समाचार · पंजाब
अबोहर में नशा तस्कर के घर मिला व्यक्ति का शव:सुबह काम का कहकर निकले थे घर से, किसान नेता ने दी चेतावनी-कार्रवाई न होने पर आंदोलन
अबोहर उपमंडल के तहत आते गांव पंजाबा में बीते दिन एक 40 वर्षीय व्यक्ति की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत होने का मामला सामने आया है। मृतक का शव गांव के ही एक कथित नशा तस्कर के घर से बरामद हुआ है, जिससे इलाके में सनसनी फैल गई है। थाना खुईयां सरवर पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सिविल अस्पताल की मोर्चरी में रखवा दिया है और मामले की तफ्तीश शुरू कर दी है। मृतक की पहचान सुखजिंदर सिंह खेहरा (40) पुत्र गुरदेव सिंह के रूप में हुई है। सुखजिंदर पेशे से खेतीबाड़ी करते थे और अपने पीछे दो बच्चे (एक लड़का और एक लड़की) छोड़ गए हैं। जानकारी के अनुसार, सुखजिंदर सिंह बीते दिन सुबह करीब 11 बजे अपने परिवार को यह बताकर घर से निकले थे कि वे गांव के ही एक व्यक्ति के घर किसी काम से जा रहे हैं। लेकिन जब वे शाम तक वापस नहीं लौटे, तो परिवार को सूचना मिली कि सुखजिंदर सिंह का शव उसी व्यक्ति के घर के भीतर पड़ा हुआ है। शव मिलने की सूचना मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। परिजनों ने तुरंत मौके पर पहुंचकर पुलिस को सूचित किया। मामले की जांच कर रहे जांच अधिकारी गुरदीप सिंह ने बताया कि पुलिस हर पहलू से मामले की बारीकी से जांच कर रही है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सही कारणों का पता चल सकेगा। किसान नेता ने दी चेतावनी: 'कार्रवाई न हुई तो करेंगे संघर्ष' इस घटना के बाद गांव वासियों और किसान संगठनों में गहरा रोष है। गांव के निवासी और किसान नेता गुणवंत सिंह पंजाबा ने इस संदिग्ध मौत पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। उन्होंने सीधे तौर पर प्रशासन को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि गांव में पैर पसार चुके नशा तस्करों के कारण आज एक हंसते-खेलते परिवार का चिराग बुझ गया है। पंजाब सरकार नशों पर नकेल कसने के बड़े-बड़े दावे तो कर रही है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि नशा तस्करों के दिल में पुलिस का कोई खौफ नहीं रह गया है। गुणवंत पंजाबा ने पुलिस प्रशासन को साफ चेतावनी दी है कि इस संदिग्ध मौत के मामले की पूरी निष्पक्षता और बारीकी से जांच की जाए। अगर जांच में किसी भी तरह से नशे की बात सामने आती है, तो संबंधित तस्करों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि पुलिस ने नशा तस्करों के खिलाफ तुरंत कड़ा रुख नहीं अपनाया, तो वे किसान संगठनों के साथ मिलकर तीखा संघर्ष शुरू करने को मजबूर होंगे।