Friday, 25 September 2026
INTइंडियन न्यूज़ ट्रस्टजहाँ सत्य मिले विश्वास से
ताज़ा खबरें

समाचार · बिहार

जहां आज खंडहर दिखते हैं, वहां कभी था जल का पूरा नेटवर्क, नालंदा में मिले 43 तालाबों के साक्ष्य

INT News25 September 2026 at 08:46 am

Nalanda Ancient : प्राचीन नालंदा महाविहार केवल शिक्षा का बड़ा केंद्र ही नहीं था, बल्कि यहां नगर नियोजन और जल प्रबंधन की भी विकसित व्यवस्था थी. पुरातात्विक साक्ष्यों, उपग्रह चित्रों और ऐतिहासिक स्रोतों के अध्ययन से प्राचीन नालंदा और उसके आसपास 43 तालाबों व जलाशयों की पहचान हुई है. अध्ययन में पंचाना नदी से दिघी पोखर तक करीब 10 किमी लंबी प्राचीन जलधारा के अवशेष मिलने की भी जानकारी सामने आयी है.

शिक्षा के साथ जल प्रबंधन की भी थी विकसित व्यवस्था

प्राचीन नालंदा महाविहार में नगर नियोजन के साथ जल प्रबंधन की व्यवस्थित व्यवस्था होने के पुरातात्विक साक्ष्य मिले हैं. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, पटना अंचल के पूर्व अधीक्षणविद डॉ सुजीत नयन और शोधकर्ता अर्पित तिवारी के अध्ययन में उत्खनन, उपग्रह चित्रों और ऐतिहासिक स्रोतों का विश्लेषण किया गया. इससे प्राचीन नालंदा क्षेत्र की जल व्यवस्था को समझने में नये तथ्य सामने आए हैं.

नालंदा और आसपास मिले 43 तालाब व जलाशय

अध्ययन के अनुसार प्राचीन नालंदा और उसके आसपास 43 प्राचीन तालाबों एवं जलाशयों की पहचान की गयी है. ये साक्ष्य बताते हैं कि उस समय क्षेत्र में जल संग्रह और उसके उपयोग की व्यवस्था को लेकर विशेष ध्यान दिया जाता था. स्थानीय मान्यताओं में नालंदा को 52 जलाशयों से घिरा हुआ भी बताया जाता है.

इत्सिंग ने भी किया था बड़े तालाबों का उल्लेख

सातवीं शताब्दी में नालंदा आने वाले चीनी यात्री इत्सिंग ने क्षेत्र में 10 से अधिक बड़े तालाबों का उल्लेख किया था. उनके विवरण में इन तालाबों के स्वच्छ पानी का जिक्र मिलता है. उन्होंने तालाबों में नीले कमल और कनक पुष्पों के होने की भी जानकारी दी थी. ऐतिहासिक विवरण प्राचीन नालंदा में जलाशयों की मौजूदगी का महत्वपूर्ण संदर्भ देते हैं.

समय के साथ कई जलाशयों का बदला स्वरूप

लंबे समय तक उपेक्षा, तालाबों में गाद जमने, भू-उपयोग में बदलाव और पर्यावरणीय परिवर्तन का असर प्राचीन जलाशयों पर पड़ा. कई जलाशयों का मूल स्वरूप प्रभावित हुआ है. कुछ स्थानों पर प्राचीन जलाशयों का क्षेत्र अब कृषि भूमि और धान के खेतों में बदल चुका है.

पंचाना नदी से दिघी पोखर तक मिली पुरानी जलधारा

डॉ सुजीत नयन के अनुसार सुदूर संवेदन और जीआइएस आधारित अध्ययन में कार्टोसैट-1 उपग्रह चित्रों का विश्लेषण किया गया. इसमें पंचाना नदी और दिघी पोखर के बीच एक प्राचीन नदी धारा के अवशेष का पता चला. अनुमान है कि यह जलधारा पंचाना नदी से अलग होकर उत्तर-पश्चिम दिशा में करीब 10 किलोमीटर तक बहती रही होगी.

देहर पोखर के पास मिला प्राचीन स्नान घाट

जुआफरडीह और दामनखंडा में देहर पोखर के पास पकी ईंटों से निर्मित स्नान घाट का अवशेष मिला है. इसकी लंबाई करीब आठ मीटर और चौड़ाई चार मीटर बतायी गयी है. यह संरचना बताती है कि जलाशयों का उपयोग केवल जल संग्रह तक सीमित नहीं रहा होगा, बल्कि उनसे जुड़े सार्वजनिक उपयोग के स्थल भी विकसित थे.

दामनखंडा में 30 मीटर लंबी ईंट की दीवार

दामनखंडा में करीब 30 मीटर लंबी ईंट निर्मित सीमा दीवार के अवशेष भी मिले हैं. अध्ययन में इसे नालंदा महाविहार की प्राचीन सीमा का हिस्सा होने की संभावना जतायी गयी है. हालांकि, इसकी वास्तविक भूमिका और सीमा से संबंध को समझने के लिए पुरातात्विक साक्ष्यों का अध्ययन महत्वपूर्ण रहेगा.

देहर और इंद्र पोखर के बीच मिला जल संपर्क

देहर पोखर और इंद्र पोखर के बीच आंतरिक जल संपर्क के प्रमाण भी मिले हैं. यह साक्ष्य दोनों जलाशयों के बीच संभावित जल प्रवाह व्यवस्था की ओर संकेत करते हैं. इससे प्राचीन नालंदा क्षेत्र में अलग-अलग जलाशयों को आपस में जोड़ने वाली व्यवस्था होने की संभावना सामने आती है.

नालंदा के नगर नियोजन को समझने में मददगार अध्ययन

तालाबों, जलाशयों, पुरानी जलधारा और जलाशयों के बीच संभावित संपर्क के साक्ष्य प्राचीन नालंदा के नगर नियोजन को समझने में महत्वपूर्ण हो सकते हैं. उत्खनन के साथ उपग्रह चित्रों और ऐतिहासिक स्रोतों के इस्तेमाल से अब इस क्षेत्र की पुरानी जल व्यवस्था का व्यापक अध्ययन किया जा रहा है.

Also Read : पटना-नालंदा में थानों में लगेगा अधिकारियों का जनता दरबार, जिले में रुकेंगे SSP, जानिए क्या बदलेगा