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बच्चों को तय खांचे में नहीं, अपनी उड़ान चुनने दें:जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी के प्रो-चांसलर अभिषेक मोहन गुप्ता बोले- हर बच्चे की अपनी क्षमता, रुचि और प्रतिभा
बच्चों के लिए सबसे जरूरी है कि हम उन्हें समझें और उनके करियर के रास्ते पहले से तय न करें। हर बच्चे की अपनी क्षमता, रुचि और प्रतिभा होती है। इसलिए छठवीं, सातवीं या आठवीं कक्षा से ही यह दबाव नहीं होना चाहिए कि उसे डॉक्टर या इंजीनियर ही बनना है। यह कहना है जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी के प्रो-चांसलर और प्रेसिडेंट, बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट, शूज़बरी इंटरनेशनल स्कूल इंडिया अभिषेक मोहन गुप्ता का। उन्होंने कहा कि आज हर क्षेत्र में अवसर हैं। स्पोर्ट्स, स्पोर्ट्स मैनेजमेंट, टेक्नोलॉजी, एडवरटाइजिंग, इवेंट्स और कई नए क्षेत्र लगातार सामने आ रहे हैं। बच्चों को अपनी रुचि और क्षमता के अनुसार इन क्षेत्रों को समझने और अवसरों को एक्सप्लोर करने की आजादी मिलनी चाहिए। गुप्ता ने कहा कि उनकी अपनी जिंदगी में भी एक बड़ा मोड़ आया। दसवीं तक वे क्रिकेट खेलते थे और अंडर-15 स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व भी किया। उस समय परिस्थितियों को देखते हुए परिवार ने उन्हें एकेडमिक और करियर की दिशा में आगे बढ़ने की सलाह दी। उस फैसले ने उनकी जिंदगी को एक नई दिशा दी। आज पीछे मुड़कर देखते हैं तो लगता है कि वह सही फैसला था। उन्होंने कहा कि बच्चों को अपना दिमाग खुला रखना चाहिए और अवसरों को एक्सप्लोर करना चाहिए। लेकिन एक बात हमेशा याद रखें कि मेहनत का कोई शॉर्टकट नहीं है। अपने किसी एक टैलेंट को पहचानिए, उसे लगातार निखारिए और पूरी ताकत से आगे बढ़ाइए। गुप्ता के मुताबिक, अवसर दरवाजे खटखटाते रहते हैं। जरूरत सिर्फ उन्हें पहचानने की है।