण नहीं मिलने की बात कहकर अपनी और बावल विधायक की अनुपस्थिति का जायज ठहराया। विधायक ने कहा कि एक तो उन्हें संगठन और प्रशासन की तरफ से शपथ ग्रहण कार्यक्रम का विधिवत न्यौता नहीं मिला था। दूसरा उनकी तबीयत भी ठीक नहीं थी। हलके में पत्थरों से विधायक गायब रेवाड़ी विधानसभा के गांवों में एक जुलाई को जिला परिषद के कई विकास कार्यों का उद्घाटन एवं शिलान्यास हुआ। जिसके लिए तैयार किए गए शिलान्यास और उद्घाटन पत्थरों में स्थानीय सांसद और महेंद्रगढ़ की अटेली की विधायक आरती राव का नाम मोटे अक्षरों में अंकित दिखा। सरकारी ग्रांट से हुए कार्यों के पत्थरों से स्थानीय विधायक लक्ष्मण सिंह का नाम गायब दिखा। गांव ततारपुर इस्तमुरार में लगे पत्थर पर राव इंद्रजीत सिंह और आरती राव के साथ जिला प्रमुख मनोज यादव, उपप्रमुख नीलम अनिल रायपुर, पार्षद सुनीता रणधीर सिंह, बीडीपीओ सुरजीत सिंह, ग्राम सचिव श्रीभगवान यादव और सरपंच सूबेदार रामचंद्र का नाम लिखा हुआ है, परंतु स्थानीय विधायक को जगह नहीं मिल पाई। जिससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवालों के घेरे में है। रेवाड़ी रैली से बनाई थी दूरी पिछले साल 15 जून को राव तुलाराम स्टेडियम में विधानसभा स्तरीय रैली हुई थी। जिसमें सांसद एवं केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने मुख्यमंत्री के साथ मंच साझा किया था। बताया जाता है कि इस रैली में पार्टी संगठन के अधिकतर पदाधिकारी और सरकार में महत्वपूर्ण पदों पर बैठे लोग नहीं पहुंचें थे। जिसे तब संगठन और नेतृत्व ने नजरअंदाज कर दिया। जब 30 जून को बावल में आयोजित मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में करीब एक साल पुरानी कहानी दोहराई गई तो बावल हो गया। स्थानीय विधायक डॉ. कृष्ण कुमार की गैरमौजूदगी सबसे अधिक चर्चा का विषय बनी। विवाद बढ़ा तो पार्टी के जिला महामंत्री ने 5 मंडल अध्यक्षों को नोटिस जबाव मांगने के लिए विवश होना पड़ा। 4 धड़ों में बटी रेवाड़ी भाजपा रेवाड़ी विशेषकर अहीरवाल में शुरू से ही रामपुरा और बूढ़पुर हाउस में राजनीतिक तनातनी बनी रही है। राव बीरेंद्र सिंह और राव मोहर सिंह के समय से चली आ रही राजनीतिक लड़ाई का नेतृत्व पिछले करीब 4 दशक से राव इंद्रजीत सिंह और राव नरबीर सिंह कर रहे हैं। 2014 से दोनों भाजपा में होते हुए भी मौका मिलने पर एक दूसरे के खिलाफ बोलने का कोई मौका नहीं चूकते। 2014 के बाद से धीरे-धीरे रामपुरा हाउस में पार्टी का पॉवर सेंटर शिफ्ट होने लगा। दो दिग्गजों की लड़ाई में अपनी अनदेखी से आहत संगठन से जुड़े पुराने कार्यकर्ता अपनी अनदेखी से आहत होकर घर बैठने लगे। जिससे पार्टी तीन धड़ों में बंट गई। धारूहेड़ा में शपथ ग्रहण के बाद विधायक की मंच से दूरी ने पार्टी में अब एक और नया मोर्चा खोल दिया। विधायक बोले- निमंत्रण नहीं था विधायक लक्ष्मण सिंह यादव ने कहा कि वह पिछले कई दिन से गुजरात में थे। जिस कारण उनका स्वास्थ्य पूरी तरह से ठीक नहीं है। जहां तक धारूहेड़ा के शपथ ग्रहण का प्रशासन और संगठन की तरफ से उन्हें कोई अधिकारिक न्यौता नहीं मिला। हां यदि तबीयत ठीक होती तो शायद बिना निमंत्रण के भी कार्यक्रम में चले जाते। मैं संगठन से जुड़ा कार्यकर्ता हूं और पार्टीहित हमेशा सर्वोपरि रहा है।