Thursday, 20 August 2026
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MP में 2025 टीचर भर्ती की दोबारा बनेगी मेरिट:हाईकोर्ट ने अपात्र अभ्यर्थियों की अपीलें खारिज कीं; 9693 ने गलत तरीके से लिए 5% बोनस अंक

INT News19 August 2026 at 10:47 pm

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने प्राथमिक शिक्षक चयन परीक्षा-2025 में 5% बोनस अंक के विवाद पर अभ्यर्थियों की सभी रिट अपीलें खारिज कर दीं। न्यायमूर्ति आनंद पाठक और न्यायमूर्ति बीपी शर्मा की खंडपीठ ने एकलपीठ के 6 मई 2026 के आदेश को सही ठहराया। कोर्ट ने कहा- RCI योग्यता के लिए गलत जानकारी देकर हासिल किए गए बोनस अंकों को वैध नहीं मांगा जा सकता। करीब 9,693 कैंडिडेट्स ने गलत तरीके से 5% बोनस अंक लिए थे। हाईकोर्ट के फैसले से 13,089 प्राथमिक शिक्षकों के पूर्व चयन पर फिर असर पड़ेगा। अब कर्मचारी चयन मंडल RCI प्रमाण-पत्रों का सत्यापन करेगा। अपात्र अभ्यर्थियों के आवेदन निरस्त किए जाएंगे। इसके बाद संशोधित मेरिट सूची तैयार कर नियुक्ति प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। मूल याचिका और रिट अपीलों में अधिवक्ता आलोक वागरेचा और अधिवक्ता विशाल बघेल ने पैरवी की। 14,964 अभ्यर्थियों ने RCI योग्यता बताकर बोनस अंक लिए प्राथमिक शिक्षक चयन परीक्षा-2025 में 13,089 पदों पर भर्ती हुई थी। नियम के अनुसार RCI से मान्यता प्राप्त विशेष शिक्षा डिप्लोमा वाले अभ्यर्थियों को 5% बोनस अंक मिलने थे। आरोप है कि करीब 14,964 अभ्यर्थियों ने RCI योग्यता बताकर बोनस अंक ले लिए, जबकि RCI के रिकॉर्ड में करीब 5,271 अभ्यर्थी ही योग्य थे। नरसिंहपुर की सोनम अगरैया और अन्य ने इसी मामले को हाईकोर्ट में चुनौती दी। 'हां' चुनने पर मिले बोनस अंक मामले में सामने आया कि ऑनलाइन फॉर्म में RCI योग्यता के सामने 'हां' चुनने पर ही बोनस अंक दे दिए गए थे। उस समय दस्तावेजों की जांच नहीं हुई थी। एकलपीठ ने कहा कि अभ्यर्थियों को अपनी जानकारी सुधारने के तीन मौके मिले थे। इसके बाद परिणाम आने पर 'गलती से हां चुनने' की बात स्वीकार नहीं की जा सकती। एकलपीठ ने क्या आदेश दिया था 6 मई 2026 को एकलपीठ ने चयन सूची कर्मचारी चयन मंडल को वापस भेजने का आदेश दिया था। मंडल को RCI योग्यता का दावा करने वाले अभ्यर्थियों के लिए 15 दिन का अतिरिक्त समय देना था। इस दौरान उन्हें RCI से मान्यता प्राप्त विशेष डीएलएड डिप्लोमा अपलोड करना था। दस्तावेजों की जांच के बाद जिन अभ्यर्थियों की योग्यता सही नहीं मिलती, उनके आवेदन निरस्त करने और तीन महीने में नई मेरिट लिस्ट बनाने के निर्देश दिए गए थे। अभ्यर्थियों ने क्या कहा प्रभावित अभ्यर्थियों ने डबल बेंच में कहा कि उनके पास RCI डिप्लोमा नहीं है और ऑनलाइन फॉर्म में 'हां' गलती से चुन लिया गया था। उन्होंने कहा कि बोनस अंक हटा दिए जाएं, लेकिन उनके वास्तविक अंकों के आधार पर उन्हें चयन प्रक्रिया में शामिल किया जाए। कुछ अभ्यर्थियों ने दिव्यांग श्रेणी का हवाला देकर राहत की मांग भी की। हाईकोर्ट ने क्या कहा डबल बेंच ने कहा कि अभ्यर्थियों को अपनी जानकारी सुधारने के तीन मौके मिले थे, लेकिन उन्होंने उस समय गलती नहीं सुधारी। कोर्ट ने माना कि परिणाम आने के बाद मेरिट में बने रहने की संभावना देखकर गलती का तर्क देना सही नहीं है। कोर्ट ने यह भी कहा कि गलत जानकारी देकर बोनस अंक हासिल करना धोखाधड़ी के जरिए लाभ लेना है। ऐसे लाभ को बाद में अपना अधिकार बताकर नहीं मांगा जा सकता। दूसरे अभ्यर्थियों की मेरिट भी प्रभावित होती कोर्ट ने माना कि इस स्तर पर भर्ती प्रक्रिया को फिर से बदलने से उन अभ्यर्थियों की मेरिट भी प्रभावित होगी, जिन्होंने आवेदन में सही जानकारी दी थी। इसलिए गलत जानकारी के आधार पर मिले बोनस अंकों का लाभ बनाए रखना उचित नहीं होगा। सभी अपीलें खारिज हाईकोर्ट की जबलपुर खंडपीठ ने एकलपीठ के 6 मई 2026 के आदेश में कोई कानूनी या तथ्यात्मक गलती नहीं पाई। इसके बाद प्रभावित अभ्यर्थियों की सभी रिट अपीलें खारिज कर दी गईं। अब RCI प्रमाण-पत्रों की जांच होगी। अपात्र अभ्यर्थियों के आवेदन निरस्त किए जाएंगे। अब क्या होगा?