देश में मानसून की एंट्री लेट हो गई है। मौसम विभाग ने शुक्रवार को बताया कि श्रीलंका में कम दबाव वाली तूफानी हवाओं के चलते मानसून 7 दिन बाद ही केरलम के तट पर पहुंच सकेगा। केरलम के तट पर मानसून पहुंचने की सामान्य तारीख 1 जून मानी जाती है। इससे पहले मौसम विभाग ने 26 मई तक ही मानसून आने का अनुमान जताया था। इस तरह पिछले अनुमान से मानसून करीब 10 दिन बाद देश में एंट्री करेगा। इस साल बारिश भी सामान्य से कम होगी। मौसम विभाग ने 29 मई को बताया गया कि इस बार देश में औसतन 78 सेंटीमीटर ही बारिश हो सकती है। 1971-2020 के आंकड़ों के आधार पर देश में औसत बारिश 87 सेंटीमीटर मानी जाती है। इससे पहले मौसम विभाग ने 13 अप्रैल को 80 सेंटीमीटर बारिश का अनुमान लगाया था। IMD के मुताबिक जून-जुलाई में भी उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, बिहार, ओडिशा, छत्तीसगढ़, गुजरात और आंध्र प्रदेश में हीटवेव चलने की संभावना है। आमतौर पर उस वक्त तापमान 30-35 डिग्री तक रहता है। इस बार 3 डिग्री ज्यादा टेंपरेचर रहेगा। जून में एमपी, यूपी, बिहार में कम बारिश मौसम विभाग ने बताया कि जून में मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड में सामान्य से भी कम बारिश होगी। वहीं महाराष्ट्र, राजस्थान और गुजरात के कुछ हिस्सों में सामान्य बारिश का अनुमान है। जहां खेती पानी पर निर्भर, वहां कम बारिश होगी मौसम विभाग ने बताया कि इस साल मानसून के कोर जोन में कम बारिश होगी। मानसून कोर जोन भारत का वह इलाका है जहां खेती सबसे ज्यादा मानसून की बारिश पर निर्भर करती है। यानी अगर बारिश अच्छी हुई या खराब हुई तो इसका सीधा असर फसलों, किसानों और खाद्य उत्पादन पर पड़ता है। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र का विदर्भ, झारखंड, ओडिशा, तेलंगाना, कुछ हिस्से उत्तर प्रदेश और बिहार के इलाके आते हैं। मानसून 5 दिन से अटका, 7 जून तक आ सकता है केरल में मानसून की दस्तक को लेकर मौसम विभाग का पूर्वानुमान गलत साबित हुआ है। मानसून केरल के तट से 30-35 किमी दूर 5 दिन से अटका है और अगले दो-तीन दिन इसके आगे बढ़ने के आसार नहीं हैं। मौसम विभाग ने 15 मई को कहा था कि केरल में सामान्य तारीख (एक जून) से 5 दिन पहले 26 मई को मानसून दस्तक देगा। हालांकि अब IMD के डिप्टी डायरेक्टर जनरल डॉ. एम. मोहापात्रा ने कहा कि मानसून अगले 7 दिनों में केरल आ सकता है। पिछले साल 8 दिन पहले आया था मानसून पिछले साल मानसून तय समय से 8 दिन पहले यानी 24 मई को ही केरल पहुंच गया था। मानसून केरल से आगे बढ़ते हुए महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में आमतौर पर मध्य जून तक पहुंचता है। 11 जून तक मुंबई और 8 जुलाई तक पूरे देश में फैल जाता है। इसकी वापसी उत्तर-पश्चिम भारत से 17 सितंबर को शुरू होती है और यह पूरी तरह 15 अक्टूबर तक लौट जाता है। अल नीनो इफेक्ट की वजह से मानसून में देरी हो सकती है। हालांकि सीजन के आखिर में थोड़ी राहत मिल सकती है। IMD के आंकड़ों के मुताबिक, बीते 150 साल में मानसून के केरल पहुंचने की तारीखें अलग-अलग रही हैं। 1918 में मानसून सबसे पहले 11 मई को केरल पहुंच गया था, जबकि 1972 में सबसे देरी से 18 जून को केरल पहुंचा था। अल-नीनो के चलते मानसून कमजोर पड़ेगा मौसम विभाग ने कहा कि कमजोर मानसून के पीछे की वजह अल-नीनो है। जून में अल नीनो का असर दिख सकता है। जुलाई और अगस्त में भी कमजोर से मध्यम स्तर का अल नीनो बने रहने की संभावना है। अल नीनो के कारण समुद्र का पानी असमान्य रूप से गर्म हो जाता है, जिसके साथ हवा के पैटर्न में भी बदलाव आता है। इसके असर से दुनियाभर में बारिश का चक्र बिगड़ जाता है। कहीं भयंकर सूखा तो कहीं मूसलाधार बारिश और बाढ़ आती है। सीधे शब्दों में कहें तो जब अल-नीनो एक्टिव होगा, तब प्रशांत महासागर से भारत की तरफ आने वाली मानसूनी हवाओं को रोक देगा। इससे बारिश पर असर पड़ेगा। कमजोर मानसून, कम बारिश का आम आदमी पर असर… ——————– ये खबर भी पढ़ें… बिहार में भारी बारिश, 20 जिलों में दिन में अंधेरा, यूपी में 100 kmph का तूफान बिहार में शुक्रवार को आंधी और बारिश का अलर्ट जारी किया है। पटना, खगड़िया,रोहतास, औरंगाबाद, कैमूर, छपरा समेत 20 जिलों में सुबह पहले अंधेरा छा गया फिर तेज बारिश हुई। काले बादलों की वजह से गाड़ियों की लाइट जलाकर लोग सफर करते देखे गए। पूरी खबर पढ़ें…
मानसून 7 दिन बाद केरलम पहुंचेगा:तूफानी हवाओं ने श्रीलंका में रोका; 10% कम बारिश का अनुमान, जून-जुलाई में भी हीटवेव चलेगी
