Friday, 2 October 2026
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कमलजीत के मां ने बनाया है स्पेशल खीर-चूरमा:माता-पिता के कमलजीत को गोद में लेकर निकल आए थे आंसू

INT News2 October 2026 at 02:04 am

एशियाई गोल्ड मेडल जीतकर लौट रहे कमलजीत यादव का शुक्रवार को जिले में भव्य स्वागत होगा। जब कमलजीत एयरपोर्ट पहुंचे तो बेटे को देखकर माता-पिता की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। माता-पिता ने कमलजीत को गोद में उठा लिया। बेटे को गोद में लेकर मां की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। अब शुक्रवार को अपने बेटे के स्वागत के लिए पूरा रेवाड़ी तैयार है। कमलजीत सुबह करीब 8 बजे राव तुलाराम स्टेडियम पहुंचेंगे, जहां जिले के लोग और खेल प्रेमी उनका भव्य स्वागत करेंगे। स्टेडियम के बाद धामलावास चुंगी, बस स्टैंड, बड़ा मोड़ सहित रास्ते में कई स्थानों पर कमलजीत का स्वागत किया जाएगा। इसके बाद वे अपने गांव पहुंचेंगे। गांव के हाई स्कूल में परिवार की ओर से सम्मान समारोह आयोजित किया गया है। कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह, सांसद चौधरी धर्मवीर सिंह सहित अन्य नेता और गणमान्य लोग शामिल होंगे। कार्यक्रम को लेकर गांव में बड़े स्तर पर तैयारियां की गई हैं। हाई स्कूल परिसर में करीब 2 हजार कुर्सियां लगाई गई हैं। करीब 1.25 एकड़ क्षेत्र में टेंट लगाया गया है। कार्यक्रम के लिए 15×30 फीट के दो मंच बनाए गए है मां ने बेटे के लिए बनाया चूरमा-खीर गोल्ड मेडल जीतकर घर लौट रहे बेटे के लिए मां ने भी खास तैयारी की है। कमलजीत की मां ने अपने हाथों से उसके लिए देसी घी का चूरमा और खीर तैयार की है। बेटे के घर लौटने की खुशी परिवार के साथ पूरे गांव में भी देखने को मिल रही है। हादसे के 20 दिन बाद ही दिया ट्रायल

2019 में रेवाड़ी कोचिंग के लिए जाते समय कमलजीत सड़क हादसे में घायल हो गए थे। पैर टूटने के बावजूद उन्होंने निशानेबाजी नहीं छोड़ी। हादसे के महज 20 दिन बाद ट्रायल देकर सफल हुए। एथलीट बनने का सपना टूटा, निशानेबाजी ने बदली राह

कमलजीत का सपना एथलीट बनने का था, लेकिन 2019 के हादसे के बाद एथलेटिक्स का सफर रुक गया। चाचा शक्ति पाल ने उन्हें निशानेबाजी के लिए प्रेरित किया। इसके बाद राज्य स्तर से जूनियर विश्व चैंपियनशिप और विश्व कप तक पहुंचे। इलाज और खेल खर्च के लिए परिवार ने लिया कर्ज

हादसे के इलाज के साथ निशानेबाजी के उपकरण, प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं का खर्च भी परिवार पर आया। आर्थिक स्थिति सीमित होने के बावजूद परिवार ने बेटे का साथ दिया और जरूरत पड़ने पर कर्ज लेकर खर्च उठाया। महंगा खेल, छोड़ने तक का मन बना लिया था

शूटिंग के प्रशिक्षण, उपकरण और प्रतियोगिताओं पर होने वाले खर्च के कारण एक समय कमलजीत ने यह खेल छोड़ने का मन बना लिया था। परिवार और कोच के सहयोग से उन्होंने अभ्यास जारी रखा और आज एशियन गोल्ड तक पहुंचे। 5 एकड़ जमीन और फैक्ट्री की नौकरी से परिवार

कमलजीत के पिता रतीराम फैक्ट्री में काम करते हैं। परिवार के पास करीब 5 एकड़ खेती की जमीन भी है। सीमित संसाधनों के बावजूद परिवार ने बेटे के खेल करियर के लिए लगातार आर्थिक सहयोग किया