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ATF में Ethanol Blending की चर्चा गलत, सरकार ने कहा- अफवाहों से बचें

सोशल मीडिया पर हाल के दिनों में यह दावा किया जा रहा था कि सरकार प्लेन में इस्तेमाल होने वाले Aviation Turbine Fuel (ATF) में Ethanol मिलाने की तैयारी कर रही है. अब केंद्र सरकार ने इन दावों को पूरी तरह गलत बताया है. नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू किंजरापु ने साफ कहा कि सरकार ने न तो ऐसा कोई प्रस्ताव रखा है और न ही इस पर विचार किया है.
उन्होंने कहा कि विमानन सुरक्षा से जुड़े ऐसे भ्रामक दावे यात्रियों के बीच बेवजह डर और भ्रम पैदा कर सकते हैं. सरकार के मुताबिक, ATF में Ethanol मिलाने की कोई योजना नहीं है.
आखिर सरकार को सफाई क्यों देनी पड़ी?
सरकार की यह प्रतिक्रिया सोशल मीडिया और कुछ अन्य मंचों पर फैल रही उन खबरों के बाद आई, जिनमें दावा किया गया था कि ATF में एथेनॉल ब्लेंडिंग शुरू की जा सकती है. मंत्री ने कहा कि ऐसी जानकारी तथ्यात्मक रूप से गलत है और इसका किसी सरकारी नीति या प्रस्ताव से कोई संबंध नहीं है. उन्होंने लोगों से अपील की कि विमानन जैसे संवेदनशील विषयों पर केवल आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें.
Ethanol और SAF में क्या फर्क है?
राम मोहन नायडू ने कहा कि Ethanol और Sustainable Aviation Fuel (SAF) को एक जैसा समझना गलत है. दोनों अलग-अलग फ्यूल हैं और इनके इस्तेमाल का उद्देश्य भी अलग है.
Ethanol का इस्तेमाल सड़क परिवहन क्षेत्र में पेट्रोल के साथ ब्लेंडिंग के लिए किया जाता है.
मौजूदा नियमों के तहत Aviation Turbine Fuel (ATF) में Ethanol की कोई भूमिका नहीं है.
SAF एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त विमानन ईंधन है, जिसे तय सुरक्षा और तकनीकी मानकों के आधार पर प्रमाणित किया जाता है.
SAF को इस्तेमाल से पहले कैसे मिलती है मंजूरी?
सरकार के मुताबिक, किसी भी विमान में SAF के इस्तेमाल से पहले उसे कई चरणों की टेस्टिंग और सर्टिफिकेशन प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है. यह सुनिश्चित किया जाता है कि ईंधन सुरक्षा, प्रदर्शन और संचालन से जुड़े सभी अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरा उतरता हो.
मंत्री ने बताया कि SAF को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त मानकों के तहत प्रमाणित किया जाता है और इसे International Civil Aviation Organisation (ICAO) का समर्थन भी प्राप्त है.
यात्रियों के लिए सरकार का क्या संदेश है?
नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने दोहराया कि यात्रियों की सुरक्षा सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है. विमानन ईंधन से जुड़े सभी फैसले अंतरराष्ट्रीय तकनीकी और सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखकर ही लिए जाते हैं.
सरकार ने लोगों से अपील की है कि ऐसी अफवाहों पर भरोसा न करें और केवल आधिकारिक स्रोतों से जारी जानकारी को ही सही मानें. मंत्रालय का कहना है कि विमानन सुरक्षा जैसे विषयों पर फैलाई गई गलत जानकारी यात्रियों में बेवजह चिंता और भ्रम पैदा कर सकती है.
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