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आयुर्वेद अब बैसाखियों पर नहीं, अपने दम पर खड़ा है:आरडी मेमोरियल ग्रुप के चेयरमैन हेमंत सिंह चौहान बोले- आयुर्वेद अब सिर्फ भारत तक सीमित नहीं
मेरी शुरुआत छात्र राजनीति से हुई और फिर लगा कि कुछ ऐसा किया जाए, जिससे समाज को लाभ मिले। शिक्षा और चिकित्सा के क्षेत्र में काम करते हुए मेरा विश्वास और मजबूत हुआ कि किसी भी संस्था की पहली इकाई अनुशासन होती है। मैं फौजी परिवार से हूं, इसलिए अनुशासन बचपन से मेरी जिंदगी का हिस्सा रहा है। आरडी मेमोरियल में शिक्षा के साथ संस्कार, सेवा भाव और समर्पण को भी उतना ही महत्व देता हूं। मेरा मानना है कि शिक्षक अनुशासित होगा तो छात्र भी उसका प्रतिबिंब बनेगा। आज आयुर्वेद को लेकर युवाओं की सोच तेजी से बदली है। लोग बीमारी का इलाज कराने के बजाय बीमार होने से पहले स्वस्थ रहने के तरीके तलाश रहे हैं और यह सोच उन्हें आयुर्वेद की ओर ले जा रही है। मुझे विश्वास है कि आयुर्वेद अब सिर्फ भारत तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी दुनिया में अपनी पहचान बनाएगा। एआई को मैं आयुर्वेद के लिए चुनौती नहीं, अवसर मानता हूं। नई तकनीक को समझकर पंचकर्म और आयुर्वेदिक चिकित्सा से जोड़ा जा सकता है। इससे कम समय में ज्यादा और सटीक काम किया जा सकेगा। मैं हमेशा कहता हूं कि आयुर्वेद में अब बैसाखियों की जरूरत नहीं है। वह खुद इतना सक्षम हो गया है कि किसी भी क्षेत्र में खड़े होकर अपना स्कोर अच्छा बना सकता है।