Tuesday, 14 July 2026
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अपना ऑफिस टूटा तो सड़क पर बैठ गए पार्षद:भोपाल में खुले आसमान के नीचे दफ्तर खोला; 4 दिन पहले तोड़ा था

INT News14 July 2026 at 12:05 am

भोपाल के वार्ड-62 में आनंद नगर चौराहे के पास नगर निगम की दुकानों के ऊपर बन रहे भाजपा पार्षद राजेश चौकसे के निजी कार्यालय को 10 जुलाई को ढहा दिया गया था। इसके बाद पार्षद की नाराजगी सामने आई थी। चौकसे का कहना था कि निगम कमिश्नर की अनुमति से ही दफ्तर बनवा रहे थे, लेकिन मंत्री के बहने पर वह तोड़ दिया गया। इसके बाद सोमवार से पार्षद चौकसे ने खुले आसमान के नीचे ही दफ्तर खोल लिया। सोमवार शाम को पार्षद ने सड़क पर मंदिर के पास ही कार्यालय शुरू कर दिया। इसकी तस्वीरें भाी सोशल मीडिया पर वायरल हो गई है। निगम दुकानों के ऊपर बनाया था ऑफिस

बता दें कि 10 जुलाई को आनंद नगर में सरकारी दुकानों के ऊपर बन रहे प्राइवेट ऑफिस को शुक्रवार सुबह जमींदोज कर दिया गया था। यह ऑफिस पार्षद बनवा रहे थे। उनका कहना है कि मैंने निगम कमिश्नर संस्कृति जैन से मौखिक अनुमति ली थी। बावजूद ये कार्रवाई की गई। 450 वर्गफुट क्षेत्र में निर्माण

कार्रवाई के दौरान लगभग 450 वर्गफुट क्षेत्र में किए जा रहे अवैध अतिक्रमण को तोड़ा गया था। कार्रवाई से नगर निगम की लगभग 30 लाख रुपए कीमत की शासकीय भूमि/संपत्ति को अतिक्रमण से मुक्त हुई। निगम ने स्पष्ट किया कि शासकीय संपत्तियों पर किसी भी प्रकार का अवैध निर्माण या अतिक्रमण किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। पार्षद का दावा- निगम से मौखिक अनुमति ली थी

पार्षद राजेश चौकसे ने दावा किया था कि उन्होंने एक महीने पहले नगर निगम आयुक्त को पत्र देकर निर्माण की जानकारी दी थी। मौखिक सहमति मिलने के बाद काम शुरू कराया। उनका आरोप है कि कार्रवाई राज्य मंत्री कृष्णा गौर के निर्देश पर की गई। उन्होंने कहा कि शहर में अन्य पार्षदों के कार्यालय भी सरकारी जमीन पर बने हैं। कार्रवाई सिर्फ उनके खिलाफ हुई। नगर निगम के चीफ सिटी प्लानर नीरज आनंद लिखार का कहना था कि निर्माण के लिए कोई लिखित अनुमति नहीं ली गई थी। इसलिए राजस्व विभाग और पुलिस की मौजूदगी में नियमानुसार कार्रवाई की गई। उन्होंने किसी भी राजनीतिक दबाव में कार्रवाई होने से इनकार किया। निगम ने कहा- राजनीतिक दबाव में नहीं हुई कार्रवाई

नगर निगम के चीफ सिटी प्लानर नीरज आनंद लिखार ने कहा कि कार्रवाई किसी राजनीतिक दबाव में नहीं हुई। निगम की संपत्ति पर बिना लिखित अनुमति निर्माण किया जा रहा था। संबंधित पक्ष को तीन दिन पहले नोटिस दिया गया था। नोटिस अवधि पूरी होने के बाद शुक्रवार सुबह राजस्व विभाग और पुलिस के सहयोग से नियमानुसार अतिक्रमण हटाया गया।