समाचार · मध्य प्रदेश
कटनी में हाईवे सुरक्षा चौकी पर 1 साल से ताला:भवन में टूटे कांच और उगी झाड़ियां; ब्लैक स्पॉट पर हादसों का खतरा
कटनी के जुहला बायपास पर राष्ट्रीय राजमार्ग-43 स्थित हाईवे सुरक्षा चौकी पिछले करीब एक साल से बंद पड़ी है। लाखों रुपए की लागत से बनाई गई इस चौकी का उद्देश्य हादसों पर तत्काल पुलिस सहायता उपलब्ध कराना, तेज रफ्तार और ओवरलोड वाहनों की जांच करना तथा हाईवे पर निगरानी रखना था। अब चौकी के मुख्य द्वार पर ताला लगा है और देखरेख के अभाव में भवन जर्जर होने लगा है। जुहला बायपास का सुरखी मोड़ दुर्घटना संभावित क्षेत्र माना जाता है। शहडोल और उमरिया को जोड़ने वाले इस मार्ग पर भारी वाहनों की आवाजाही रहती है। इसी को देखते हुए तत्कालीन पुलिस अधीक्षक अभिजीत रंजन की पहल पर यहां हाईवे सुरक्षा चौकी शुरू की गई थी। शुरुआत में बढ़ी थी पुलिस की सक्रियता चौकी शुरू होने के बाद यहां पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी। इसका उद्देश्य संदिग्ध वाहनों पर नजर रखने, तेज रफ्तार और ओवरलोड वाहनों की जांच करने तथा हादसे की स्थिति में घायलों को तत्काल मदद पहुंचाना था। स्थानीय लोगों के अनुसार, चौकी संचालित रहने के दौरान हाईवे पर पुलिस की मौजूदगी भी दिखाई देती थी। कर्मियों पर अवैध वसूली के आरोप शुरुआती अवधि के बाद चौकी पर तैनात कुछ पुलिसकर्मियों पर भारी और व्यावसायिक वाहनों से कथित अवैध वसूली की शिकायतें सामने आईं। शिकायतों के बाद विभाग ने कुछ पुलिसकर्मियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की। इसके बाद चौकी की गतिविधियां सीमित होती गईं और आखिरकार इसका संचालन बंद कर दिया गया। 'गोल्डन आवर' में मदद मिलने पर सवाल चौकी बंद होने के बाद हादसे की स्थिति में मौके पर तत्काल पुलिस सहायता मिलने में देरी की आशंका है। दुर्घटना के बाद का पहला एक घंटा गंभीर घायलों के इलाज के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में सुरखी मोड़ जैसे संवेदनशील स्थान पर स्थायी पुलिस मौजूदगी नहीं होने से स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ गई है। चौकी दोबारा शुरू करने की मांग एक साल से बंद पड़े चौकी भवन की देखरेख नहीं होने से खिड़कियों के कांच टूट गए हैं। परिसर में गाजरघास और झाड़ियां उग आई हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी भवन का इस तरह अनुपयोगी पड़ा रहना भी चिंता का विषय है। क्षेत्रीय नागरिकों और राहगीरों ने पुलिस प्रशासन एवं जिला प्रशासन से हाईवे सुरक्षा चौकी को दोबारा शुरू करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि नियमित पुलिस बल उपलब्ध नहीं है तो यहां ट्रैफिक पुलिस या सीमित बल की तैनाती की जा सकती है। इससे हादसों की स्थिति में तत्काल मदद मिलने के साथ हाईवे पर निगरानी भी बढ़ेगी।