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SIR पर घमासान के बीच चुनाव आयोग का दावा, फरवरी 2025 से किसी फैसले पर नहीं हुआ EC में मतभेद

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेद की खबरों के बीच आयोग के सूत्रों ने बड़ा दावा किया है. इंडिया टुडे के मुताबिक यह दावा मतदाता सूची के SIR को लेकर आयोग के भीतर कथित मतभेदों की खबरों के बीच आया है. 19 फरवरी 2025 के बाद से तीन सदस्यीय चुनाव आयोग ने अब तक लिए गए सभी फैसले सर्वसम्मति से किए हैं और किसी भी चुनाव आयुक्त ने किसी निर्णय पर असहमति दर्ज नहीं करायी है.
14 बार आपत्ति दर्ज कराने की रिपोर्ट से उठा विवाद
चुनाव आयोग का यह बयान उस रिपोर्ट के करीब एक सप्ताह बाद आया है, जिसमें दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीने की अवधि में SIR से जुड़े फैसलों और आदेशों पर 14 बार औपचारिक आपत्ति दर्ज करायी थी. इन कथित आपत्तियों में चुनावी डेटा प्लेटफॉर्म ECINet के केंद्रीकरण, फॉर्म-6 में बदलाव और मतदाता सूची से नाम हटाने से जुड़े फैसले शामिल बताए गए थे.
आयोग ने SIR को बताया वैधानिक प्रक्रिया
चुनाव आयोग के सूत्रों ने SIR को मतदाता सूची के पुनरीक्षण की वैधानिक और स्थापित प्रक्रिया बताया है. आयोग के मुताबिक इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य मृत, डुप्लीकेट, फर्जी और स्थानांतरित मतदाताओं की पहचान करना है, ताकि पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में बने रहें.
फॉर्म 6 को लेकर भी आयोग ने दी सफाई
नए मतदाताओं के नाम जोड़ने या मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज कराने के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म 6 को लेकर उठे सवालों पर भी आयोग के सूत्रों ने स्थिति स्पष्ट की. उनका कहना है कि इस फॉर्म में कोई बदलाव नहीं किया गया है.
सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही का भी दिया हवाला
SIR की कानूनी वैधता और उस पर जारी विवाद के बीच आयोग के सूत्रों ने सुप्रीम कोर्ट में हुई कार्यवाही का भी हवाला दिया. सूत्रों के मुताबिक, अदालत ने SIR की प्रक्रिया को निलंबित नहीं किया है. मतदाता घोषणा और मैपिंग की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की अनुमति दी गयी, हालांकि मतदाताओं के हितों की सुरक्षा के लिए कुछ उपाय भी किए गए.
करीब 25 हजार अधिकारियों को लेकर भी आयोग का दावा
चुनाव आयोग के सूत्रों ने दावा किया कि SIR की प्रक्रिया में शामिल करीब 25,000 मतदाता पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) और सहायक मतदाता पंजीकरण अधिकारी (AEROs) में से किसी ने भी इस प्रक्रिया को लेकर शिकायत नहीं की है. आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया विकेंद्रीकृत तरीके से ERO और AERO स्तर पर होती है.
बूथ लेवल अधिकारियों को लेकर क्या कहा गया
सूत्रों के मुताबिक, बूथ लेवल अधिकारी (BLOs) को मतदाताओं के घर जाकर सत्यापन करने के लिए प्रशिक्षित किया गया है. ऐसे मामलों में भी जहां मतदाता घर पर मौजूद नहीं है या स्थान बदल चुका है, BLO को कम से कम तीन बार घर जाने के निर्देश दिए गए हैं.
गोवा के 97 मतदाताओं के नाम का मामला
गोवा में 97 मतदाताओं के नाम अंतिम मतदाता सूची में शुरुआती तौर पर शामिल नहीं होने के मामले पर आयोग के सूत्रों ने इसे तकनीकी गड़बड़ी बताया. इनमें से 88 नाम बाद में जोड़ दिए गए, जबकि तीन लोगों के पुर्तगाली नागरिक होने और छह लोगों के उस समय विदेश में होने की जानकारी दी गयी. बाकी मामलों का सत्यापन जारी बताया गया है.
बेला एस्टेट में मतदाता नाम हटाने पर भी सफाई
कांग्रेस नेता राहुल गांधी की ओर से बेला एस्टेट में कथित तौर पर 727 मतदाताओं के नाम हटाए जाने का मुद्दा उठाया गया था. आयोग के सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली में नए नाम जोड़ने की प्रक्रिया अभी जारी है. सूत्रों ने कहा कि BLO जब बेला एस्टेट पहुंचे तो वहां कोई मौजूद नहीं था, ऐसे में हस्ताक्षर या सत्यापन किससे कराया जाता, यह सवाल सामने आया.
SIR पर राजनीतिक बहस के बीच आयोग का रुख
SIR को लेकर विपक्षी दलों की ओर से चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए जा रहे हैं. दूसरी ओर आयोग लगातार यह कह रहा है कि प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक बनाना है. ऐसे में आयोग के भीतर कथित असहमति और SIR की प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक व सार्वजनिक बहस आगे भी जारी रहने की संभावना है.
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