Sunday, 12 July 2026
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दीपक बैज के कार्यकाल पर भाजपा का हमला:'तीन साल में पूरी कार्यकारिणी तक नहीं बना पाए, गुटबाजी के आगे बेबस रहे': दीपक उज्जवल

INT News11 July 2026 at 11:09 pm

कांग्रेस में प्रदेश अध्यक्ष बदलने की चर्चाओं के बीच भाजपा ने मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज के कार्यकाल पर निशाना साधा है। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता उज्ज्वल दीपक ने कहा कि तीन साल के कार्यकाल में दीपक बैज अपनी पूरी प्रदेश कार्यकारिणी तक नहीं बना सके। उन्होंने इसे कांग्रेस की गुटबाजी और अंतर्कलह का नतीजा बताया। उज्ज्वल दीपक ने कहा कि राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के समर्थन से प्रदेश अध्यक्ष बने दीपक बैज का कार्यकाल पूरी तरह विफल रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस का संगठन भूपेश बघेल, टीएस सिंहदेव और नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत के अलग-अलग खेमों में बंटा रहा, जिसके कारण बैज पूरे कार्यकाल में संगठन पर पकड़ नहीं बना सके। '10 उपाध्यक्ष, 23 महामंत्री और 252 सदस्य वाली कार्यकारिणी भी नहीं बना सके' भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अपने पूरे कार्यकाल में 10 उपाध्यक्ष, 23 महामंत्री और 252 सदस्यों वाली पूर्ण प्रदेश कार्यकारिणी तक गठित नहीं कर पाए। बिना पूरी टीम बनाए कार्यकाल समाप्त होना इस बात का संकेत है कि कांग्रेस का संगठनात्मक ढांचा कमजोर हो चुका है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की गुटबाजी ही बैज की सबसे बड़ी कमजोरी रही। बड़े नेताओं के अपने-अपने खेमे होने के कारण प्रदेश अध्यक्ष संगठन को एकजुट नहीं कर सके और पूरा कार्यकाल अंदरूनी खींचतान में निकल गया। 'बैज के कार्यकाल में कांग्रेस लगातार चुनाव हारती गई' उज्ज्वल दीपक ने कहा कि दीपक बैज के प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद कांग्रेस को लगातार चुनावी हार का सामना करना पड़ा। भाजपा ने दावा किया कि कांग्रेस प्रदेश की सत्ता गंवा बैठी, बैज अपनी पारंपरिक चित्रकोट विधानसभा सीट नहीं बचा सके और लोकसभा चुनाव में पार्टी 11 में से सिर्फ एक सीट जीत सकी। उन्होंने कहा कि इसके बाद नगरीय निकाय और पंचायत चुनावों में भी कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा, जिससे स्पष्ट हो गया कि पार्टी का जनाधार लगातार कमजोर हुआ है। 'आज भी खत्म नहीं हुई गुटबाजी' भाजपा प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि कांग्रेस में आज भी गुटबाजी खत्म नहीं हुई है। उनके मुताबिक, पार्टी के वरिष्ठ नेता अपने-अपने खेमों में बंटे हुए हैं और संगठन को मजबूत करने के बजाय अंदरूनी राजनीति में उलझे हुए हैं।