Friday, 25 September 2026
INTइंडियन न्यूज़ ट्रस्टजहाँ सत्य मिले विश्वास से
ताज़ा खबरें

समाचार · गुजरात

लार की नली में एक-दो नहीं, 10 पथरियां! भारत में दुर्लभ चिकित्सकीय मामला, राजकोट के 18 साल के युवक के मुंह के रास्ते निकाली, बाहर से नहीं लगाया कोई चीरा

INT News24 September 2026 at 11:06 pm

राजकोट. शहर में लार की नली में एक साथ 10 पथरियां मिलने का भारत में दुर्लभ चिकित्सकीय मामला सामने आया। शहर के 18 साल के युवक केविन की बाईं ओर की लार की नली से 4 सेन्टीमीटर लंबी 10 पथरियां सफलतापूर्वक निकाली गई। खास बात यह रही कि पूरी प्रक्रिया मुंह के अंदर से की गई। बाहर की त्वचा पर कोई चीरा या दिखाई देने वाला निशान नहीं पड़ा और लार ग्रंथि को भी सुरक्षित रखा गया। एक महीने से दर्द और सूजन की शिकायत केविन को करीब एक महीने से मुंह के अंदर, खासकर भोजन करते समय, जीभ के नीचे दर्द और बाईं ओर जबड़े के नीचे सूजन की शिकायत थी। उसने परिजनों के साथ शहर के कान, नाक एवं गला (ईएनटी) तथा सिर-गर्दन के विशेषज्ञ सर्जन डॉ. हिमांशु ठक्कर से मुलाकात की। डॉ. ठक्कर को जांच के दौरान सोनोग्राफी में बाईं ओर की सबमैंडिब्युलर लार प्रणाली में कई पथरियां दिखाई दीं। इसके बाद सर्जरी का निर्णय लिया गया। डॉ. ठक्कर ने 14 सितंबर को संकरी लार की नली में फंसी सभी 10 पथरियों को मुंह के रास्ते एंडोस्कॉपी के जरिए निकाल दिया। सर्जरी के दौरान बाहर से कोई चीरा नहीं लगाया गया और लार ग्रंथि को संरक्षित रखा गया। एक ही नली में 10 पथरियां असामान्य लार की ग्रंथि या उसकी नली में खनिज तत्व जमा होकर कठोर पथरी बनने की स्थिति को सियालोलिथियासिस यानी लार की पथरी की बीमारी कहा जाता है। सबमैंडिब्युलर ग्रंथि यानी जबड़े के नीचे स्थित लार बनाने वाली ग्रंथि में ऐसी पथरियां अन्य प्रमुख लार ग्रंथियों की तुलना में अधिक देखी जाती हैं, लेकिन एक ही नली में बड़ी संख्या में पथरियां मिलना अपेक्षाकृत असामान्य है। इस मामले में एक ही मरीज की एक ही लार नली से 10 पथरियां निकाली गईं और ग्रंथि को बचाया गया। सर्जरी के बाद मरीज की स्थिति अच्छी बताई गई और उसे उसी शाम अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। डॉ. ठक्कर ने जबड़े के नीचे बार-बार होने वाली सूजन, दर्द या विशेष रूप से भोजन करते समय बार-बार होने वाले दर्द को नजरअंदाज न करने की सलाह दी। लार की नली में रुकावट के कारण ऐसी समस्या हो सकती है। समय पर निदान और उचित उपचार से जटिलताओं को रोका जा सकता है।